स्मार्ट सिटी में जीरो इन्वेस्टमेंट पर लगेंगे 100 एयर पॉल्यूशन कंट्रोलर

भले ही रायपुर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की विश्व के 15 प्रदूषित शहरों की सूची से बाहर हो गया हो लेकिन प्रदूषण अभी भी काफी है। कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां प्रदूषण का स्तर सर्वाधिक है। ये हैं-फाफाडीह चौक, रेलवे स्टेशन चौक, बस स्टैंड, शास्त्री चौक, जयस्तंभ चौक, पचपेड़ी नाका चौक।भले ही रायपुर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की विश्व के 15 प्रदूषित शहरों की सूची से बाहर हो गया हो लेकिन प्रदूषण अभी भी काफी है। कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां प्रदूषण का स्तर सर्वाधिक है। ये हैं-फाफाडीह चौक, रेलवे स्टेशन चौक, बस स्टैंड, शास्त्री चौक, जयस्तंभ चौक, पचपेड़ी नाका चौक।  ADVERTISING  inRead invented by Teads ऐसे ही करीब 30 से अधिक पब्लिक बेनीफिट लोकेशन, जहां एक समय पर बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा होता है, वहां पॉल्यूशन कंट्रोलर लगेंगे। पुणे की कंपनी के साथ रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड (आरएससीएल) ने एमओयू किया है।   ये देश का पहला ऐसा हाईकोर्ट, जहां PIL की फीस है 5000 रुपए यह भी पढ़ें  यह जीरो इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट है, जिसमें आरएससीएल का एक रुपये भी खर्च नहीं होगा। पहली मशीन आरएससीएल के कार्यालय के सामने 28 दिन पहले लगाई गई, जिसकी रिपोर्ट आ चुकी है। रिपोर्ट में 40 फीसद पॉल्यूशन कम पाया गया है।  मशीन में ऐसे उपकरण लगे हुए हैं जो 60 फीट सराउंडिंग में पीएम 2.5, पीएम 10 के कणों को खींचती है। ये कण काफी घातक हैं, जो सीधे हमारे फेफड़ों में पहुंचते हैं और धीरे-घीरे नुकसान पहुंचाते हैं।   स्वच्छता मिशन VIDEO : दंतेवाड़ा की जाग्रति से PM मोदी ने की बात यह भी पढ़ें  'नईदुनिया' के पास आरएससीएल कार्यालय के बाहर लगी एयर पॉल्यूशन कंट्रोलर मशीन की वह तस्वीर है जिसमें बड़ी मात्रा में प्रदूषण कण जमा हुए हैं। रायपुरवासियों के लिए अच्छी खबर यह है कि भीड़-भाड़ वाले चौक पर प्रदूषण से कुछ हद तक मुक्ति जरूर मिलेगी।  मई में जारी डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक-   कासाराम IED ब्लास्ट केस में विस्फोटक सप्लायर गिरफ्तार यह भी पढ़ें  शहर की वायु गुणवत्ता में 2.5 पीएम (फाइन पर्टिकुलेट मैटर) का वार्षिक औसत वर्ष 2016 में 37.13 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जो वर्ष 2017 में 33.55 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर, वर्ष 2018 में माह अप्रैल तक का औसत 34.65 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा।  गौरतलब है कि पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार के लिये उच्च टेक्नोलाजी और बेहतर मैनेजमेंट से रायपुर में पर्यावरण प्रदूषण का स्तर प्रदूषित शहरों की तुलना में कम रहा। विश्व से टॉप 15 प्रदूषित शहरों की सूची से रायपुर बाहर निकल गया।   'कुमकी' हाथी खेल रहे फुटबाल, जंगली हाथी रौंद रहे फसल यह भी पढ़ें  ये हैं प्रदूषण कम होने के आंकड़े-  शुरुआत में- बेस रीडिंग (इतना प्रदूषण है) 100 ग्राम, 28 दिन बाद- 115 ग्राम (नोट- रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड कार्यालय के बाहर लगी है मशीन के आंकड़े)   जहां भी जाओ, छप्पर फाड़ के समर्थन देता रहा है महासमुंद यह भी पढ़ें  मशीनों की कीमत 90 हजार तक- कंपनी ने तीन अलग-अलग मशीनें बनाई हैं, जिनमें ज्यादा फर्क नहीं है। इनकी कीमत 75 हजार से 90 हजार रुपये तक है। जानकारी के मुताबिक पुणे, दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में ये उपकरण लगे हुए हैं।  'नईदुनिया' के सवाल पर कंपनी के राज्य प्रभारी सौरभ शर्मा ने कहा- हम 100 उपकरण मुफ्त लगाएंगे, अगर कोई कंपनी सीएसआर एक्टीविटी के बतौर खरीदना चाहती है तो उन्हें हम बेचेंगे, यही हमारा प्रॉफिट होगा।  लैबोरेटरी टेस्ट रिपोर्ट आ चुकी है  कंपनी ने कांटेक्ट किया, उन्होंने अपने प्रोजेक्ट का प्रजेंटेशन दिया। यह जीरो इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट था और शहर की जनता के लिए फायदमेंद, इसलिए अनुबंध किया है। हमने उपकरण लगने के बाद लैबोरेटरी टेस्ट भी करवाया, जिसके नतीजे बेहतर हैं।

