
उत्तर प्रदेश के रायबरेली में मंगलवार सुबह न्यू फरक्का एक्सप्रेस की नौ बोगियां पटरी से उतर गईं. हादसे में कुल 6 लोगों को मौत हो गई है. हालांकि, क्या ये हादसा ही है या फिर इसके पीछे कोई साजिश है इस पर सवाल उठ रहे हैं.
क्योंकि हादसे के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश की एटीएस (Anti-Terrorism Squad) टीम मौके पर जांच के लिए पहुंच रही है. यही कारण है कि घटना के बाद साजिश जैसे सवाल सामने आ रहे हैं.
दरअसल, जिस जगह ये हादसा हुआ है वहां पर पटरियां टूटी हुई दिखाई दे रही हैं. जिसकी वजह से हादसा इतना बड़ा हो गया. अब यूपी एटीएस इन्हीं पहलुओं को टटोलने मौके पर पहुंच रही है.
हालांकि, वहां मौजूद पुलिस अधिकारी अभी ऐसा बयान देने से बच रहे हैं. उनका कहना है कि प्रथम दृष्टया में ये हादसे का ही मामला लग रहा है.
बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश में किसी रेल हादसे में साजिश का शक हुआ हो. इससे पहले पिछले साल हुए मुजफ्फरनगर रेल हादसे में भी एटीएस जांच के लिए पहुंची थी. तब एटीएस हादसे में टेरर एंगल को खोज रही थी. हालांकि, जांच में कुछ नहीं निकला था. सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि पिछले साल ही बिहार में आतंकियों ने पटरी पर IED रख दिया था, जिसके कारण एटीएस का शक गहराया था.
क्या था मुजफ्फरनगर हादसा?
अगस्त, 2017 में पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन मुजफ्फरनगर के खतौली रेलवे स्टेशन के पास पटरी से उतर गई थी. ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतरकर अगल-बगल के घरों और एक स्कूल में घुस गए. इस हादसे में 23 लोगों की मौत हुई थी.
गौरतलब है कि एटीएस टीम का काम किसी भी घटना में उस पहलू को खोजना है जो इसे किसी आतंकी घटना से जोड़ता है. अगर हादसे में कुछ आतंकी गतिविधि पाई जाती है तो उसपर ATS एक्शन लेती है.