ज़ुल्म करने वाला मुसलमान नही हो सकता: एस एम मासूम

जौनपुर:ht मुहर्रम मे इमाम हुसैन का ग़म पैगम्बर ए इस्लाम हज़रत मुहम्मद ने नवासे और शियों के पहले इमाम तथा मुसलमानो के चौथे खलीफा हज़रत अली के बेटे इमाम हुसैन की शहादत को याद करके मनाई जाता है |लोग ग़म ऐ हुसैन का इज़हार करने के लिए काले लिबास पहनकर मजलिसों में शिरकत करते हैं। हमेशा की तरह इस साल भी मुहर्रम के महीने में नौहा ,मातम और हुसैन पे रोने वालों की सदाओं से पूरा शहर ग़मगीन हो गया।

इस्लामिक स्कॉलर एस एम् मासूम ने ज़ीशान हैदर के ऐतिहासिक इमामबाड़ा बड़े इमाम, गूलर घाट पे अशरा ए मजालिस की पांचवी मजलिस से ख़िताब करते हुए कहा कि इस्लाम में किसी पर ज़ुल्म करने वाला खुद को मुसलमान नहीं कहला सकता,

कर्बला में इमाम हुसैन और उनके परिवार पर ज़ुल्म करने वाले खुद को मुसलमान कहते थे लेकिन इमाम हुसैन ने कर्बला में शहादत दे के बता दिया की ज़ुल्म इस्लाम का हिस्सा नहीं।

इमाम हुसैन का किरदार यह था की जब मक्का से कूफ़े के सफर के वक़्त दुश्मन ने उन्हें घेरा तो उन्होंने देखा की दुश्मन के फौजी इतने प्यासे हैं की जंग करने की उनमे ताक़त नहीं हैं।

ऐसे में हुसैन चाहते तो हमला कर देते लेकिन कमज़ोर पे हमला करने की इजाज़त इस्लाम नहीं देता इसका नमूना हुसैन ने उस वक़्त पेश किया जब यज़ीदी फौजी प्यास के कारण मरने के करीब थे,

उस वक़्त हुसैन चाहते तो दुश्मन के फौजियों को पानी न पिलाते और हमला करके दुश्मन के सिपाहियों को खत्म कर सकते थे, जिससे हुसैन और उनके साथियों की जान बच सकती थी लेकिन हुसैन ने दुश्मन के फौजियों पर हमला नही किया बल्कि अपनी और अपने साथियों की जान के दुश्मन यज़ीदी सिपाहियों को पानी पिलाया और यहां तक की उनके प्यासे घोड़ों को भी पानी पिलाया।

लेकिन यही वो यज़ीदी फौज थी जिसको इमाम हुसैन ने उस वक़्त पानी पिलाया था जब प्यास के कारण वो मरने के क़रीब थे

उसी यज़ीदी फौज ने हुसैन को कर्बला में तीन दिन का प्यासा शहीद कर दिया यहां तक की इमाम हुसैन के ६ महीने के बच्चे अली असगर को भी पानी ना दिया और प्यासा तीर मार कर शहीद कर दिया,

हुसैन के छह महीने के बच्चे अली असगर की शहादत का ज़िक्र सुनकर अज़ादार ज़ार ओ कतार रोने लगे।

मजलिस के बाद बड़े इमाम के इमामबाड़े से ऐतिहासिक जुलुस ए अज़ादारी निकाला गया जिसमे अलम हज़रत अब्बास तुर्बत के साथ साथ अंजुमनें नौहा व मातम करती रही |