हाथी खेल रहे फुटबाल, जंगली हाथी रौंद रहे फसल

सिरपुर क्षेत्र के पासिद कैंप में कर्नाटक के मैसूर से लाए गए पांच कुमकी हाथी फुटबाल खेल रहे हैं। दूसरी ओर जंगली हाथी खेतों में लगी फसलों को रौंद रहे हैं। हाथियों की हिंसा से क्षेत्र में अब तक नौ लोगों की जान जा चुकी है, दो लोग घायल हो चुके हैें। हिंसक घटनाओं और फसल की बर्बादी से किसान हलाकान हैं।सिरपुर क्षेत्र के पासिद कैंप में कर्नाटक के मैसूर से लाए गए पांच कुमकी हाथी फुटबाल खेल रहे हैं। दूसरी ओर जंगली हाथी खेतों में लगी फसलों को रौंद रहे हैं। हाथियों की हिंसा से क्षेत्र में अब तक नौ लोगों की जान जा चुकी है, दो लोग घायल हो चुके हैें। हिंसक घटनाओं और फसल की बर्बादी से किसान हलाकान हैं।  दूसरी ओर वन अमला अब तक कुमकी हाथियों से जंगली हाथियों को खदेड़ने का काम नहीं ले पाया है। बारिश से पूर्व हिंसक हाथियों को ट्रेंक्योलाइज कर रेडियो कॉलर बांधने का अभियान छेड़ा गया था, इसमें भी अमले को सफलता नहीं मिली। बारिश में वन क्षेत्र सघन होने से इस कार्य में बाधा आई और आपरेशन गजराज का काम रोका गया।   ये देश का पहला ऐसा हाईकोर्ट, जहां PIL की फीस है 5000 रुपए यह भी पढ़ें  आठ महीने पहले लाए गए पांच कुमकी हाथी  25 जनवरी को कर्नाटक के मैसूर से तीन नर और दो मादा कुमकी हाथी लाए गए। इन्हें पासिद के पास कैंप बनाकर रखा गया है। यहां इन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के तहत फुटबाल आदि खेल सिखाया जा रहा हैं। जनवरी से लेकर अब तक कुमकी हाथियों से जंगली हाथियों को खदेड़ने का काम नहीं लिया जा सका है।   स्वच्छता मिशन VIDEO : दंतेवाड़ा की जाग्रति से PM मोदी ने की बात यह भी पढ़ें  यहां तक कि रेडियो कॉलर पहनाने का काम भी नहीं लिया गया है। हाथियों को कर्नाटक से लाने, इनके रखरखाव, भोजन और प्रशिक्षण पर अब तक 80 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं । कर्नाटक से पांच हाथियों को लाने में 24 लाख 19 हजार 472 रुपये खर्च हुए थे।  विधायक के आंदोलन पर मिला केवल आश्वासन   कासाराम IED ब्लास्ट केस में विस्फोटक सप्लायर गिरफ्तार यह भी पढ़ें  कुमकी हाथियों को विधायक ने सफेद हाथी कहा था। जंगली हाथियों को खदेड़ने के लिए लाए गए इन हाथियों से काम नहीं लेने पर 22 मई को विधायक डॉ विमल चोपड़ा ने समर्थकों के साथ पासिद कैंप का घेराव किया था।  बाद उप वनमंडलाधिकारी अरविंद पीएम ने काम लेने का आश्वासन दिया था। आश्वासन के बाद कुमकी हाथियों को जंगल के भीतर ले जाया गया, जंगली हाथियों को ट्रेंक्योलाइज करने अमले को लगाया गया। बावजूद सफलता नहीं मिली। एक भी जंगली हाथी को रेडियोकॉलर नहीं पहनाया जा सका।   'कुमकी' हाथी खेल रहे फुटबाल, जंगली हाथी रौंद रहे फसल यह भी पढ़ें  - ट्रेनिंग महावतों को दी जा रही है। यह ट्रेनिंग कुमकी हाथियों के साथ ही दी जाती है। मई महीने के अंत में कुमकी हाथियों को जंगल के भीतर ले जाया गया था, ट्रैंक्योलाइज करने अमले भी लगाए गए थे, लेकिन सफलता नहीं मिली। हम वर्षा ऋ तु के समापन का इंतजार कर रहे हैें, जंगल के भीतर कीचड़ है, जिससे गतिविधियां शुरू करने में दिक्कत है। वर्षाकाल समापन के बाद जंगली हाथियों को खदेड़ने, रेडियो कॉलर लगाने का कार्य तेज होगा। - अरविंद पी एम, उपवनमंडलाधिकारी महासमुंद  एक माह बाद सिरपुर क्षेत्र के गांवों में फिर आ धमका हाथी   रिश्वतखोर प्रशिक्षु सब इंस्पेक्टर को चार साल की कैद यह भी पढ़ें  सिरपुर क्षेत्र के ग्राम अचानकपुर, बंदोरा, छपोराडीह, लहंगर, गुड़रुडीह, पिरदा में हाथियों ने 12-13 सितंबर को जमकर उत्पात मचाया। करीब एक महीने तक शांत रहने के बाद हाथियों के पुनः धमकने की खबर के बाद ग्रामीण भयभीत और चिंतित हो उठे हैं। फसल को हाथियों से बचाने पूजा-अर्चना करने के साथ ही मशाल लेकर खेतों में बारी-बारी से जगवारी कर रहे हैं।  हाथियों ने खेतों में लगी धान फसल को रौंद-खाकर नष्ट करने के साथ ही बंदोरा में मीडिल स्कूल के अहाता को क्षतिग्रस्त कर दिया। वहीं अचानकपुर में देवप्रसाद साहू के खेत में ट्यूबवेल के माध्यम से सिंचाई के लिए रखे डिलीवरी पाइप को रौंद दिया। जिससे देवप्रसाद साहू को नुकसान पहुंचा है। हाथी भगाओ फसल बचाओ समिति के संयोजक राधेलाल सिन्हा ने 14 सितंबर की शाम 7 बजे दो हाथियों के ग्राम पिरदा के जंगल में होने की सूचना दी है।  विगत तीन दिनों से दो दल में हाथी विचरण कर रहे हैं। धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी अनजान बने बैठे हैं। एक माह बाद पुनः हाथी सिरपुर क्षेत्र में धमक गए हैं। ग्राम बंदोरा में संजय धु्रव, दयाराम पटेल के खेत में नुकसान पहुंचाने के बाद हाथियों ने मिडिल स्कूल के अहाता को तोड़कर नुकसान पहुंचाया। उपरांत अचानकपुर पहुंचकर बुधराम कमार के घर को तोड़ दिया। देवप्रसाद साहू के मोटर पम्प के डिलीवरी पाइप को रौंदकर नष्ट कर दिया। ग्राम छपोराडीह में गणेश पटेल, बेदराम साहू के खेतों में लगी धान फसल को नुकसान पहुंचाया। पिरदा के दीपक साहू, प्रेमलाल, दिलीप, माखन, काशीराम के खेत में उत्पात मचाया है।  युवक ने भागकर बचाई हाथियों से जान  राधेलाल सिन्हा ने बताया कि 14 सितंबर की शाम करीब 4 बजे ग्राम कांपा निवासी मूलचंद यादव अपनी पत्नी को तीजा के बाद लाने के लिए पिरदा होकर ग्राम बिरबिरा जा रहा था। इस बीच हाथियों ने पिरदा के डिहीखार (लाइन खार) के पास रास्ता रोक लिया। अचानक हाथियों को सामने देख मूलचंद ने मोटर साइकिल से नियंत्रण खो दिया, गिर गया और मोटर साइकिल को छोड़कर बचाओ-बचाओ चिल्लाते हुए लाइन खार की ओर भागने लगा। लाइन खार में खेतों की रखवाली कर रहे किसानों ने मूलचंद को पिरदा पहुंचाया।  भय के कारण मूलचंद का बीपी बढ़ गया है। गांव के एक चिकित्सक ने दवाई देकर आराम करने की सलाह दी है। शाम सात बजे तक मोटर साइकिल के डिहीखार के पास ही पड़े होने की जानकारी मिली है। बहरहाल, शाम होने और हाथियों के भय से उक्त स्थल पर किसी भी ग्रामीण ने जाने का हिम्मत नहीं दिखाया है।

