महाराष्ट्र सरकार जाएगी नए CJI गोगोई के समक्ष, भीमा कोरेगांव केस के दिल्ली HC के पुराने फैसले के खिलाफ…

महाराष्ट्र सरकार भीमा कोरेगांव मामले को लेकर अब नए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के समक्ष जाएगी। राज्य सरकार इस मामले को सीजेआइ गोगोई के सामने ले जाकर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक और गौतम नवलखा के हाउस अरेस्ट को बहाल करने के निर्देश की मांग करेगी। बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को गौतम नवलखा को हाउस अरेस्ट से मुक्त करने का आदेश दिया था।

भीमा -कोरेगांव हिंसा मामले में गौतम नवलखा और अन्य पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं को नजरबंद किया गया था। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा था कि नवलखा को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में लिया जाना सही नहीं है। दिल्ली हाई कोर्ट ने नवलखा को राहत देते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते उन्हें आगे के उपायों के लिए चार हफ्तों के अंदर उपयुक्त अदालत का रुख करने की छूट दी थी, जिसका उन्होंने उपयोग किया है।

हाई कोर्ट ने निचली अदालत की ट्रांजिट रिमांड के आदेश को भी रद कर दिया। इसके पहले साकेत कोर्ट ने पुणे पुलिस को नवलखा को साथ ले जाने की मंजूरी दे दी थी। हालांकि बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने स्टे लगा दिया था। बता दें कि, दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है जिसमें नवलखा और चार अन्य लोगों को कोर्ट ने चार हफ्तों के लिए और नजरबंद रखने का आदेश दिया था।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र पुलिस ने 28 अगस्त को गौतम नवलखा को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इसके अलावा 4 अन्य वामपंथी कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने आरोप लगाया कि इन सभी का नक्सलियों से लिंक रहा है और भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़काने में भी इनका हाथ था। गिरफ्तार किए गए एक्टिविस्टों में गौतम नवलखा के अलावा वरवर राव, अरुण फरेरा, वरनन गोंजालवीस, सुधा भारद्वा शामिल हैं। इनकी नजरबंदी सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते के लिए बढ़ाई थी, ताकि कानूनी कदम उठाए जा सकें।

जानें- कौन हैं गौतम नवलखा

दक्षिण दिल्ली के नेहरू विहार निवासी गौतम नवलखा सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने नागरिक अधिकार, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक अधिकार के मुद्दों पर काम किया है। वर्तमान में नवलखा अंग्रेजी पत्रिका इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली (ईपीडब्ल्यू) में सलाहकार संपादक के तौर पर भी काम कर रहे हैं। नवलखा लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर) से जुड़े हैं।

नवलखा ने इंटरनेशनल पीपल्स ट्रिब्यूनल ऑन ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस इन कश्मीर के संयोजक भी तौर पर काम किया है। वह कश्मीर मुद्दे पर जनमत संग्रह का समर्थन कर चर्चा में रहे हैं और इसी वजह से मई 2011 में श्रीनगर एयरपोर्ट पर उन्हें रोक लिया गया था और प्रवेश से इनकार कर दिया गया था। कश्मीर की तरह ही छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी सेना की कार्रवाई शुरू होने पर गौतम नवलखा माओवांदी आंदोलनों पर भी नजर रखने लगे थे।