मानसून वक्त से पहले लौटने का अनुमान, किसान और सरकार चिंतित

प्रदेश में मानसून के पहुंचने की तारीख 15 जून है, लेकिन इस बार 9 जून को ही दस्तक दे दी थी। शुरुआत में मानसून लड़खड़ाया, लेकिन जुलाई में रफ्तार पकड़ी और अगस्त में तो 50 फीसद से अधिक बारिश हो गई। उम्मीद सितंबर से भी थी, लेकिन बरसात कम हुई। यही वजह है कि प्रदेश मानसूनी सीजन के चार महीनों में औसत बारिश अभी भी 165 मिमी पीछे है। इसके चलते सरकार, किसान से लेकर मौसम वैज्ञानियों की चिंता बढ़ गई है। अगर यही स्थिति रही तो किसान मुश्किल में पड़ सकते हैं।प्रदेश में मानसून के पहुंचने की तारीख 15 जून है, लेकिन इस बार 9 जून को ही दस्तक दे दी थी। शुरुआत में मानसून लड़खड़ाया, लेकिन जुलाई में रफ्तार पकड़ी और अगस्त में तो 50 फीसद से अधिक बारिश हो गई। उम्मीद सितंबर से भी थी, लेकिन बरसात कम हुई। यही वजह है कि प्रदेश मानसूनी सीजन के चार महीनों में औसत बारिश अभी भी 165 मिमी पीछे है। इसके चलते सरकार, किसान से लेकर मौसम वैज्ञानियों की चिंता बढ़ गई है। अगर यही स्थिति रही तो किसान मुश्किल में पड़ सकते हैं।  आखिर यह स्थिति बनी क्यों? मौसम वैज्ञानियों का जवाब है 'मानसून ब्रेक"। अब एक आशंका यह भी बनी हुई है कि   बिलासपुर : युवती ने नदी में कूदकर की आत्महत्या, गाड़ी पुल पर खड़ी कर लगा दी छलांग यह भी पढ़ें  कहीं मानसून समय के पहले विदाई न ले ले। बीते तीन-चार दिनों से प्रदेश में मध्यम बारिश तक रिकॉर्ड नहीं की गई है। जबकि बस्तर, सरगुजा संभाग में लगातार बादल डेरा डाले हुए हैं। बुधवार को राजधानी रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव में अच्छी खासी धूप खिली हुई थी। रायपुर का अधिकतम तापमान 33 डिग्री जा पहुंचा, जबकि रात का 28 डिग्री। मौसम विभाग के मुताबिक 17-18 सितंबर को एक सिस्टम बनता दिखाई दे रहा है। यह कितना सक्रिय होगा, इसके बारे में कोई जवाब नहीं है।  अभी कहां हो रही है बारिश   भिलाई : हर मंगलवार मुफ्त में काटेंगे स्कूली बच्चों के बाल यह भी पढ़ें  अभी द्रोणिका हिमालय की तराई में है, जो यहां से गुजर रही है। इसके चलते असम, उत्तर-प्रदेश, बिहार में बारिश हो रही है।  घटता जा रहा है औसत बारिश का अंतर   समर्पण का यह भी हाल, कभी देते थे मौत, आज जिंदगी के लिए मांग रहे सुरक्षा यह भी पढ़ें  प्रदेश की कुल औसत बारिश के मुकाबले सामान्य बारिश तीन फीसद अधिक हो चुकी थी। लेकिन यह अंतर बीते 10 दिन में घटकर शून्य हो गया। रायपुर समेत कई जिलों में औसत बारिश का अंतर तेजी से घट रहा है। खारुन नदी जो उफान पर थी, आज उसका जल स्तर नीचे आ गया है। बांधों के कपाट अब नहीं खोले जा रहे हैं, क्योंकि बाकी आठ माह के लिए पानी बचाकर रखना है।  यह है मानसून वापसी घोषित करने की पद्धति   Ganesh Utsav 2018: जाने कौनसे गणपति की स्थापना से मिलता है कैसा वरदान यह भी पढ़ें  केंद्रीय मौसम विज्ञान विभाग की गाइड-लाइन के मुताबिक किसी एक सब डिवीजन में अगर लगातार पांच दिनों तक बारिश नहीं होती है तो उसे मानसून वापसी का समय माना जाता है। राजस्थान में 30 अगस्त को मानसून  वापसी की तारीख है, लेकिन अभी तक घोषणा नहीं की गई है। संभव है दो-तीन दिनों में राजस्थान मौसम विज्ञान   छग : 8 लाख के इनामी नक्सली ने की सरेंडर की घोषणा, 23 साल से जुड़ा था संगठन से यह भी पढ़ें  विभाग सूचना जारी करे। छत्तीसगढ़ में मानसून वापसी की तय तारीख 12 अक्टबूर मानकर चलते हैं।  प्रदेश की वर्तमान स्थिति  छत्तीसगढ़ में मानसून सीजन में 1200 मिमी बारिश औसत मानी जाती है। फिलहाल 1035 मिमी ही बारिश हुई है, जो अभी भी सामान्य से 165 मिमी कम है। जब तक लगातार बारिश नहीं होगी इस आंकड़े तक पहुंचने की संभावना कम है। बीते तीन दिनों से प्रदेश में कहीं-कहीं ही हल्की बूंदाबांदी हुई, तेज बारिश नहीं।  कुछ कहना जल्दबाजी  अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। आज-कल में कोई सिस्टम बनता दिखाई नहीं दे रहा है। मानसून जब लौटता है तब एकाध बार अच्छी बरसात होती है। 17-18 सितंबर को एक सिस्टम बन रहा है। अगर बरसात नहीं होती है तो चिंता जाहिर है

