झारखंड सरकार के मंत्री सीपी सिंह ने कहा-पूर्ण शराबबंदी ही समाधान, बिहार के बाद अब झारखंड में भी शुरू हुई शराबबंदी की मांग…

बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद अब झारखंड से भी इसकी मांग उठनी शुरू हो गई है। राज्‍य सरकार के नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने बुधवार को खुले मंच से झारखंड में शराबबंदी की मांग की। बीते दिन रांची के हातमा बस्‍ती में जहरीली शराब से सात मौतों के बाद मंत्रीजी गांव में मातमपुर्सी के लिए पहुंचे थे। इस दौरान उन्‍होंने कहा कि ऐसी मौतों का स्‍थायी समाधान पूर्ण शराबबंदी ही है।

एक जिम्‍मेवार मंत्री और भाजपा के बड़े नेता की ओर से राज्‍य में शराबबंदी को लेकर पहली बार मुखर रूप से आवाज उठाई गई है। हालांकि ब‍िहार में शराबबंदी के बाद झारखंड की शराब से आय काफी बढ़ गई है। यहां तक कि बीते दिनों कबड्डी लीग और कई बड़े आयोजन पटना से रांची महज शराबबंदी के कारण ही शिफ्ट हो गए थे। बहरहाल रघुवर सरकार के एक बड़े मंत्री की ओर से शराबबंदी की मांग उठाए जाने के बाद इस मामले के राज्‍यभर में जोर पकड़ने की संभावना दिख रही है। पहले भी यहां जनजातीय इलाकों में शराब से हाेने वाली मौतों को लेकर पूर्ण शराबबंदी की मांग कई एनजीओ और संस्‍थाएं कर चुकी हैं।

मंत्री ने की मातमपुर्सी : रांची के हातमा में जहरीली शराब से एक के बाद एक कुल सात मौतों के तीन दिन बाद बुधवार को राज्‍य सरकार के नगर विकास मंत्री सीपी सिंह मातमपुर्सी के लिए पहुंचे हैं। हातमा पहुंचे नगर विकास मंत्री सीपी ने गांव में जन सभा कर शराबबंदी पर चर्चा की। उनके साथ मौके पर नगर आयुक्त मनोज कुमार, मेयर आशा लकड़ा, डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय सहित कई लोग मौजूद हैं। मंत्री सीपी सिंह ने कहा कि हर हाल में हो पूर्ण शराबबंदी होनी चाहिए, तभीलोगों की जिंदगी बचाई जा सकेगी।

जहरीली शराब से सात मौतों के बाद अब सरकार व प्रशासन ने डेरा डाल दिया है। लीगों की जिंदगिया बचाने के लिए अब सरकार शराबबंदी की ओर बढ़ रही है। बुधवार को नगर विकास मंत्री सीपी सिंह, नगर आयुक्त सीपी सिंह, मेयर आशा लकड़ा, डिप्टी मेयर सहित अन्य लोग हातमा बस्ती पहुचे और मोहल्लेवासियों के साथ जनसभा की। इस जनसभा में मंत्री सीपी सिंह ने कहा शराब को पूर्ण रूप से छोड़ देना चाहिए।

सरकार अब शराबबंदी पर विचार कर रही है। लेकिन आपको पहले इसके लिए संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा हातमा में जहरीली शराब बनकर पहुच रही यह गंभीर बात है। उत्पाद विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। शराबबंदी पर ग्रामीणों ने भी विचार रखे। इसबीच शैफाली नाम की महिला ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सरकार व प्रशासन तब जागी है जब सात लोगों की जान चली गयी। सरकार  व प्रशासन पहले ध्यान देती तो इस मातम से गुजरना नही पड़ता। महिला के इस सवाल पर सभी सकते में आ गए। उन्हें चुप कराने के बाद सभा समाप्त हो गयी।

पीडि़त परिवारों को सांत्वना देने हातमा पहुंचे थे बाबूलाल : जहरीली शराब पीने से अकाल मौत के शिकार हुए लोगों के परिजनों को सांत्वना देने मंगलवार की शाम राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री सह झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी हातमा पहुंचे। मरांडी ने इस दौरान बस्तीवालों से अपील की कि वे नशा का सेवन छोड़ दें। उन्होंने कहा कि नशा के कारण आज परिवार और समाज समाप्त हो रहा है। राज्य में पूर्ण शराब बंदी अब समय की मांग है। अगर राज्य सरकार को यहां के लोगों और उनके स्वास्थ्य की चिंता वास्तव में है तो सरकार को अविलंब पूर्ण शराबबंदी की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

झाविमो सुप्रीमो ने कहा कि राज्य के आदिवासी, दलित, पिछड़े समुदाय के लोग गरीबी के कारण सस्ती शराब का सेवन करते हैं। सरकार को यह बात समझनी चाहिए। अगर समाज में कुछ बुरी आदतें होती है तो उसके समाधान के लिए कड़े कदम उठाने से भी सरकार को गुरेज नहीं करना चाहिए। मारे गए लोगों के परिजनों की आर्थिक स्थिति दयनीय है। ऐसे में सरकार मृतकों के आश्रितों को नौकरी दे। तत्कालीन अर्जुन मुंडा की सरकार में यह काम हो चुका है। झाविमो के केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह के अलावा सुनील गुप्ता, जितेंद्र वर्मा, बलकू उरांव, अभिजीत दत्ता, सूरज टोप्पो भी वहां मौजूद थे।