
पूर्व विधायक योगेंद्र साव के मामले में पहले भी एक बार अदालत की किरकिरी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट में पिछली बार मामले की सुनवाई के दौरान योगेंद्र साव के वकील ने अदालत को बताया था कि निर्मला देवी और योगेंद्र साव की जमानत अर्जियों पर दो आदेश दिए गए। हाई कोर्ट ने पहले हिस्से में जमानत खारिज करने के पक्ष में तर्क दिया था। दूसरे हिस्से में जज ने जमानत मंजूर करने के पक्ष में तर्क दिए।
कोर्ट के आदेश के दोनों भाग को पहले वेबसाइट पर अपलोड किया गया और बाद में उसे हटा लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने योगेंद्र साव की जमानत पर हाईकोर्ट के विरोधाभासी आदेश को लेकर जांच करने का निर्देश दिया है, सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह के अंदर बंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपने को कहा है। पीठ ने इसे गंभीर मामला मानते हुए कहा कि इससे न्यायिक प्रशासन की प्रतिष्ठा धूमिल हो सकती है।