आखिर यह स्थिति बनी क्यों? मौसम वैज्ञानियों का जवाब है ‘मानसून ब्रेक”। अब एक आशंका यह भी बनी हुई है कि

कहीं मानसून समय के पहले विदाई न ले ले। बीते तीन-चार दिनों से प्रदेश में मध्यम बारिश तक रिकॉर्ड नहीं की गई है। जबकि बस्तर, सरगुजा संभाग में लगातार बादल डेरा डाले हुए हैं। बुधवार को राजधानी रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव में अच्छी खासी धूप खिली हुई थी। रायपुर का अधिकतम तापमान 33 डिग्री जा पहुंचा, जबकि रात का 28 डिग्री। मौसम विभाग के मुताबिक 17-18 सितंबर को एक सिस्टम बनता दिखाई दे रहा है। यह कितना सक्रिय होगा, इसके बारे में कोई जवाब नहीं है।

अभी कहां हो रही है बारिश

अभी द्रोणिका हिमालय की तराई में है, जो यहां से गुजर रही है। इसके चलते असम, उत्तर-प्रदेश, बिहार में बारिश हो रही है।

घटता जा रहा है औसत बारिश का अंतर

प्रदेश की कुल औसत बारिश के मुकाबले सामान्य बारिश तीन फीसद अधिक हो चुकी थी। लेकिन यह अंतर बीते 10 दिन में घटकर शून्य हो गया। रायपुर समेत कई जिलों में औसत बारिश का अंतर तेजी से घट रहा है। खारुन नदी जो उफान पर थी, आज उसका जल स्तर नीचे आ गया है। बांधों के कपाट अब नहीं खोले जा रहे हैं, क्योंकि बाकी आठ माह के लिए पानी बचाकर रखना है।

यह है मानसून वापसी घोषित करने की पद्धति

केंद्रीय मौसम विज्ञान विभाग की गाइड-लाइन के मुताबिक किसी एक सब डिवीजन में अगर लगातार पांच दिनों तक बारिश नहीं होती है तो उसे मानसून वापसी का समय माना जाता है। राजस्थान में 30 अगस्त को मानसून

वापसी की तारीख है, लेकिन अभी तक घोषणा नहीं की गई है। संभव है दो-तीन दिनों में राजस्थान मौसम विज्ञान

विभाग सूचना जारी करे। छत्तीसगढ़ में मानसून वापसी की तय तारीख 12 अक्टबूर मानकर चलते हैं।

प्रदेश की वर्तमान स्थिति

छत्तीसगढ़ में मानसून सीजन में 1200 मिमी बारिश औसत मानी जाती है। फिलहाल 1035 मिमी ही बारिश हुई है, जो अभी भी सामान्य से 165 मिमी कम है। जब तक लगातार बारिश नहीं होगी इस आंकड़े तक पहुंचने की संभावना कम है। बीते तीन दिनों से प्रदेश में कहीं-कहीं ही हल्की बूंदाबांदी हुई, तेज बारिश नहीं।

कुछ कहना जल्दबाजी

अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। आज-कल में कोई सिस्टम बनता दिखाई नहीं दे रहा है। मानसून जब लौटता है तब एकाध बार अच्छी बरसात होती है। 17-18 सितंबर को एक सिस्टम बन रहा है। अगर बरसात नहीं होती है तो चिंता जाहिर है