बिजली बंद करने की चेतावनी के बाद डीवीसी का 750 करोड़ का बाउंस चेक वापस,

दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के बिजली आपूर्ति के मद में बकाये को लेकर भुगतान की कवायद फुस्स हो रही है। शुक्रवार को राज्य बिजली वितरण निगम ने लगभग डेढ़ माह पूर्व डीवीसी को बकाये के मद में जारी 750 करोड़ रुपये का चेक वापस ले लिया। डीवीसी के एक वरीय अधिकारी के मुताबिक शुक्रवार को आनन-फानन में बिजली वितरण निगम के अधिकारियों ने यह मैसेज दिया कि चेक वापस होने के बाद नए सिरे से चेक जारी किया जाएगा। दोपहर में 350 करोड़ रुपये का चेक डीवीसी के खाते में जमा कराने के लिए जारी किया गया लेकिन देर होने की वजह से इसका भुगतान नहीं हो पाया।दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के बिजली आपूर्ति के मद में बकाये को लेकर भुगतान की कवायद फुस्स हो रही है। शुक्रवार को राज्य बिजली वितरण निगम ने लगभग डेढ़ माह पूर्व डीवीसी को बकाये के मद में जारी 750 करोड़ रुपये का चेक वापस ले लिया। डीवीसी के एक वरीय अधिकारी के मुताबिक शुक्रवार को आनन-फानन में बिजली वितरण निगम के अधिकारियों ने यह मैसेज दिया कि चेक वापस होने के बाद नए सिरे से चेक जारी किया जाएगा। दोपहर में 350 करोड़ रुपये का चेक डीवीसी के खाते में जमा कराने के लिए जारी किया गया लेकिन देर होने की वजह से इसका भुगतान नहीं हो पाया।  संभावना जताई जा रही है कि नए सिरे से जारी किए गए चेक की राशि सोमवार को डीवीसी के खाते में जा सकती है। डीवीसी के कोलकाता स्थित मुख्यालय के अधिकारी लगातार इसपर नजर बनाए हुए हैं। गौरतलब है कि गुरुवार को बिजली किल्लत के मसले पर पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री सरयू ने कहा था कि हमने जब डीवीसी कर्मियों से बात की तो कहा गया कि 750 करोड़ रुपये का चेक दिया गया था जो बाउंस हो गया। अब सरकार का चेक बाउंस हो जाए तो क्या कहा जाए। राज्य का वित्तीय प्रबंधन ही गड़बड़ा गया है। यह घोर अनियमितता है।   चीन के दौरे से वापस लौटे मुख्यमंत्री रघुवर दास; नए अनुभव और तजुर्बो का खोलेंगे पिटारा यह भी पढ़ें कई जिलों में बिजली आपूर्ति है लचर   डीवीसी ने 3354 करोड़ रुपये के बकाये का दावा राज्य बिजली वितरण निगम पर किया है। बकाया का भुगतान नहीं होने पर डीवीसी ने अपने कमांड एरिया वाले जिलों में बिजली की कटौती करने की चेतावनी दी है। डीवीसी के कमांड एरिया वाले जिलों में समस्त धनबाद और बोकारो जिला शामिल है। इसके अलावा हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, चतरा, पलामू, रांची, लोहरदगा, गिरिडीह, दुमका का ज्यादातर भाग भी इसके अधीन आता है। इन इलाकों में दामोदर घाटी निगम की आपूर्ति के भरोसे कंपनियां चलती है। सारे हाइ टेंशन कस्टमर दामोदर घाटी निगम के तहत आते हैं। आपूर्ति बंद होने का सबसे ज्यादा असर उद्योगों पर पड़ेगा। घरेलू उपभोक्ता भी इससे प्रभावित होंगे। फिलहाल इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति लचर है।   विश्व हिन्दू परिषद का उद्देश्य समाज को समरस बनाना, केंद्रीय धर्मप्रसार प्रमुख ने घरवापसी पर दिया जोर यह भी पढ़ें इस साल छह दफा बिजली आपूर्ति बंद करने चेतावनी दे चुका है डीवीसी  दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) ने झारखंड में बिजली आपूर्ति बंद करने की चेतावनी दी है। इस वर्ष डीवीसी के कामर्शियल डिपार्टमेंट, कोलकाता ने छह रिमाइंडर दिए हैं। ताजा पत्र में चीफ इंजीनियर एमसी रक्षित ने झारखंड बिजली वितरण निगम के चीफ इंजीनियर (कामर्शियल एंड रेवेन्यू) को एक कड़ा पत्र भेजा है। इसमें बकाया भुगतान पर जोर देते हुए ताकीद की गई है कि अगर इस दिशा में बिजली वितरण निगम ने कार्रवाई नहीं की तो चरणबद्ध तरीके से दामोदर घाटी निगम राज्य की बिजली आपूर्ति बंद करेगा। नोटिस की मियाद 15 सितंबर दी गई है। भुगतान नहीं होने पर डीवीसी 15 सितंबर के बाद 30 प्रतिशत बिजली की आपूर्ति कम कर देगा। इसके बाद प्रत्येक सप्ताह दस-दस प्रतिशत बिजली की कटौती की जाएगी। पिछली नोटिस जारी करने के बाद झारखंड बिजली वितरण निगम ने 750 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद नोटिस वापस लिया गया। इस वर्ष दामोदर घाटी निगम ने 23 अप्रैल, 11 मई, छह जून, सात जून, आठ अगस्त और 21 अगस्त को झारखंड बिजली वितरण निगम को लोड रेगुलेशन नोटिस जारी की है। डीवीसी ने किया आग्रह-नियमित तौर पर बिजली आपूर्ति के एवज में राशि का हो भुगतान।-फ्यूल बिल, अन्य ऑपरेशनल और मेंटेनेंस खर्च का भुगतान।   रिनपास में भर्ती दोनों मानसिक रोगी स्वस्थ, बांग्लादेश वापस भेजने में जुटी झारखंड सरकार यह भी पढ़ें -बकाये के अलावा इस एवज में निगम द्वारा लिए गए लोन का ब्याज चाहिए।  -पैसे की कमी के कारण डीवीसी के विद्युत उत्पादक संयंत्रों का संचालन प्रभावित। बकाया बढ़ता रहा तो डीवीसी बाध्य हो सकता है शटडाउन के लिए।