दूसरी ओर वन अमला अब तक कुमकी हाथियों से जंगली हाथियों को खदेड़ने का काम नहीं ले पाया है। बारिश से पूर्व हिंसक हाथियों को ट्रेंक्योलाइज कर रेडियो कॉलर बांधने का अभियान छेड़ा गया था, इसमें भी अमले को सफलता नहीं मिली। बारिश में वन क्षेत्र सघन होने से इस कार्य में बाधा आई और आपरेशन गजराज का काम रोका गया।

आठ महीने पहले लाए गए पांच कुमकी हाथी

25 जनवरी को कर्नाटक के मैसूर से तीन नर और दो मादा कुमकी हाथी लाए गए। इन्हें पासिद के पास कैंप बनाकर रखा गया है। यहां इन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के तहत फुटबाल आदि खेल सिखाया जा रहा हैं। जनवरी से लेकर अब तक कुमकी हाथियों से जंगली हाथियों को खदेड़ने का काम नहीं लिया जा सका है।

यहां तक कि रेडियो कॉलर पहनाने का काम भी नहीं लिया गया है। हाथियों को कर्नाटक से लाने, इनके रखरखाव, भोजन और प्रशिक्षण पर अब तक 80 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं । कर्नाटक से पांच हाथियों को लाने में 24 लाख 19 हजार 472 रुपये खर्च हुए थे।

