अजादारों ने औन व मोहम्मद का मातम किया

लखनऊ। ht अय्यामे अजा के पांचवें दिन अजादारों ने इमाम हुसैन की चहीती बहन जनाबे जैनब के बेटों जनाबे औन व मोहम्मद के ताबूत की जियारत की। शहर के विभिन्न इमामबाड़ों व अजाखानों में औन-मोहम्मद के ताबूत निकाले गये, जिनकी जियारत कर अजादार अश्कबार हो गये। 
अंजुमन एैनुल अजा की ओर से हैदरगंज स्थित कर्बला मुंशी फजले हुसैन में औनो-मोहम्मद के ताबूत की जियारत करायी गयी। ताबूत से पहले हुई मजलिस को मौलाना तकी रजा ने खिताब किया। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना ने मैदाने कर्बला में जनाबे औन-मोहम्मद की जंग, उनकी शहादत और लाशों को खेमों में लाने का जिक्र किया तो अजादार बेकरार हो उठे। मजलिस के बाद कर्बला परिसर में ताबूत, अलम और जुलजनाह का जुलूस निकाला गया, जो कर्बला परिसर में गश्त कर सम्पन्न हुआ। वहीं मुफ्तीगंज के बेल वाला टीला पर यौमे औनो-मोहम्मद मनाया गया। इस मौके पर अजादारों ने ताबूत, अलम और जुलजनाह की जियारत की। मातमी अंजुमनों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। 
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कर्बला के शहीदों की याद में रविवार को हजरतगंज स्थित इमामबाड़ा शाहनजफ में अंगारों पर मातम किया गया। अंजुमन मासूमिया असगरिया की ओर से रात 9 बजे हुई मजलिस को मौलाना फरीदुल हसन ने खिताब किया। मौलाना ने मजलिस को खिताब करते हुए शहादते इमाम हुसैन के बाद ख्यामे हुसैनी में आग लगाए जाने का मंजर बयान किया तो अजादार बेकरार हो उठे। मजलिस के बाद इमामबाड़ा परिसर में दहकते हुए अंगारों पर अकीदतमंदों ने या हुसैन-या अब्बास की सदा बुलंद करते हुए मातम किया। अकीदतमंदों में बड़ी संख्या में हिन्दू मातमदार भी शामिल थे, जिन्होंने कर्बला के शहीदों को आग पर मातम कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर अकीदतमंदों ने अलम, इमाम हुसैन की सवारी का प्रतीक जुलजनाह, हजरत अली असगर की निशानी गहवारा की जियारत की और दुआएं मांगी। दूसरी ओर सआदतगंज के कश्मीरी मोहल्ला स्थित मस्जिद आमली में भी अजादारों ने आग पर मातम कर कर्बला के शहीदों का गम मनाया। यहां हुई मजलिस को मौलाना अख्तर हुसैन नकवी ने खिताब किया। मजलिस के बाद अजादारों ने या हुसैन-या हुसैन की सदा बुलंद करते हुए दहकते हुए अंगारों पर मातम किया। 
आसिफी इमामबाड़े में आग पर मातम आज
अंजुमन सोगवाराने हुसैन की ओर से सोमवार को आसिफी इमामबाड़े में रात 9:30 बजे आग पर मातम किया जाएगा। आसिफी इमामबाड़े में होने वाले मातम में बड़ी संख्या में हिन्दू अकीदतमंद भी या हुसैन की सदाएं बुलंद करते हुए शामिल होते हैं। 
गहवारए अली असगर की जियारत आज
इमाम हुसैन के छह माह के मासूम पुत्र जनाबे अली असगर की याद में सोमवार छह मोहर्रम को तहसीनगंज स्थित जामा मस्जिद में जनाबे अली असगर की निशानी गहवारे की जियारत कराई जाएगी। अंजुमन नैय्यरुल इस्लाम की ओर से शाम 6:30 बजे फरहत हुसैन एडवोकेट मजलिस को खिताब करेंगे, जिसके बाद मातमी अंजुमनें नौहाख्वानी व सीनाजनी करेगी और अकीदतमंदों को गहवारए अली असगर की जियारत कराई जाएगी। इसके अलावा डालीगंज स्थित कर्बला नसीरुद्दीन हैदर में भी अजादारों को गहवारे की जियारत कराई जाएगी। अंजुमन असगरे हुसैन की ओर से कर्बला परिसर में रात 8 बजे होने वाली मजलिस को मौलाना मोहम्मद मियां आब्दी खिताब करेंगे, जिसके बाद अजादारों को गहवारए अली असगर व अन्य तबर्रुकात की जियारत कराई जाएगी। 
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माहे मोहर्रम की पांचवीं तारीख को अजादारों ने इमाम हुसैन के छह माह के मासूम पुत्र जनाबे अली असगर और इमाम हुसैन के भांजों जनाबे-औनो मोहम्मद की शहादत का गम मनाया। मजलिसों में उलमा व जाकिरों ने जनाबे अली असगर और जनाबे औन-मोहम्मद की शहादत बयान की तो अजादार खुद पर काबू न रख सके और बेकरार हो उठे। इमामबाड़ों व अजाखानों में अजादारों को जनाबे औन-मोहम्मद के ताबूत की जियारत भी करायी गयी। 
