
पिछले दिनों देश के कई हिस्सों में हुई भारी बारिश और बर्फबारी की वजह से लेह-लद्दाख से कुल्लू-मनाली के रास्ते की सड़कों पर बर्फ की सफेद चादर फैल गई। इस बर्फबारी के बीच लुधियाना के जीजा-साला समेत अलग-अलग जगहों के 96 लोग पांच दिन तक बर्फ में फंसे रहे। न खाने का सामान न पीने को पानी। लिहाजा वहां बर्फ की वजह से रूके ट्रक ड्राइवरों से मांग-मांग कर पांच दिन तक एक टाइम खाना खाया और जान बचाई। मौत के इस मंजर का आंखों देखा हाल पंजाब के जिला लुधियाना के धांधरा रोड निवासी दीपक सिंगला और उनके साले मेहुल रहेजा ने बयां किया।
पांच दिन तक मौत से हुई लड़ाई
पंजाब मंडी बोर्ड के सुपरवाइजर दीपक सिंगला अपने साले मेहुल के साथ बाइक पर लेह-लद्दाख की ड्राइव के लिए 14 सितंबर को निकले थे। 21 सितंबर को उन्होंने पैैंगाग लेक से वापसी शुरू की, जिन्होंने 23 सितंबर को घर पहुंचना था। रात को वह सो गए, सुबह जब उठे तो बर्फबारी हो रही थी। लेकिन उन्होंने सोचा कि वो धीरे-धीरे आगे पहुंच जाएंगे। अभी वो कुछ दूरी पर ही पहुंचे थे, कि बर्फबारी तेज हो गई। जिसके बाद उनके पीछे वाहनों की लाइन लगती गई, क्योंकि चारों तरफ बर्फ ही बर्फ हो गई।
20 से ज्यादा ट्रक, गाड़ियों में सवार लोग वहीं फंस गए। जिनकी मदद के लिए आगे-पीछे कोई नहींं था। पहला दिन तो जैसे-तैसे निकल गया, लेकिन अगले दिन तक किसी के पास खाने के लिए कुछ नहीं था। लिहाजा उन्होंने आसपास खड़े ट्रक ड्राइवरों से खाना मांगा तो उन्होंने खाने के लिए चावल दिए। फिर उन्होंने सोचा कि उनके अलावा बाकी के लोग भी फंसे है। लिहाजा उन्होंने दूसरों के लिए भी खाना जुटाया और उन्हें खिलाया। इस दौरान बर्फ गिरना बंद नहीं हो रहा था। मंगलवार तक ट्रक ड्राइवरों के पास भी खाने का सामान खत्म होने लगा और बर्फ गिरना बंद नहीं हो रहा था।
तब वहीं के कुछ युवकों ने कहा कि वो आगे जाते हैं और उनके लिए मदद मांगते हैं। अगर किसी को उनके पीछे आना है तो वे रास्ते में अपने पैरों के निशान छोड़ते हुए जाएंगे। उस दिन तो किसी ने हिम्मत नहीं की। लेकिन बुधवार को दीपक, उनके साले और तीन अन्य लोगों ने हिम्मत जुटाई और मदद मांगने के निकल पड़े। दीपक के मुताबिक सड़क पर चार-चार फीट बर्फ थी। इसमें से निकलकर उन्होंने 12 किलोमीटर का रास्ता तय किया और एक ढाबे पर पहुंचे। उनकी टांगे सुन्न हो चुकी थी और ऑक्सीजन कम होती जा रही थी।
दीपक के मुताबिक वहां आर्मी की गाड़ियां पहुंची और जवानों को उन्होंने सारी बात बताई। इस पर आर्मी के जवान उन्हें लेकर कैंप में पहुंचे। इसके बाद वे बाकी लोगों को लेने के लिए पहुंचे। 28 सिंतबर को आर्मी के जवानों ने उक्त जगह पर फंसे 85 और लोगों को पैदल बर्फ से बाहर निकाला। जिसमें बच्चे और बूढ़े शामिल थे। इसके बाद किसी को हैलीकॉप्टर तो किसी को कार से उनके ठिकानों पर पहुंचाया गया।
दीपक ने बताया कि बर्फ की वजह से ट्रकों के टायर स्लिप करने लगे। इस दौरान एक ट्रक जिसमें पांच लोग सवार थे, खाई की तरफ बढऩे लगा। वो काफी हद तक खाई में पहुंच गया था, लेकिन एक बड़े पत्थर की वजह से वो बच गए, नहीं तो वो सभी ट्रक समेत खाई में होते।
परिवार से नहीं हुआ संपर्क
दीपक ने बताया कि इस दौरान उनके फोन भी बंद हो गए, जिसकी वजह से परिवार से कोई संपर्क नहीं हो पाया। लेकिन जब वो आर्मी कैंप पहुंचे तो उन्होंने अपने परिवार संपर्क किया। तब उनकी जान में जान आई। शनिवार शाम दीपक अपने घर लुधियाना पहुंच गए।