
अलीगढ़ ht के थाना हरदुआगंज में हुए एनकाउंटर पर शुरू हुई सियासत पहुंची एएमयू कैंपस के अंदर, छात्रों के एक गुट ने एनकाउंटर को बताया लाइव शूट ड्रामा, छात्रों ने कैंपस के अंदर एएमयू इंतजाम द्वारा प्रोटेस्ट रोकने के बाद किया आपस में टॉकिंग प्रोग्राम, जबकि पुलिस लगातार एनकाउंटर में मारे गए दोनों अभियुक्तों के खिलाफ दे चुकी है अब तक कई सारे ठोस सबूत, छात्रों ने उठाई सीबीआई की जांच की मांग।
अलीगढ़ के थाना हरदुआगंज इलाके में विगत दिनों पुलिस एनकाउंटर में मारे गए दो अभियुक्तों पर शुरू हुई सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है, शहर से शुरू हुई राजनीतिक सियासत अब एएमयू कैंपस के अंदर दस्तक दे चुकी है, दरअसल आज एक छात्र गुट ने विगत दिनों हुए पुलिस एनकाउंटर पर सवाल खड़े करते हुए एएमयू के अंदर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ एक प्रोटेस्ट का आयोजन किया, लेकिन प्रोटेस्ट को ऑर्गेनाइज करने वाले छात्रों का कहना है कि एएमयू इंतजामियां द्वारा इस प्रोटेस्ट को निकालने की अनुमति प्रदान नहीं की गई
जोकि एएमयू की लाइब्रेरी कैंटीन से शुरू होकर एएमयू के बावे सैयद गेट तक आना था, प्रोटेस्ट की अनुमति न मिलने की परिस्थिति में छात्रों ने लाइब्रेरी कैंटीन के अंदर ही एकत्रित होकर टॉकिंग प्रोग्राम ऑर्गेनाइज कर दिया, जहां पर देखा गया कि छात्रों ने अपने अपने हाथों में पुलिस को कटघरे में खड़े करने वाले पेंपलेट्स ले रखे थे, छात्रों ने कहा कि विगत दिनों हुआ पुलिस एनकाउंटर पूरा का पूरा फिल्मी अंदाज में लाइव शूट ड्रामा था, जिसकी निष्पक्ष सीबीआई जांच होनी चाहिए और एनकाउंटर में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग रखी।
इस प्रोटेस्ट के संबंध में जब एएमयू जामिया से संपर्क किया गया तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया, जबकि पीआरओ सेल में यहां तक कह दिया कि इस तरह के किसी प्रोटेस्ट या कार्यक्रम के संबंध में कोई जानकारी नहीं है, हालांकि इस बात को भी उन्होंने कैमरे पर बोलने से इंकार कर दिया, अक्सर देखा गया है कि शिक्षा के मंदिर एएमयू में जहां छात्र दूरदराज से शिक्षा ग्रहण करने आते हैं और यहां आकर लोकल पॉलिटिक्स में पड़ जाते हैं, जिसको लेकर कई बार प्रोटेस्ट और धरना करते हैं, जिनके बारे में एएमयू को कतई जानकारी नहीं होती है, सवाल यह उठता है कि क्या कोई भी छात्र कैंपस के अंदर शहर से जुड़ी किसी घटना को लेकर कोई भी कार्यक्रम ऑर्गनाइज कर लेता है, लेकिन एएमयू इंतजामियां उसको नजरअंदाज करते हुए सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठाने वाले कार्यक्रम ऑर्गेनाइज होने देता है।