छत्तीसगढ़ के जंगलों में चुनाव की अधिसूचना मिलते ही फोर्सेस ने सुरक्षा कड़ी की…

छत्तीसगढ़ में चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही फोर्स पूरी आक्रामकता से जंगलों से उतर गई है। फोर्स की योजना है कि चुनाव के दौरान नक्सलियों को उनके मांद में धकेल रखा जाए। इधर नक्सली चुनाव बहिष्कार का एलान कर चुके हैं। खुफिया रिपोर्ट मिल रही है कि अबूझमाड़ के जंगलों में बाहरी राज्यों से भी नक्सली नेता पहुंच रहे हैं। नक्सली पहले चरण के चुनाव में बड़ी गड़बड़ी कर अपनी मौजूदगी दर्शाना चाहते हैं। पुलिस मुस्तैद है। इससे पहले भी प्रधानमंत्री और अन्य बड़े नेताओं के आगमन पर नक्सली गड़बड़ी फैलाने की जी तोड़ कोशिश करते रहे हैं लेकिन उन्हें सफल नहीं होने दिया गया।

चुनाव के दौरान नक्सली गश्त और सर्चिंग के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है। छत्तीसगढ़ के स्पेशल डीजी नक्सल ऑपरेशन डीएम अवस्थी इन दिनों दिन रात बैठकें लेकर सुरक्षा का खाका तैयार करने में जुटे हैं।

अबूझमाड़ समेत बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा के जंगलों में फोर्स को मूव करने के आदेश दे दिए हैं। चुनौतीपूर्ण है प्रथम चरण का मतदान छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण के चुनाव हर बार चुनौतीपूर्ण रहते हैं। नक्सली लोकतंत्र का विरोध करते हैं, जबकि आदिवासी भारी खतरे के बाद भी मतदान के लिए पूरे जोश के साथ निकलते हैं।

बस्तर में गनतंत्र पर जनतंत्र की विजय हर चुनाव में होती है। चुनाव आयोग भी यहां की चुनौतियों से वाकिफ है। यही कारण है कि पहले चरण में बस्तर संभाग और राजनांदगांव जिले के ऐसे इलाकों को शामिल किया गया है जहां नक्सलवाद है।

इन इलाकों में सुरक्षा की विशेष तैयारी की गई है। सुरक्षाबलों की 150 कंपनियां जंगल में उतारी जा रही हैं। इस बार सबसे बड़ा बदलाव तो यह आया है कि फोर्स ऐसे इलाकों तक पहुंच चुकी है जो पहले असंभव माने जाते थे। अबूझमाड़ में बासिंग के बाद अब सोनपुर में भी सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस का कैंप है। सोनपुर वह जगह है जहां साप्ताहिक बाजार में नक्सली सरेआम बंदूक टांगकर आते थे और व्यापारियों से लेव्ही वसूलते थे।

सुकमा जिले के भेज्जी को दुर्गम माना जाता था। अब फोर्स ने इसके आगे पालोड़ी में कैंप खोल दिया है। जगरगुंडा तक सड़क बन रही है। सुकमा से कोंटा तक पहले पांच घंटे लगते थे अब कंक्रीट की सड़क पर यह सफर डेढ़ घंटे का हो गया है। इन सहूलियतों के विकास के बाद अब फोर्स का मूव करना आसान हुआ है।

सीमावर्ती इलाकों की सघन निगरानी 

बस्तर की सीमाएं ओड़िशा, आंध्र, तेलंगाना और महाराष्ट्र से जुड़ी हुई हैं। बार्डर से होकर नक्सली एक से दूसरे राज्य आते-जाते रहते हैं। इस बार बार्डर पर कड़ी निगरानी का इंतजाम किया गया है। वाहनों की तलाशी ली जा रही है। सीमाओं पर चार राज्यों की संयुक्त फोर्स गश्त कर रही है।

मतदान से पहले तेज होगी गश्त

मतदान से पहले तेज होगी गश्त- स्पेशल डीजी नक्सल ऑपरेशन डीएम अवस्थी ने नईदुनिया से बताया कि इन दिनों जगह-जगह जंगलों में फोर्स उतारी गई है। रोज ऑपरेशन हो रहे हैं हालांकि इन सूचनाओं को गोपनीय रखा जा रहा है। मतदान से पहले फोर्स बड़ा अभियान चलाएगी। नक्सलियों को उनकी मांद में खदेड़ दिया जाएगा।

इंतजाम में इजाफा

अंदरूनी इलाकों में नाइट लैंडिंग हेलीपैड बनाए गए हैं जिनसे दिन रात निगरानी की जा सकती है। ड्रोन कैमरे, खोजी कुत्ते, बम डिस्पोजल यूनिट, ग्रेहाउंड से ट्रेनिंग प्राप्त जिला पुलिस बल के विशेष दस्ते आदि इंतजामों से फोर्स के हौसले बुलंद हैं।