विधायक के आंदोलन पर मिला केवल आश्वासन

कुमकी हाथियों को विधायक ने सफेद हाथी कहा था। जंगली हाथियों को खदेड़ने के लिए लाए गए इन हाथियों से काम नहीं लेने पर 22 मई को विधायक डॉ विमल चोपड़ा ने समर्थकों के साथ पासिद कैंप का घेराव किया था।

बाद उप वनमंडलाधिकारी अरविंद पीएम ने काम लेने का आश्वासन दिया था। आश्वासन के बाद कुमकी हाथियों को जंगल के भीतर ले जाया गया, जंगली हाथियों को ट्रेंक्योलाइज करने अमले को लगाया गया। बावजूद सफलता नहीं मिली। एक भी जंगली हाथी को रेडियोकॉलर नहीं पहनाया जा सका।

– ट्रेनिंग महावतों को दी जा रही है। यह ट्रेनिंग कुमकी हाथियों के साथ ही दी जाती है। मई महीने के अंत में कुमकी हाथियों को जंगल के भीतर ले जाया गया था, ट्रैंक्योलाइज करने अमले भी लगाए गए थे, लेकिन सफलता नहीं मिली। हम वर्षा ऋ तु के समापन का इंतजार कर रहे हैें, जंगल के भीतर कीचड़ है, जिससे गतिविधियां शुरू करने में दिक्कत है। वर्षाकाल समापन के बाद जंगली हाथियों को खदेड़ने, रेडियो कॉलर लगाने का कार्य तेज होगा। – अरविंद पी एम, उपवनमंडलाधिकारी महासमुंद

सिरपुर क्षेत्र के ग्राम अचानकपुर, बंदोरा, छपोराडीह, लहंगर, गुड़रुडीह, पिरदा में हाथियों ने 12-13 सितंबर को जमकर उत्पात मचाया। करीब एक महीने तक शांत रहने के बाद हाथियों के पुनः धमकने की खबर के बाद ग्रामीण भयभीत और चिंतित हो उठे हैं। फसल को हाथियों से बचाने पूजा-अर्चना करने के साथ ही मशाल लेकर खेतों में बारी-बारी से जगवारी कर रहे हैं।

हाथियों ने खेतों में लगी धान फसल को रौंद-खाकर नष्ट करने के साथ ही बंदोरा में मीडिल स्कूल के अहाता को क्षतिग्रस्त कर दिया। वहीं अचानकपुर में देवप्रसाद साहू के खेत में ट्यूबवेल के माध्यम से सिंचाई के लिए रखे डिलीवरी पाइप को रौंद दिया। जिससे देवप्रसाद साहू को नुकसान पहुंचा है। हाथी भगाओ फसल बचाओ समिति के संयोजक राधेलाल सिन्हा ने 14 सितंबर की शाम 7 बजे दो हाथियों के ग्राम पिरदा के जंगल में होने की सूचना दी है।

विगत तीन दिनों से दो दल में हाथी विचरण कर रहे हैं। धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी अनजान बने बैठे हैं। एक माह बाद पुनः हाथी सिरपुर क्षेत्र में धमक गए हैं। ग्राम बंदोरा में संजय धु्रव, दयाराम पटेल के खेत में नुकसान पहुंचाने के बाद हाथियों ने मिडिल स्कूल के अहाता को तोड़कर नुकसान पहुंचाया। उपरांत अचानकपुर पहुंचकर बुधराम कमार के घर को तोड़ दिया। देवप्रसाद साहू के मोटर पम्प के डिलीवरी पाइप को रौंदकर नष्ट कर दिया। ग्राम छपोराडीह में गणेश पटेल, बेदराम साहू के खेतों में लगी धान फसल को नुकसान पहुंचाया। पिरदा के दीपक साहू, प्रेमलाल, दिलीप, माखन, काशीराम के खेत में उत्पात मचाया है।

युवक ने भागकर बचाई हाथियों से जान

राधेलाल सिन्हा ने बताया कि 14 सितंबर की शाम करीब 4 बजे ग्राम कांपा निवासी मूलचंद यादव अपनी पत्नी को तीजा के बाद लाने के लिए पिरदा होकर ग्राम बिरबिरा जा रहा था। इस बीच हाथियों ने पिरदा के डिहीखार (लाइन खार) के पास रास्ता रोक लिया। अचानक हाथियों को सामने देख मूलचंद ने मोटर साइकिल से नियंत्रण खो दिया, गिर गया और मोटर साइकिल को छोड़कर बचाओ-बचाओ चिल्लाते हुए लाइन खार की ओर भागने लगा। लाइन खार में खेतों की रखवाली कर रहे किसानों ने मूलचंद को पिरदा पहुंचाया।

भय के कारण मूलचंद का बीपी बढ़ गया है। गांव के एक चिकित्सक ने दवाई देकर आराम करने की सलाह दी है। शाम सात बजे तक मोटर साइकिल के डिहीखार के पास ही पड़े होने की जानकारी मिली है। बहरहाल, शाम होने और हाथियों के भय से उक्त स्थल पर किसी भी ग्रामीण ने जाने का हिम्मत नहीं दिखाया है।