…तो इस वजह से राहुल गांधी ने अपनी ही पार्टी के नेता से क्यों मांगी माफी

सत्तापक्ष पर राफेल से लेकर दूसरे मुद्दों पर आक्रामक हमला करने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हाल ही में अपने ही एक नेता से माफी मांगनी पड़ी. गौर करने वाली बात ये है कि राहुल गांधी ने एक बार नहीं बल्कि 3 से 4 बार बार बोला ‘I apologise’. आखिर राहुल गांधी को अपनी ही पार्टी के नेता से क्यों बार-बार माफी मांगनी पड़ी. दरअसल हुआ यूं कि हाल ही में पुनर्गठित पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी के नेता राहुल गांधी से मिलने पहुंचे.
मिलने वालों में पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्रा, कांग्रेस सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और नवनियुक्त चुनाव अभियान समिति के अध्य़क्ष अधीर रंजन चौधरी, पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रभारी गौरव गोगोई समेत कुल 17 लोग थे. सूत्र ने बताया कि इस मौके पर राज्य में पार्टी को मजबूत करने की रणनीति पर बातचीत तो हुई, लेकिन पिछले साढ़े चार साल तक प्रदेश अध्यक्ष रहे अधीर रंजन चौधरी ने राहुल गांधी के समक्ष शिकायत की जिसपर राहुल गांधी को गलती स्वीकार करने के साथ ही साथ माफी भी मांगनी पड़ी.आखिर अधीर रंजन चौधरी ने क्या शिकायत की?

अधीर रंजन ने राहुल गांधी को साफ-साफ कहा कि इस तरह का व्यवहार उनकी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान के खिलाफ है और ये गलत है. उनकी शिकायत के बाद बाकी सभी मौजूद नेता सकते में आ गए लेकिन राहुल गांधी ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि ये गलत हुआ है. राहुल गांधी ने इस गलती पर तुरंत बैठक में मौजूद पश्चिम बंगाल के प्रभारी गौरव गोगोई से पूछा कि आखिर ऐसा क्यों हुआ. गौरव गोगोई ने कुछ कहा लेकिन वास्तविक वजह का पता नहीं चल सका कि आखिर ऐसा क्यों हुआ.

इसके बाद राहुल गांधी ने तुरंत अधीर रंजन चौधरी को कहा कि ये गलत हुआ है और इसके लिए वे क्षमा मांगते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने एक बार नहीं बल्कि 3 से 4 बार चर्चा के दौरान ये दोहराया कि उनके साथ हुई गलती के लिए वो खुद क्षमा मांगते हैं. एक बार इस चर्चा के बाद राहुल गांधी के साथ बैठकर कांग्रेस के पश्चिम बंगाल के नेताओं ने राज्य में कांग्रेस को मजबूत करने और पार्टी की भावी रणनीति पर चर्चा की.

कौन हैं अधीर रंजन चौधरी?
अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के जुझारू और जमीनी नेता के तौर पर जाने जाते हैं. 1999 से लगातार 4 बार से वे बहरामपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं. 1998 के लोकसभा चुनाव में जिस सीट पर कांग्रेस तीसरे स्थान पर थी और लेफ्ट पहले और दूसरे स्थान पर बीजेपी, ठीक एक साल बाद यानि 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में अधीर रंजन चौधरी ने कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर पहला स्थान हासिल किया, लेफ्ट दूसरे स्थान पर रही और बीजेपी तीसरे स्थान पर.

1998 के चुनाव में बहरामपुर में कांग्रेस को सिर्फ 21 प्रतिशत वोट मिला था, लेकिन 1999 के चुनाव में कांग्रेस को 45 प्रतिशत से अधिक और बाद के सभी लोकसभा चुनाव मेें 50 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त हुए. 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अधीर रंजन चौधरी को पश्चिम बंगाल कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था और पिछले साढ़े चार साल से वो कांग्रेस के प्रदेश अध्य़क्ष थे, लेकिन हाल ही में सोमेन मित्रा को उनकी जगह प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और अधीर रंजन को राज्य चुनाव अभियान कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया. अधीर रंजन चौधरी केन्द्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं.

गौर करने वाली बात है कि आमतौर पर इस तरह की शिकायत कोई कांग्रेस अध्यक्ष के समक्ष नहीं करता, लेकिन अधीर रंजन चौधरी बेबाक माने जाते हैं और उनकी शिकायत पर गलती मानने और क्षमा मांगने के बाद राहुल गांधी ने भविष्य में ऐसा न करने का भी आदेश पार्टी के जिम्मेदार नेताओं को दिया है.