तहसीनगंज स्थित इमामबाड़ा मलका जहां में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मोहम्मद मियां आब्दी ने कहा कि मोहर्रम और कर्बला की याद दीने इस्लाम की ताजीम है। इमाम हुसैन अम्बिया के वारिस थे। आज हम इमाम हुसैन की याद मनाते हैं और आलमे इंसानियत को सख्त हालात में इमाम हुसैन ने हिदायत का काम कैसे अंजाम दिया अजादारी के जरिए बताते हैं। मौलाना ने कहा कि यह अजादारी हिदायत का जरिया है। चौक मंडी स्थित इमामबाड़ा गुफरानमआब में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने अहलेबैत का किरदार पेश किया। उन्होंने लश्करे हुसैनी को हुर के भूखे-प्यासे लश्कर को रोकने और इमाम हुसैन के लश्कर और जानवरों को पानी पिलाने का वाकिया पेश किया। उन्होंने कहा कि वहीं यजीदी लश्कर ने इमाम हुसैन और उनके साथियों को तीन दिन का भूखा-प्यासा शहीद किया। इमामबाड़ा आगा बाकर में हुई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मीसम जैदी ने कहा कि वारिसे कुरान से मोहब्बत के बिना कुरान पढऩे का कोई फायदा नहीं। अल्लाह ने अहलेबैत को कुरान का वारिस बनाया है। इसलिए अगर कुरान को समझना है तो अहलेबैत के जरिए समझें। मौलाना ने कहा कि कोई भी अमल अल्लाह, मोहम्मद और आले मोहम्मद की खुशनूदी के लिए करें, दूसरे को मुतमईन करने के लिए नहीं। नाजिम साहब के इमामबाड़े में आले मोहम्मद की पसंदीदा जाकिरी उनवान से हुई मर्सिए की मजलिस में मोहम्मद कामिल रिजवी ने मर्सिया पेश किया। 
मदरसा नाजमियां में जामिया नाजमियां के प्रिंसिपल मौलाना हमीदुल हसन ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि इस्लाम किसी मजहब का नहीं बल्कि जुल्म का मुखालिफ है। जहां जुल्म होगा, वहां नमाज-रोजा-हज-जकात की मुखालफत होगी। उन्होंने हजरत अली के फजाएल बयान करते हुए मैदाने कर्बला में हजरत औन-मोहम्मद की शहादत और लाशों को ख्यामे हुसैनी लाने का मंजर बयान किया तो अजादार बेकरार हो उठे। शिया कॉलेज में हुई मजलिस को मौलाना अब्बास नासिर सईद अबाकाती ने खिताब करते हुए कहा कि इस्लाम गदीर में मुकम्मल हुआ और कर्बला में महफूज। अगर इमाम हुसैन मैदाने कर्बला में अपनी और अपने साथियों की शहादत नहीं देते तो आज इस्लाम न होता। विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित अफजल महल में हुई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना अली नासिर सईद अबाकाती आगा रूही ने कहा कि दीने को समझाने वाले अली और दीन को बचाने वाले हुसैन हैं। रिसालत है मस्जिद और अज्रे रिसालत है अजादारी। हम जो रोते और गिरिया करते हैं यह निजात है। हजरतगंज स्थित इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना अकील अब्बास मारूफी ने कहा कि इस्लाम की बुनियादी तालीम यह है कि किसी के सामने हाथ न फैलाएं, लेकिन अगर जरूरत पेश आए तो फजीलतों और शराफतों के मालिक, दीनदार, खूबसूरत और दूसरों की मुश्किलें दूर करना अपनी जिम्मेदारी समझने वाले इंसान से अपनी जरूरत बयान करें। 
अकबरी गेट स्थित इमामबाड़ा जन्नतमआब में हुई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि अल्लाह के रसूल ने हिदायत के लिए कुरान और अहलेबैत को अल्लाह तक पहुंचने का जरिया बताया। हर इंसान को हर काम के लिए किसी न किसी चीज की जरूरत होती है, तो जब हर काम के लिए वसीले की जरूरत है तो अल्लाह तक बिना वसीले कैसे पहुंचा जा सकता है। रसूल ने कहा कि इन दोनों के साथ रहोगे तो कभी गुमराह नहीं होगे, यही तुम्हें अल्लाह तक ले जाने का जरिया हैं। इमामबाड़ा सैय्यद आगा में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना अख्तर अब्बास जॉन ने कहा कि इस्लाम संजीदा मजहब है, इसकी मिसाल हमें कर्बला में देखने को मिलती है। कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने इस्लाम को बचाने के लिए अपने घर और असहाब के साथ सबसे बड़ी कुर्बानी दी। आज दुनिया अपने-अपने तरीकों से इमाम हुसैन का गम मनाती है। इमामबाड़ा आगा बाकर में रात को हुई मजलिस को मौलाना हुसैन मुर्तजा कुमैल ने यादे इलाही की अहमियत उनवान से खिताब किया। इसके अलावा शहर के अन्य इमामबाड़ों, अजाखानों, रौजों व कर्बला में मजलिस-मातम का आयोजन कर अजादारों ने कर्बला के शहीदों का गम मनाया।