चुनाव कोई भी हो चलता है वंशवाद ही, यहां तक फैली इसकी बेल

जिला परिषद के चुनाव में वंशवाद की बेल खूब फलफूल रही है। चुनाव में ग्रामीण विकास मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा के बेटे समेत छह से ज्यादा विधायकों के बेटे अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, कुछ सीटों पर पारिवारिक राजनीतिक धरोहर को नई पीढ़ी के हाथों में सौंपी जा रही है। चुनाव कोई भी हो चलता है वंशवाद ही, यहां तक फैली इसकी बेल

दर्जन से ज्यादा विधायकों के बेटे आजमा रहे हैं किस्मत, एक परिवार एक टिकट की नीति से भटकी कांग्रेस

अहम पहलू यह है कि विधान सभा चुनाव में एक परिवार एक टिकट की नीति पर चलने वाली कांग्रेस ने करीब पांच विधायकों के बेटों को टिकट दिया गया है। इसमें कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, कादियां के विधायक फतेहजंग बाजवा, श्री हरगोबिंदपुर के बलविंदर सिंह लाडी, खडूर साहिब के रमनजीत सिंह सिक्की शामिल है। फिरोजपुर देहाती की विधायक सत्कार कौर के पति बलविंदर सिंह भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

राजीतिक विरासत को अगली पीढ़ी को सौंपने की तैयारी

कांग्रेस के वरिष्ठ मंत्री 74 वर्षीय तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा जहां अपने बेटे को जिला परिषद के जरिये अपनी राजनीतिक विरासत को अगली पीढ़ी के हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। वही, कोर्ट से पूर्व कैबिनेट मंत्री व एसजीपीसी की पूर्व प्रधान बीबी जगीर कौर भी अपनी बेटी को राजनीतिक रूप से मजबूत कर रही हैं।

सजायाफ्ता होने के कारण जगीर कौर चुनाव मैदान में नहीं आ सकतीं, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी राजनीत कौर को जिला परिषद के चुनाव मैदान में उतारा है। पूर्व मंत्री कंवलजीत सिंह लाली ने भी इसी के तहत मेहताब सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है।

इन नेताओं के परिवार के लोग लड़ रहे हैं चुनाव

1. रविनंदन सिंह पुत्र मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा।

2. अजरुन प्रताप सिंह पुत्र फतेहजंग बाजवा।

3. सरबजीत कौर पत्नी बलविंदर सिंह लाडी।

4. बलविंदर सिंह पति सत्कार कौर।

5. राजनीत कौर पुत्री बीबी जगीर कौर।

6. मनिंदरजीत सिंह मनी पुत्र विधायक रमनजीत सिंह सिक्की।