
लखनऊ ht अय्यामे अजा के चौथे दिन शनिवार को हुई मजलिसों में उलमा व जाकिरों ने इमाम हुसैन के बचपन के दोस्त हबीब इब्ने मजाहिर और जनाबे हुर की शहादत का जिक्र किया। सुबह से देर रात तक अजादारों ने एक मजलिस से दूसरी मजलिस में शिरकत की और इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों का गम मनाया। 

चौक मंडी स्थित इमामबाड़ा गुफरानमआब में सुबह हुई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने कहा कि रसूले खुदा दुनिया के लिए नेमत हैं। रसूल जब नरम जमीन पर चलते थे तो कदम के निशान नहीं बनते थे, लेकिन जब पथरीली जमीन पर चलते थे तो निशान बनते चले जाते थे। दुनिया यह मोजिजा देख रही थी। उनके जिस्म से ऐसी खुशबू निकलती थी, जो दुनिया में किसी ने नहीं सूंघी थी, वह जब किसी गली से गुजरते थे तो लोगों को अंदाजा हो जाता था कि रसूल इधर से गुजरे हैं। रसूल के चेहरे से ऐसा नूर निकलता था कि जो सुई सूरज की रोशनी में उम्मुल मोमिनीन नहीं ढूंढ पाती थीं वह रात को मिल जाती थी। मौलाना ने यजीदी लश्कर के पानी पर पाबंदी का जिक्र किया तो अजादार बेकरार हो उठे।

इमामबाड़ा आगा बाकर में हुई मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मीसम जैदी ने कहा कि कयामत के रोज तीन चीजें अल्लाह से शिकायत करेगी, एक वह मस्जिद जिसके करीब मोमिन रहते हों और मस्जिद वीरान रहे। दूसरे वह आलिम जिसके पास इल्म हासिल करने लोग न आएं और तीसरा कुरान जिसे लोग घर में रखे रहें, लेकिन तिलावत न करें। मौलाना ने कहा कि इसलिए अगर हम कुरान पढ़ नहीं सकते तो उसके अल्फाजों पर नजर जरूर कर सकते हैं, हालांकि पढऩे की कोई उम्र नहीं होती। हमारे लिए तिलावते कलामे पाक बहुत जरूरी है। उन्होंने मुसलमानों से अपने बच्चों को दुनियावी तालीम के साथ ही दीनी तालीम दिलाने की अपील की। 

