
दिल्ली के शरणार्थी शिविरों में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों ने म्यांमार वापस जाने से मना कर दिया है। केंद्र सरकार से अपील करते हुए उन्होंने कहा है कि जब तक उनके देश में शांति कायम नहीं हो जाती उन्हें वापस ना भेजा जाए। एक शरणार्थी ने कहा, ‘भारत से पिछले दिनों जिन सात रोहिंग्या शरणार्थियों को म्यांमार भेजा गया है, वह वहां ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहेंगे। जल्द ही उन्हें भी मार दिया जाएगा।’
दूसरे शरणार्थी हारून ने कहा कि वह 2005 से भारत में रह रहे हैं लेकिन सरकार ने 2017 से वीजा रीन्यू करना बंद कर दिया है। कुछ लोगों ने बर्मा दूतावास से भेजे गए फार्म को भरा है। आज भी म्यांमार में हमारे घरों को जलाया जा रहा है। शुक्रवार को पहली बार सात रोहिंग्या को भारत से म्यांमार भेजा गया था। यह लोग 2012 से असम के शिविरों में रह रहे थे।
इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सभी राज्यों को रोहिंग्या की पहचान करने और बायोमेट्रिक डाटा जुटाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि रिपोर्ट मिलने के बाद रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी के लिए म्यांमार सरकार से बात की जाएगी। अगस्त 2017 में म्यांमार की सेना ने दक्षिणी इलाके में रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ अभियान चलाया था। जिसमें उनके घरों को जलाया गया और हजारों की हत्या कर दी गई थी।