संभावना जताई जा रही है कि नए सिरे से जारी किए गए चेक की राशि सोमवार को डीवीसी के खाते में जा सकती है। डीवीसी के कोलकाता स्थित मुख्यालय के अधिकारी लगातार इसपर नजर बनाए हुए हैं। गौरतलब है कि गुरुवार को बिजली किल्लत के मसले पर पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री सरयू ने कहा था कि हमने जब डीवीसी कर्मियों से बात की तो कहा गया कि 750 करोड़ रुपये का चेक दिया गया था जो बाउंस हो गया। अब सरकार का चेक बाउंस हो जाए तो क्या कहा जाए। राज्य का वित्तीय प्रबंधन ही गड़बड़ा गया है। यह घोर अनियमितता है।

कई जिलों में बिजली आपूर्ति है लचर

 डीवीसी ने 3354 करोड़ रुपये के बकाये का दावा राज्य बिजली वितरण निगम पर किया है। बकाया का भुगतान नहीं होने पर डीवीसी ने अपने कमांड एरिया वाले जिलों में बिजली की कटौती करने की चेतावनी दी है। डीवीसी के कमांड एरिया वाले जिलों में समस्त धनबाद और बोकारो जिला शामिल है। इसके अलावा हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, चतरा, पलामू, रांची, लोहरदगा, गिरिडीह, दुमका का ज्यादातर भाग भी इसके अधीन आता है। इन इलाकों में दामोदर घाटी निगम की आपूर्ति के भरोसे कंपनियां चलती है। सारे हाइ टेंशन कस्टमर दामोदर घाटी निगम के तहत आते हैं। आपूर्ति बंद होने का सबसे ज्यादा असर उद्योगों पर पड़ेगा। घरेलू उपभोक्ता भी इससे प्रभावित होंगे। फिलहाल इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की स्थिति लचर है।

इस साल छह दफा बिजली आपूर्ति बंद करने चेतावनी दे चुका है डीवीसी

दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) ने झारखंड में बिजली आपूर्ति बंद करने की चेतावनी दी है। इस वर्ष डीवीसी के कामर्शियल डिपार्टमेंट, कोलकाता ने छह रिमाइंडर दिए हैं। ताजा पत्र में चीफ इंजीनियर एमसी रक्षित ने झारखंड बिजली वितरण निगम के चीफ इंजीनियर (कामर्शियल एंड रेवेन्यू) को एक कड़ा पत्र भेजा है। इसमें बकाया भुगतान पर जोर देते हुए ताकीद की गई है कि अगर इस दिशा में बिजली वितरण निगम ने कार्रवाई नहीं की तो चरणबद्ध तरीके से दामोदर घाटी निगम राज्य की बिजली आपूर्ति बंद करेगा। नोटिस की मियाद 15 सितंबर दी गई है। भुगतान नहीं होने पर डीवीसी 15 सितंबर के बाद 30 प्रतिशत बिजली की आपूर्ति कम कर देगा। इसके बाद प्रत्येक सप्ताह दस-दस प्रतिशत बिजली की कटौती की जाएगी। पिछली नोटिस जारी करने के बाद झारखंड बिजली वितरण निगम ने 750 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद नोटिस वापस लिया गया। इस वर्ष दामोदर घाटी निगम ने 23 अप्रैल, 11 मई, छह जून, सात जून, आठ अगस्त और 21 अगस्त को झारखंड बिजली वितरण निगम को लोड रेगुलेशन नोटिस जारी की है। डीवीसी ने किया आग्रह-नियमित तौर पर बिजली आपूर्ति के एवज में राशि का हो भुगतान।-फ्यूल बिल, अन्य ऑपरेशनल और मेंटेनेंस खर्च का भुगतान।

-बकाये के अलावा इस एवज में निगम द्वारा लिए गए लोन का ब्याज चाहिए।

-पैसे की कमी के कारण डीवीसी के विद्युत उत्पादक संयंत्रों का संचालन प्रभावित। बकाया बढ़ता रहा तो डीवीसी बाध्य हो सकता है शटडाउन के लिए।