
सरकारी स्कूल के शिक्षक और बच्चों के बीच शिक्षा को लेकर सामंजस्य कैसे बनाया जाना चाहिए, गरीब बच्चे किन परिस्थितियों से गुजरकर पढ़ाई करते हैं, फिल्म हिचकी में इसका खूबसूरती के साथ चित्रण किया गया है।
हिचकी में जो कुछ दिखाया गया है वह छत्तीसगढ़ के गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल दयालबंद में 45 वर्ष पहले हो चुका है। इस स्कूल के वर्ष 1976 के बैच के जिन बच्चों को शिक्षक एमजी मजूमदार ने तालीम दी उनमें सात आइएएस, दो आइपीएस, एक आइएफएस, चार डॉक्टर व एक दर्जन इंजीनियर हैं। इनमें से एक प्रमुख नाम पुलिस अधीक्षक स्व. शहीद विनोब चौबे का भी है। जिन्होंने यात्रियों से भरी बस व अपने जवानों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी।
गवर्नमेंट स्कूल के शिक्षक एमजी मजूमदार अपने कार्यकाल के दौरान अनुशासन के मामले में बेहद कठोर माने जाते थे। उनके द्वारा पढ़ाए गए गणित व भौतिकी के सवालों को दोबारा पूछने की जरूरत ही नहीं होती थी। अनुशासन ऐसा कि पढ़ाई के दौरान छात्रों के बात करने पर चाक तोड़कर सीधे मारते थे। निशाना भी ऐसा कि चाक का टुकड़ा सीधे माथे पर तिलक लगा जाता था।
इसी अनुशासन और कड़क स्वभाव ने हीरा तराशने का काम किया। वर्ष 1976 में उनकी क्लास में कुल 27 बच्चे पढ़ते थे। इनमें से आज सात बच्चे आइएएस हैं। आरपी मंडल, हेमंत पहारे, नवनीत वर्मा, अनिल टुटेजा, जन्मेजय महोबे ये कुछ ऐसे नाम हैं जो छत्तीसगढ़ शासन में महत्वपूर्ण पदों पर काबिज हैं।
वर्ष 2008 में देवेंद्र सिंह राय मध्यप्रदेश शासन में मुख्य सचिव के पद से रिटायर हुए हैं। आइपीएस अफसरों में एक प्रमुख नाम स्व. विनोद चौबे हैं। इनके अलावा संजय पिल्ले वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन में एडीजी के पद पर कार्यरत हैं। आइएफएस राजेंद्र गोवर्धन के अलावा प्रलयकांति बसु व आलोक वर्मा भिलाई स्टील प्लांट में डीजीएम के पद पर कार्यरत हैं।
इनका कहना है
मुझे इस बात का गर्व है कि मजूमदार सर मेरे गुरु हैं। उनके जैसे शिक्षक की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में बेहद जरूरत है। मैं आज जिस मुकाम पर हूं वह उनका आशीर्वाद का ही फल है। अनुशासन के मामले मेें बेहद कड़क पर उतने ही जिंदादिल इंसान है मजूमदार सर।
आरपी मंडल एसीएस, छत्तीसगढ़ शासन
उस समय की पढ़ाई की बात ही कुछ अलग थी। अनुशासन के मामले में बेहद कड़क होने के कारण मजूमदार सर की क्लास के बच्चे भी उनके अनुरूप ढल गए थे। आज हम लोग जिस मुकाम पर पहुंचे हैं उनकी मेहनत और लगन का ही परिणाम है।
हेमंत पहारे आईएएस व सचिव छत्तीसगढ़ शासन
शिक्षक मजूमदार की जुबानी
नईदुनिया से चर्चा के दौरान शिक्षक मजूमदार ने कहा कि मुझे वर्ष 1976 बैच के बच्चे अच्छी तरह याद हैं। उस बैच के सभी बच्चे आज महत्वपूर्ण पदों पर काबिज हैं। इस बात की मुझे खुशी होती है। आइएएस, आइपीएस व आइएफएस के अलावा इंजीनियर व डॉक्टर भी हैं। बिलासपुर में ही जितने महत्वपूर्ण डॉक्टर आज हैं वह सभी मेरे छात्र रहे हैं। देश और समाज की सेवा में उनका अमूल्य योगदान बना रहे यही मेरे लिए गुस्र् दक्षिणा है।