
DNA में हमारा अगला विश्लेषण, भारत के ‘National Highways’ पर आधारित है. अगर आप दिल्ली से मुंबई और मुंबई से चेन्नई के बीच बने Highways पर सफ़र करते हैं तो आपको ये ख़बर बहुत ध्यान से देखनी चाहिए. लेकिन इस ख़बर की संपूर्ण जानकारी से पहले हम आपको Highway वाली एक कहानी सुनाना चाहते हैं. हम आपको दुनिया के एक ऐसे Highway के बारे में बताना चाहते हैं, जिसे ‘Highway of Death’ यानी ‘मौत की सड़क’ कहा जाता है.
इराक और कुवैत के बीचो-बीच 6 Lane की एक सड़क है. जिसे किसी ज़माने में Highway 80 के नाम से जाना जाता था. लेकिन 27 वर्ष पहले हुई एक घटना की वजह से, अब इसकी पहचान ‘Highway of Death’ के रुप में हो गई है. वर्ष 1991 में इराक ने कुवैत पर आक्रमण करने के लिए इसी सड़क का इस्तेमाल किया था. हालांकि, सीजफायर की घोषणा के बाद,26 और 27 फरवरी 1991 की रात को, जब इराक की सेना कुवैत छोड़ने की कोशिश कर रही थी. उसी वक्त अमेरिकी सेना ने Fighter Planes से उन पर बमबारी शुरू कर दी. इस हमले में सैकड़ों की संख्या में इराकी सैनिक मारे गए. जबकि, 2 हजार गाड़ियां तबाह हो गईं और कई लोग अपनी गाड़ियों को जलता हुआ छोड़कर वहां से भाग गए थे.
27 साल पुरानी इस कहानी में सड़क और मौत का जो रिश्ता है, वो भारत की सड़कों पर भी दिखाई देता है. एक नई स्टडी के मुताबिक भारत के National Highways, यहां के लोगों की मौत का कारण बन रहे हैं. इस स्टडी में ये खुलासा हुआ है, कि देश की राजधानी दिल्ली से मुंबई के बीच बने Highway का 30 फीसदी हिस्सा और मुंबई से चेन्नई तक बने Highway का 50 फीसदी हिस्सा बहुत ख़तरनाक है. यानी National Highways के बहुत बड़े हिस्सों में बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं.
World Bank के Global Road Saftey and International Road Assessment Programme और National Highways Authority of India ने, देश के दो National Highway Corridors की सुरक्षा की जांच करके उन्हें Star Rating दी है.
इन दोनों Corridors को दुनिया भर की Crash Studies के आधार पर One से Five स्टार तक की रेटिंग दी गई है.
स्टडी में 5 हज़ार 431 किलोमीटर लंबे इन दोनों Corridors के सिर्फ 40 किलोमीटर के हिस्से को ही Five स्टार रेटिंग मिली है.
जबकि 245 किलोमीटर के हिस्से को Four स्टार रेटिंग और इस नेटवर्क के करीब 55 फीसदी हिस्से को Three स्टार रेटिंग दी गई है.
जबकि, दिल्ली से मुंबई और मुंबई से चेन्नई को जोड़ने वाले National Highway के बाकी बचे 39 प्रतिशत हिस्से को One या Two स्टार की रेटिंग मिली है. और इसका मतलब ये है, कि ये हिस्से यात्रियों के लिए खतरनाक हैं.
रिपोर्ट में ये बताया गया है कि यहां पर दु-पहिया वाहनों के लिए, और पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतज़ाम नहीं किए गए हैं. उदाहरण के तौर पर इन Corridors पर, कुछ दूरी तक, सड़क समतल रहती है, लेकिन बीच-बीच में कई ऐसे अवरोधक हैं, जो सड़क दुर्घटना का कारण बनते हैं. सड़कों के निर्माण के बाद उनका रख-रखाव भी ठीक से नहीं किया जाता.
ये रिपोर्ट इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि National Highways देश के पूरे रोड नेटवर्क का सिर्फ दो फीसदी हिस्सा हैं. लेकिन सड़क दुर्घटना में होने वाली कुल मौतों में से करीब 36 फीसदी मौतें, इन्हीं Highways पर होती हैं. वर्ष 2017 में करीब 52 हज़ार लोगों की मौत राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटना की वजह से हुई. जबकि इसी दौरान करीब 40 हज़ार लोगों की मौत State Highways पर हुईं. एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल भारत में हर दस मिनट में तीन लोगों की मौत सड़क दुर्घटना की वजह से हुई
आप अक्सर सड़क दुर्घटनाओं की खबरों को हल्के में लेते होंगे..लेकिन इन खबरों को छोटा समझने की भूल नहीं करनी चाहिए.. क्योंकि सड़क दुर्घटनाएं कभी भी और किसी के भी साथ हो सकती है. और इन दुर्घटनाओं में एक ही झटके में पूरा परिवार बर्बाद हो जाता है. ऐसी दुर्घटनाओं की एक वजह ये भी है कि लोग सड़क पर बहुत लापरवाही से गाड़ी चलाते हैं और ट्रैफिक के नियमों का पालन नहीं करते. हमारे देश में सड़कें तो तेज़ी से बन रही हैं, लेकिन उतनी तेज़ी से लोगों की काबिलियत नहीं बढ़ रही. सड़क पर ज़िम्मेदारी के साथ वाहन चलाने के लिए भी काबिलियत की ज़रूरत होती है और ये बात भारत के आम लोगों को समझनी होगी.
आज सवाल ये भी है कि जिस देश में सड़क दुर्घटनाओं में इतने ज्यादा लोग मारे जाते हों, वो देश दुनिया की सुपरपावर कैसे बन सकता है? सड़क हादसे तीन वजहों से होते हैं, पहली वजह होती है अपनी गलती , दूसरी वजह होती है – सामने वाले की गलती और तीसरी वजह होती है – यातायात से जुड़े Infrastructure के डिज़ाइन में कमी. हमारे देश में कई बार गलत जगहों पर फ्लाईओवर बना दिये जाते हैं.. गलत जगहों पर यू-टर्न होते हैं.. और कई बार सड़कों का पूरा का पूरा डिज़ाइन ही गलत होता है. हमें ऐसी गलतियों को सुधारना होगा, लेकिन इसके साथ ही देश के नागरिकों को भी अपना स्तर बढ़ाना होगा और ज़िम्मेदारी से Highways और Expressways का इस्तेमाल करना होगा. वर्ना लोग ऐसे ही मरते रहेंगे और अच्छी से अच्छी सुविधाएं भी हमारे किसी काम नहीं आएंगी.