
सेना देश की बाप है तो पुलिस को भी मां का दर्जा दीजिए !
फौजी हों या पुलिसकर्मी दोनों ही पेशेवर देश और देशवासियों की रक्षा-सुरक्षा के लिए विशिष्ट सेनाओं को अंजाम देते हैं। पेशेवर सैनिकों का सम्मान करते हैं हम सब । इन्हें देश का गौरव और मुल्क की ताकत मानते हैं। इन पर भरोसा करते हैं। लेकिन पुलिस की नियत पर हमारा शक बना रहता है। इनकी अस्मिता को देश की आबरू नहीं मानते।
जबकि पुलिस मां की नर्म गोद की तरह हमारी हिफाजत करती है और फौज बाप की सख्त निगरानी की तरह देश और देशवासियों की रक्षा में मुस्तैद रहती है। दोनों तनख्वाह लेते हैं। दोनों को सरकारी सुविधायें मिलती हैं। दोनों के परिवार की फिक्र सरकारें करती हैं। दोनों पेशेवर परिवार से दूर रहते हैं। रातों को जागते हैं। जिन्दगी के खतरे सहते हैं। शहादतें देते हैं। कोई देश की रक्षा के लिए जिन्दगी लगा देता है और कोई कानून की हिफाज़त और नागरिकों की सुरक्षा में जीवन झोंक देता है।
लेकिन अपवाद पर भी गौर कीजिए। आंखें बंद करके हमें ना फौज को भगवान समझना चाहिए है और ना पुलिस को खुदा। इतिहास साक्षी है कि देवताओं और फरिश्तों ने भी गुनाह किये थे। पुलिस गलतियां करती हैं। भ्रष्टाचार को अंजाम देती है। लोगों पर जुल्म करती है। पुलिस को खूब गालियाँ भी पड़ती हैं। लेकिन हम फौजियों के गुनाहों को नजरअंदाज कर देते हैं। यहां भी खूब भ्रष्टाचारी हैं। गद्दार हैं। आई एस आई का एजेंट बनके देश के प्रति इन्होंने भी गद्दारी की है। भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है। रेप किये हैं।
अपवाद के आईने ने तो मां-बाप को भी अपने बच्चों की हत्या करते देखा है। देश के बाप जैसी फौज के फौजियों की विशिष्ट सेवाओं के सम्मान में हम कभी चंद फौजियों के गलत कारनामों को देखकर भी फौज के सम्मान में कोई कमी नहीं छोड़ते। तो फिर चंद पुलिसकर्मियों के गलत कारनामों को देखकर हम पुलिस डिपार्टमेंट का अपमान क्यों करने लगते हैं?????
सेना की आलोचना करने वाला गद्दार हो सकता है तो पुलिस को गलियाने वाला भी गद्दार क्यों नहीं !
ज़रा सोचिए !
-नवेद शिकोह
9918223245