
दो लाख का इनामी कुख्यात नक्सली महेंद्र मुंडा उर्फ रितेश मुंडा पिता विष्णु मुंडा एरिया कमांडर सिल्ली कसमार सब जोन ने सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर और खूंटी पुलिस द्वारा चलाए जा रहे नक्सलियों के विरुद्ध अभियान के दबाब में आकर पुलिस के समक्ष सरेंडर किया। डीआईजी एवी होमकर ओर एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा व अन्य पुलिस अधिकारियों ने गुलदस्ता देकर मुख्य धारा में शामिल होने का स्वागत किया। मौके पर सरकार द्वारा घोषित दो लाख रूपए का चेक भी महेंद्र मुंडा को सौपा गया।
2011 में महेंद्र मुंडा सबसे पहले लावा पातर के दस्ते में शामिल हुआ व महाराज प्रामाणिक अमित मुंडा ,जितराय मुंडा, प्रदीप स्वांसी, लोडरो लोहरा और जीवन कंडुलना के दस्ते में भी रहा है। महेंद्र के खिलाफ खूंटी थाने में सात मामले दर्ज हैं, जबकि सरायकेला खरसावां जिले के विभिन्न थानों में भी उग्रवादी गतिविधियों को लेकर कई मामले दर्ज हैं। महेंद्र ने 12 मई 2014 को अड़की थाना के गम्हरिया कोचांग पुल के ईंट भट्ठे में महेंद्र मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस दौरान देवेन्द मुंडा मनीराम मुंडा घायल हो गए थे। लोगरों लोहरा, रजनी स्वंसी ,बलराम मुंडा,परौ मुंडा सहित पांच छह अन्य नक्सली महेंद्र मुंडा ने 23 जून, 2016 को पश्चिमी सिंहभूम के हुरंगगड़ा में जेसीबी ओर अन्य कई वाहनों को विस्फोट कर उड़ा दिया था।
इस घटना में महराज प्रमाणिक, दुर्योधन महतो, क्रिष मुंडा, अमित मुंडा के 10-11 अन्य नक्सली शामिल थे। 8 फरवरी, 2017 को महेंद्र मुंडा ने अन्य नक्सलियों ने नोयडा पहन, महाराज प्रामाणिक, अमित मुंडा, राकेश मुंडा के साथ मिलकर खरसावां थाना के प्रदान गोड़ा ओर कतिदिरी के बीच पुलिस पार्टी को उड़ाने के लिए बम लगाया था, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया था। इसके अलावा चौका थाना के रोड़ में बारूदी सुरंग लगाने विरबंकी प्रोजेक्ट हाई स्कूल, अस्पताल और टावर को विस्पोटक से उड़ाने 6 फरवरी 2018 को चलकड कुदलता जंगल मे पुलिस के साथ मुठभेड़ सहित कई अन्य नक्सली घटनाओं में महेंद्र मुंडा शामिल रहा है। आत्म समर्पण करने वाले इस कुख्यात नक्सली की पुलिस को लंबे समय से तलाश थी।।
जानें, क्या कहा महेंद्र ने
सरेंडर करने के बाद मीडिया से बात करते हुए महेंद्र ने कहा कि वह नक्सली गतिविधियों से अाजिज हो चुका था और समाज की मुख्य धारा में शामिल होने का फैसला ले चुका था। खूंटी एसपी अश्विनी कुमार सिंह की पहल पर उसने सरेंडर कर दिया। उसने कहा कि हिंसा से समाज को एकजुट नहीं रखा जा सकता है। महेंद्र ने मुख्य धारा से भटके युवाओं से अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्य धारा में लौट जाएं और सरकार की सरेंडर पॉलिसी का लाभ उठाएं।