रूस से हथियारों का सौदा करने पर लग सकते है भारत पर भी कई प्रतिबन्ध, अमेरिका ने दी भारत कड़ी चेतावनी: जाने पूरी खबर…

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत यात्रा पर गुरुवार को दिल्ली पहुंचेंगे। पुतिन के इस दौरे पर दुनिया की नजरें हैं क्योंकि संभवत: भारत और रूस के बीच एस400 डील फाइनल हो सकती है। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच पांच अरब डॉलर के रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर हो सकता है।

पुतिन के दौरे का असर अमेरिका और भारत के संबंधों पर भी देखने को मिल सकता है। अमेरिका ने पुतिन के दौरे से पहले भारत को चेतावनी दी है। उसने कहा है कि मॉस्को के साथ किसी भी तरह का रक्षा सौदा करने पर भारत को अप्रत्यक्ष प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

अमेरिकी प्रतिबंध Countering America’s Adversaries Through Sanction Act (CAATSA) कानून का हिस्सा हैं। यूएस स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने कहा कि साल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में रूसी हस्तक्षेप, सीरियाई विद्रोह में रूस की भूमिका और क्रीमिया पर कब्जा करने के लिए रूस को सजा देने के लिए इस कानून को लाया गया है।

हम अपने सभी साथियों और साझेदारों से आग्रह करते हैं कि वह रूस के साथ ऐसा कोई लेन-देन नहीं करे, जिससे उसके खिलाफ CAATSA लगाना पड़े। अमेरिकी राष्ट्रपति इसमें छूट दे सकते हैं यदि यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए कोई खतरा नहीं हो।

अमेरिका इसलिए है परेशान

रक्षा जानकारों की मानें, तो अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से यह एयर डिफेंस सिस्टम नहीं खरीदे। जानकारों के मुताबिक, US की चिंता इस बात को लेकर है कि S-400 का इस्तेमाल अमेरिकी फाइटर जेट्स की स्टील्थ क्षमताओं को टेस्ट करने के लिए किया जा सकता है। इस सिस्टम से भारत को अमेरिकी जेट्स का डेटा मिल सकता है। अमेरिका को यह डर भी सता रहा है कि यह डेटा रूस या दुश्मन देश को लीक किया जा सकता है।

एस-400 खरीदने को लेकर भारत का रुख

माना जा रहा है कि अमेरिकी चेतावनी के बावजूद भारत और रूस इस डील पर करार करने जा रहे हैं। बुधवार को रूस के राष्ट्रपति के सलाहकार ने मास्को में इस करार को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसको लेकर संकेत दिया। माना जा रहा है कि मोदी और पुतिन के बीच रूस से एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 खरीदने को लेकर अंतिम समझौता हो जाएगा।

भारत पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि यह मिसाइल प्रणाली उसकी सुरक्षा के लिए काफी महत्वपूर्ण है और उसे हासिल करने का उसका इरादा पक्का है। रूस पर अमेरिका की तरफ से लगे प्रतिबंधों के बावजूद भारत इस सौदे को लेकर अडिग है।

पिछले महीने अमेरिका के साथ ”टू प्लस टू” वार्ता में भारत ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट कर दिया था कि यह प्रणाली खरीदने में वह ज्यादा देरी नहीं कर सकता, लेकिन इसके अलावा भी रूस से दो श्रेणी के हेलीकॉप्टरों को खरीदने की बात अंतिम चरण में है। इसमें कामोव 226टी हेलीकॉप्टर और एमआई-17वी-5 हेलीकॉप्टर है।

भारतीय सेना दोनों का अध्ययन काफी पहले कर चुकी है और इसे अपनी जरुरत के मुताबिक मुफीद बता चुकी है। अगर सारे समझौते हो जाते हैं तो भारतीय रक्षा क्षेत्र में रूस की धमक और बढ़ जाएगी। भारत अभी भी अपनी कुल रक्षा जरूरत का 60 फीसद रूस से लेता है, जबकि दूसरी तरफ अमेरिका व भारत के बीच सैन्य संबंधी तेजी से बढ़ रहे हैं