प्लेटलेट्स कम हों तो जरूरी नहीं डेंगू ही हो… जानें क्या हैं लक्षण

बदलते मौसम के साथ ही बुखार की समस्या आम हो गई है। इस मौसम में मच्छर ज्यादा पैदा होते हैं। इनके काटने से कई तरह के बुखार चढ़ते हैं। अभी वायरल, और मलेरिया बुखार से पीड़ित मरीज ज्यादा आ रहे हैं। हालांकि डेंगू बुखार के भी केस सामने आने लगे हैं। मगर, इन दिनों में बुखार चढ़ते ही डेंगू बुखार का हौवा सताने लगता लगता है। बुखार से पीड़ित लोगों में प्लेटलेट्स की कमी पाई जाती है, लेकिन यह भी जरुरी नहीं है कि प्लेट्लेट्स कम होने पर डेंगू बुखार ही हो।बदलते मौसम के साथ ही बुखार की समस्या आम हो गई है। इस मौसम में मच्छर ज्यादा पैदा होते हैं। इनके काटने से कई तरह के बुखार चढ़ते हैं। अभी वायरल, और मलेरिया बुखार से पीड़ित मरीज ज्यादा आ रहे हैं। हालांकि डेंगू बुखार के भी केस सामने आने लगे हैं। मगर, इन दिनों में बुखार चढ़ते ही डेंगू बुखार का हौवा सताने लगता लगता है। बुखार से पीड़ित लोगों में प्लेटलेट्स की कमी पाई जाती है, लेकिन यह भी जरुरी नहीं है कि प्लेट्लेट्स कम होने पर डेंगू बुखार ही हो।  डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डॉ. सतपाल गोजरा का कहना है कि वायरल बुखार होने पर भी प्लेटलेट्स कम हो जाता है। ऐसे में डरने की जरुरत नहीं होती है। बल्कि चेकअप करवाना चाहिए। उनका कहना है कि वायरल बुखार किसी भी वायरस की वजह से फैल सकता है। खासकर मौसम बदलाव के समय में यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। इसमें गला खराब हो जाता है। ठंड के साथ बुखार, मांस पेशियों में दर्द उठती है। जैसे डेंगू में प्लेट्लेट्स कम हो जाते हैं। वायरल बुखार में भी प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। लेकिन यह जरूरी नहीं कि किसी बुखार में प्लेटलेट्स कम हो तो डेंगू बुखार ही है।

डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डॉ. सतपाल गोजरा का कहना है कि वायरल बुखार होने पर भी प्लेटलेट्स कम हो जाता है। ऐसे में डरने की जरुरत नहीं होती है। बल्कि चेकअप करवाना चाहिए। उनका कहना है कि वायरल बुखार किसी भी वायरस की वजह से फैल सकता है। खासकर मौसम बदलाव के समय में यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है। इसमें गला खराब हो जाता है। ठंड के साथ बुखार, मांस पेशियों में दर्द उठती है। जैसे डेंगू में प्लेट्लेट्स कम हो जाते हैं। वायरल बुखार में भी प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। लेकिन यह जरूरी नहीं कि किसी बुखार में प्लेटलेट्स कम हो तो डेंगू बुखार ही है।