मदरसा नाजमियां में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना हमीदुल हसन ने कहा कि जिक्रे कर्बला ज्यादा से ज्यादा दुनिया वालों तक जाए और जब उनके दिल में इस जिक्र से नरमी पैदा हो तो हक का समझना आसान हो जाएगा। मौलाना ने मैदाने कर्बला में इमाम हुसैन की चहीती बहन जनाबे जैनब के बेटों जनाबे औन-मोहम्मद की शहादत बयान की तो अजादार खुद पर काबू न रख सके। अकबरी गेट स्थित इमामबाड़ा जन्नतमआब में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि आज समझने की जरूरत है कि इमाम हुसैन को शक्तिशाली बादशाह के सामने आने की क्या जरूरत पड़ी। अगर इंसान यह बात समझ ले तो दुनिया में फैला जुल्म और बेचैनी खत्म हो जाए। उन्होंने कहा कि इमाम के सफर का मकसद हक को दुनिया के सामने लाना था। इमाम का कौल है कि इंसान जुल्म के खिलाफ जितनी देर से उठेगा, उतनी बड़ी कुर्बानी देना होगी। विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित अफजल महल में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना अली नासिर सईद अबाकाती आगा रूही ने कहा कि आज सारी दुनिया जुल्म को बुरा मान रही है, लेकिन कुछ लोग इसे इबादत समझ रहे हैं। लोग जुल्म के लिए मजहब की आड़ लेते हैं, जबकि जुल्म का किसी मजहब से ताल्लुक नहीं है। उन्होंने कहा कि मस्जिद और अन्य धार्मिक स्थलों में हर शख्स नहीं जा सकता, लेकिन फर्शे अजा वाहिद फर्श है
जहां किसी भी मजहब का इंसान हुसैन के नाम पर बराबर से बैठ सकता हो, बशर्ते वह जालिम न हो। उन्होंने कहा कि शैतान ने किसी मासूम का कत्ल नहीं किया, लेकिन पैगम्बर और अम्बिया के घरों तक बहकाने जरूर गया। वही शैतान कर्बला में क्यों किसी मां को नहीं बहका सका, जो अपने नन्हें-नन्हें बच्चों को इमाम हुसैन पर जान कुर्बान करने की तालीम दे रही थी। उन्होंने मुतवक्किल अब्बासी के दौर में कब्रे इमाम हुसैन की जियारत पर लगी सख्तियों का जिक्र करते हुए एक बूढ़ी मां का वाकिया पेश किया तो अजादार खुद पर काबू न रख सके और जारो-कतार रोने लगे। चौक मंडी स्थित इमामबाड़ा आगा बाकर में मौलाना हुसैन मुर्तजा कुमैल ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि मजलिसें हमें हयात बख्शती हैं। हमें निजात और रौशनी चाहिए तो हुसैन के पास आना होगा। अहलेबैत और इमाम हुसैन से मोहब्बत में उनका नहीं बल्कि हमारा फायदा है। उन्होंने कहा कि इस्लाम जिंदगी गुजारने का नाम है, दुनिया छोड़ देने का नहीं।
इसके अलावा इमामबाड़ा लाडो खानम नक्खास में मौलना सैयद मोहम्मद अब्बास जैदी, इमामबाड़ा उम्मुल बनीन मंसूर नगर में मौलाना रजा अब्बास, इमामबाड़ा मेंहदी हुसैन मंसूर नगर में मौलाना मोहम्मद अस्करी, इमामबाड़ा मिर्जा मेंहदी हसन (मिन्दू) काजमैन रोडे में मौलाना अबीदुल हसन, इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद हजरतगंज में मौलाना अकील अब्बास मारूफी, दरगाह हजरत अब्बास (अ.स.) में मौलाना अली अब्बास, इमामबाड़ा सरकारे हुसैन कश्मीरी मोहल्ला में मौलाना गुलशेर अली, रौजाए जैनबिया में मौलाना तकी रजा ने मजलिसों को खिताब करते हुए कर्बला के शहीदों का जिक्र किया।
शिया हुसैनी फंड ने बांटा राशन
लखनऊ।
आल इंडिया शिया हुसैनी फंड की ओर से माहे मोहर्रम में 110 जरूरतमंद परिवारों को राशन वितरित किया गया। संस्था के विक्टोरिया स्ट्रीट स्थित कार्यालय से फंड के चेयरमैन मोहम्मद जकी, महासचिव हसन मेहदी झब्बू, इसारुल हसन और हुसैन जामिन नकवी ने जरूरतमंद परिवारों को मोहर्रम में नज्र-नियाज और घर की जरूरतों के लिए राशन वितरित किया। संस्था के महासचिव हसन मेहदी झब्बू ने बताया कि शिया कॉलेज के पास लगी फंड की सबील से चाय, कॉफी, पानी और तबर्रुक भी वितरित किया जा रहा है।
सात को रखा जाएगा किशनू खलीफा का ताजिया
लखनऊ।
हिंदू-मुस्लिम आस्था और गंगा-जमुनी तहजीब के परिचायक किशनू खलीफा के बशीरतगंज स्थित इमामबाड़े में सात मोहर्रम को मन्नती ताजिया रखा जाएगा। ताजियेदार सेवक संघ के अध्यक्ष हरीशचंद्र धानुक ने बताया कि 18 सितम्बर मंगलवार को शाम 7:30 बजे इमामबाड़े में मन्नती ताजिया अकीदत के साथ रखा जाएगा। इसी के साथ अलम, मेहदी आदि तबर्रूकात की जियारत कराई जाएगी। सात मोहर्रम से इमामबाड़े में तीन दिन राजधानी की विभिन्न मातमी अंजुमनें नौहाख्वानी व सीनाजरी करेगी और जाकिर मजलिसों को खिताब करेंगे।
औनो-मोहम्मद के ताबूत आज
लखनऊ।
इमाम हुसैन की चहीती बहन जनाबे जैनब के बेटों जनाबे औन-मोहम्मद की याद में रविवार को शहर के विभिन्न इमामबाड़ों व अजाखानों में औन-मोहम्मद के ताबूत की जियारत कराई जाएगी। हैदरगंज स्थित कर्बला मुंशी फजले हुसैन में अंजुमन एैनुल अजा की ओर से मजलिस का आयोजन किया जाएगा। शाम 4 बजे तिलावते कलामे पाक से शुरू होने वाली मजलिस को मौलाना तकी रजा खिताब करेंगे, जिसके बाद कर्बला परिसर में ताबूत, अलम और जुलजनाह का जुलूस निकलेगा जो गश्त कर समाप्त होगा। वहीं दौलतगंज स्थित हसन कॉलोनी में अंजुमन हुसैनी की ओर से शनिवार को ताबूत व जुलजनाह की जियारत कराई गयी। इस मौके पर मातमी अंजुमनें नौहाख्वानी व सीनाजनी की और अजादारों ने कमा व जंजीरों का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया।
आग पर मातम आज
हजरतगंज स्थित इमामबाड़ा शाहनजफ में रविवार को अकीदतमंद दहकते हुए अंगारों पर नंगे पांव या हुसैन की सदा बुलंद करते हुए मातम करेंगे। अंजुमन मासूमिया असगरिया की ओर से होने वाले कार्यक्रम के तहत रात 8 बजे मजलिस होगी, जिसे जामिया नाजमियां के प्राचार्य मौलाना फरीदुल हसन खिताब करेंगे। मजलिस के बाद अकीदतमंद दहकते हुए अंगारों पर मातम करेंगे। वहीं शाहनजफ स्थित अजाखाना जन्नन में शाम 5 बजे महिलाओं की मजलिस होगी, जिसे जाकिरा जर्रीन फातिमा खिताब करेगी। इसी क्रम में कश्मीरी मोहल्ला स्थित मस्जिद आमली परिसर में भी रविवार रात 9 बजे आग पर मातम किया जाएगा। यहां होने वाली मजलिस को मौलाना अख्तर हुसैन नकवी खिताब करेंगे, जिसके बाद अकीदतमंद दहकते हुए अंगारों पर या हुसैन-या अब्बास की सदा बुलंद करते हुए मातम करेंगे।