आत्महत्या करने वाले पहले दे देते हैं संकेत

परीक्षाओं का तनाव व दबाव, गरीबी, बेरोजगारी, नशे की लत, आर्थिक नुकसान, परिवार में कलह, प्रेम में निराशा मिलना आज आत्महत्याओं का प्रमुख कारण बन चुके हैं। महानगरों में आए दिन परेशानियों से हार मान कर लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर 18 से 40 वर्ष की आयु के लोग हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि सुसाइड करने वाले लोग अक्सर कुछ न कुछ ऐसे संकेत देते हैं, जिन्हें अगर समय रहते समझ लिया जाए तो उन्हें सुसाइड करने से रोका जा सकता है।परीक्षाओं का तनाव व दबाव, गरीबी, बेरोजगारी, नशे की लत, आर्थिक नुकसान, परिवार में कलह, प्रेम में निराशा मिलना आज आत्महत्याओं का प्रमुख कारण बन चुके हैं। महानगरों में आए दिन परेशानियों से हार मान कर लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर 18 से 40 वर्ष की आयु के लोग हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि सुसाइड करने वाले लोग अक्सर कुछ न कुछ ऐसे संकेत देते हैं, जिन्हें अगर समय रहते समझ लिया जाए तो उन्हें सुसाइड करने से रोका जा सकता है। जब कोई हताशा और निराशा भरी बातें करें तो इसे हल्के में न लें फोर्टिस अस्पताल के साइकेटिस्ट डिपार्टमेंट के हेड डॉ. अजयपाल संधू के अनुसार जिस वक्त व्यक्ति के मन में आत्महत्या का विचार चल रहा होता है, तो उस दौरान व्यक्ति के अंदर मरने की ख्वाहिश के साथ-साथ जीने की भी इच्छा होती है। इसी के चलते 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में व्यक्ति ने दोस्त, मां-बाप, रिश्तेदार व किसी करीबी के समक्ष एक दिन, दो दिन, एक सप्ताह व एक माह पूर्व आत्महत्या के विचार को जरूर प्रकट किया होता है। नासमझी की वजह से हम उन बातों को गंभीरता से नहीं लेते। स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी बनाने पर काम कर रही सरकार : डॉ. डीजे यह भी पढ़ें अगर कोई आशावादी, खुशमिजाज, सकारात्मक सोच और प्रतिभावान व्यक्ति अचानक से चुप रहने लगे। बात-बात पर गुस्सा करे, हताशा और निराशा भरी बातें करे, बुरे विचार व्यक्त करे, मौत के बारे में सोचे, खुद को अकेला रखे, खुद को कोसते रहे, निरंतर अनिंद्रा की शिकायत करे, जीवन बोझ लगने की बातें करें, आत्मविश्वास में कमी की बात करें, नशीले पदार्थो का एकाएक सेवन करे अथवा बढ़ा दे जैसे लक्षणों को जाहिर करे तो इसे बिलकुल अनदेखा न करे। परिवार के हरेक सदस्य को प्रेम व स्नेह पूर्ण व्यवहार कर हताशा में डूबे व्यक्ति को तनाव मुक्त रखने की कोशिश करनी चाहिए। रिश्तों में जोरदार गर्माहट के साथ बड़े से बड़ा संकट झेला जा सकता है। ङोल जा सकता है। व्यक्ति सोशल आइसोलेशन में आ जाए तो अलर्ट हो जाएं सौतेला बाप एक साल से कर रहा था नाबालिग बेटी से दुष्कर्म, मां को बताया तो उठाया एेसा कदम यह भी पढ़ें मानस क्लीनिक के प्रमुख व मनोचिकित्सक डॉ. राजीव गुप्ता कहते हैं कि इन्सान सुसाइड तभी करता है जब वह बहुत ज्यादा डिप्रेशन में हो। मानसिक तौर पर काफी पीड़ा हो। सुसाइड करने वाला इन्सान हमेशा अपने परिचितों में से तीन-चार लोगों से बात करता है कि उसका जीने का मन नहीं करता। ऐसा व्यक्ति अपने बैंक अकाउंट को क्लीयर करता है। उन रिश्तेदारों व दोस्तों से मिलता है, जिसे वह सालों तक न मिला हो। परिवार में वह चुप हो जाता है, सोसायटी से कट जाता है। इसे सोशल आइसोलेशन कहते हैं। जब व्यक्ति सोशल आइसोलेशन में आ जाए, तो यह टाइम परिवार वालों के लिए अलर्ट रहने वाला होता है। इस तरह के व्यक्ति के साथ हमदर्दी होनी चाहिए। जितनी जल्दी हो सके उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर जाना चाहिए। युवक के सिर में हथियार से मारकर की गई हत्या, टिब्बा रोड के खाली प्लॉट से मिला था शव यह भी पढ़ें वॉर्निग साइन समझ कर बचाया जा सकता है अस्पताल के सामने बनाया डंप, बदबू से मरीज व डॉक्टर परेशान यह भी पढ़ें मोहनदेई ओसवाल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. हरप्रीत सिंह कहना है कि इंसान सुसाइड जैसा बड़ा कदम तभी उठता है, जब उसे कोई उम्मीद नजर न आए। उसे अंदर ही अंदर काफी तकलीफ होती है। हालांकि ऐसा व्यक्ति लगातार हिंट या वार्निग साइन भी देता है। जैसे कि वह अचानक खुद को सबसे अलग कर लेता है, निगेटिव बातें करता है। परिवार व सोसायटी से दूरी बना लेता है, बातों बातों में मरने की बात करता है। यदि कोई भी व्यक्ति सुसाइड की बात कर रहा है तो उसे सीरियसली लेना चाहिए। इसका मतलब यह है कि वह बात करके मदद मांगने की कोशिश करता है। यदि उस समय व्यक्ति की बात सुन ली जाए, उस तक एक्टिविटली अप्रोच की जाए तो किसी भी व्यक्ति को सुसाइड करने से रोका जा सकता है। जब भी कोई व्यक्ति हताशा भरी बातें करें, तो उसकी बातों को गंभीरता के साथ सुनें।