ऐसे ही करीब 30 से अधिक पब्लिक बेनीफिट लोकेशन, जहां एक समय पर बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा होता है, वहां पॉल्यूशन कंट्रोलर लगेंगे। पुणे की कंपनी के साथ रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड (आरएससीएल) ने एमओयू किया है।

यह जीरो इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट है, जिसमें आरएससीएल का एक रुपये भी खर्च नहीं होगा। पहली मशीन आरएससीएल के कार्यालय के सामने 28 दिन पहले लगाई गई, जिसकी रिपोर्ट आ चुकी है। रिपोर्ट में 40 फीसद पॉल्यूशन कम पाया गया है।

मशीन में ऐसे उपकरण लगे हुए हैं जो 60 फीट सराउंडिंग में पीएम 2.5, पीएम 10 के कणों को खींचती है। ये कण काफी घातक हैं, जो सीधे हमारे फेफड़ों में पहुंचते हैं और धीरे-घीरे नुकसान पहुंचाते हैं।

‘नईदुनिया’ के पास आरएससीएल कार्यालय के बाहर लगी एयर पॉल्यूशन कंट्रोलर मशीन की वह तस्वीर है जिसमें बड़ी मात्रा में प्रदूषण कण जमा हुए हैं। रायपुरवासियों के लिए अच्छी खबर यह है कि भीड़-भाड़ वाले चौक पर प्रदूषण से कुछ हद तक मुक्ति जरूर मिलेगी।

मई में जारी डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक-

शहर की वायु गुणवत्ता में 2.5 पीएम (फाइन पर्टिकुलेट मैटर) का वार्षिक औसत वर्ष 2016 में 37.13 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था, जो वर्ष 2017 में 33.55 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर, वर्ष 2018 में माह अप्रैल तक का औसत 34.65 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा।

गौरतलब है कि पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार के लिये उच्च टेक्नोलाजी और बेहतर मैनेजमेंट से रायपुर में पर्यावरण प्रदूषण का स्तर प्रदूषित शहरों की तुलना में कम रहा। विश्व से टॉप 15 प्रदूषित शहरों की सूची से रायपुर बाहर निकल गया।

ये हैं प्रदूषण कम होने के आंकड़े-

शुरुआत में- बेस रीडिंग (इतना प्रदूषण है) 100 ग्राम, 28 दिन बाद- 115 ग्राम (नोट- रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड कार्यालय के बाहर लगी है मशीन के आंकड़े)

मशीनों की कीमत 90 हजार तक- कंपनी ने तीन अलग-अलग मशीनें बनाई हैं, जिनमें ज्यादा फर्क नहीं है। इनकी कीमत 75 हजार से 90 हजार रुपये तक है। जानकारी के मुताबिक पुणे, दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में ये उपकरण लगे हुए हैं।

‘नईदुनिया’ के सवाल पर कंपनी के राज्य प्रभारी सौरभ शर्मा ने कहा- हम 100 उपकरण मुफ्त लगाएंगे, अगर कोई कंपनी सीएसआर एक्टीविटी के बतौर खरीदना चाहती है तो उन्हें हम बेचेंगे, यही हमारा प्रॉफिट होगा।

लैबोरेटरी टेस्ट रिपोर्ट आ चुकी है

कंपनी ने कांटेक्ट किया, उन्होंने अपने प्रोजेक्ट का प्रजेंटेशन दिया। यह जीरो इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट था और शहर की जनता के लिए फायदमेंद, इसलिए अनुबंध किया है। हमने उपकरण लगने के बाद लैबोरेटरी टेस्ट भी करवाया, जिसके नतीजे बेहतर हैं।