जब कोई हताशा और निराशा भरी बातें करें तो इसे हल्के में न लें

फोर्टिस अस्पताल के साइकेटिस्ट डिपार्टमेंट के हेड डॉ. अजयपाल संधू के अनुसार जिस वक्त व्यक्ति के मन में आत्महत्या का विचार चल रहा होता है, तो उस दौरान व्यक्ति के अंदर मरने की ख्वाहिश के साथ-साथ जीने की भी इच्छा होती है। इसी के चलते 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में व्यक्ति ने दोस्त, मां-बाप, रिश्तेदार व किसी करीबी के समक्ष एक दिन, दो दिन, एक सप्ताह व एक माह पूर्व आत्महत्या के विचार को जरूर प्रकट किया होता है। नासमझी की वजह से हम उन बातों को गंभीरता से नहीं लेते।

अगर कोई आशावादी, खुशमिजाज, सकारात्मक सोच और प्रतिभावान व्यक्ति अचानक से चुप रहने लगे। बात-बात पर गुस्सा करे, हताशा और निराशा भरी बातें करे, बुरे विचार व्यक्त करे, मौत के बारे में सोचे, खुद को अकेला रखे, खुद को कोसते रहे, निरंतर अनिंद्रा की शिकायत करे, जीवन बोझ लगने की बातें करें, आत्मविश्वास में कमी की बात करें, नशीले पदार्थो का एकाएक सेवन करे अथवा बढ़ा दे जैसे लक्षणों को जाहिर करे तो इसे बिलकुल अनदेखा न करे। परिवार के हरेक सदस्य को प्रेम व स्नेह पूर्ण व्यवहार कर हताशा में डूबे व्यक्ति को तनाव मुक्त रखने की कोशिश करनी चाहिए। रिश्तों में जोरदार गर्माहट के साथ बड़े से बड़ा संकट झेला जा सकता है। ङोल जा सकता है।

व्यक्ति सोशल आइसोलेशन में आ जाए तो अलर्ट हो जाएं

मानस क्लीनिक के प्रमुख व मनोचिकित्सक डॉ. राजीव गुप्ता कहते हैं कि इन्सान सुसाइड तभी करता है जब वह बहुत ज्यादा डिप्रेशन में हो। मानसिक तौर पर काफी पीड़ा हो। सुसाइड करने वाला इन्सान हमेशा अपने परिचितों में से तीन-चार लोगों से बात करता है कि उसका जीने का मन नहीं करता। ऐसा व्यक्ति अपने बैंक अकाउंट को क्लीयर करता है। उन रिश्तेदारों व दोस्तों से मिलता है, जिसे वह सालों तक न मिला हो। परिवार में वह चुप हो जाता है, सोसायटी से कट जाता है। इसे सोशल आइसोलेशन कहते हैं। जब व्यक्ति सोशल आइसोलेशन में आ जाए, तो यह टाइम परिवार वालों के लिए अलर्ट रहने वाला होता है। इस तरह के व्यक्ति के साथ हमदर्दी होनी चाहिए। जितनी जल्दी हो सके उसे मनोचिकित्सक के पास लेकर जाना चाहिए।

वॉर्निग साइन समझ कर बचाया जा सकता है

मोहनदेई ओसवाल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. हरप्रीत सिंह कहना है कि इंसान सुसाइड जैसा बड़ा कदम तभी उठता है, जब उसे कोई उम्मीद नजर न आए। उसे अंदर ही अंदर काफी तकलीफ होती है। हालांकि ऐसा व्यक्ति लगातार हिंट या वार्निग साइन भी देता है। जैसे कि वह अचानक खुद को सबसे अलग कर लेता है, निगेटिव बातें करता है। परिवार व सोसायटी से दूरी बना लेता है, बातों बातों में मरने की बात करता है।

यदि कोई भी व्यक्ति सुसाइड की बात कर रहा है तो उसे सीरियसली लेना चाहिए। इसका मतलब यह है कि वह बात करके मदद मांगने की कोशिश करता है। यदि उस समय व्यक्ति की बात सुन ली जाए, उस तक एक्टिविटली अप्रोच की जाए तो किसी भी व्यक्ति को सुसाइड करने से रोका जा सकता है। जब भी कोई व्यक्ति हताशा भरी बातें करें, तो उसकी बातों को गंभीरता के साथ सुनें।