
एसटी-एससी एक्ट में संशोधन के खिलाफ छत्तीसगढ़ में भी आग सुलगने लगी है। मंगलवार को राज्य मुख्यालय पर सवर्ण समाज के लोगों ने बैठक की, जिसमें संयुक्त आंदोलन खड़ा करने का फैसला लिया गया है। सबसे पहले तो सवर्णों के घरों के बाहर पोस्टर लगवाया जाएगा, जिसमें ‘सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बहाल करो’ लिखा होगा। इसके साथ ही, सवर्णों का आंदोलन सड़क पर भी जल्द नजर आएगा। 
सवर्णों की बैठक में साथ आया ओबीसी समाज
छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष और ब्राह्मण समाज के नेता विरेंद्र पांडे, कुर्मी समाज के नेता राकेश सिंह बैस की उपस्थिति में सवर्णों की बैठक हुई, जिसमें ब्राह्मण, सिख, सिंधी, मुस्लिम, कुर्मी, साहू, मारवाड़ी, क्षत्रिय समेत अन्य सामान्य व ओबीसी वर्ग के लोग शामिल हुए।
सभी ने एसटी-एससी एक्ट में संशोधन का पुरजोर विरोध करने की बात कही। सबसे पहले तो यह तय हुआ कि एक प्रदेश स्तर की समिति बनाई जाए, जो आंदोलन की रूपरेखा बनाए और उसका संचालन भी करे। आंदोलन में हर सवर्ण परिवार को शामिल करने के लिए पोस्टर अभियान चलाया जाएगा।
समाज प्रमुखों को जिम्मेदारी दी जाएगी कि वे अपने समाज के अधिकाधिक लोगों के घरों के बाहर पोस्टर चस्पा कराएं, ताकि सवर्णों का विरोध हर तरफ नजर आए। मध्यप्रदेश में सवर्णों का आंदोलन जोर पकड़ चुका है, इसलिए छत्तीसगढ़ में भी आंदोलन की शुरुआत जल्द करने का फैसला हुआ।
नौ को दुर्ग में धरना से आंदोलन की शुरूआत
अभी नौ सितंबर को दुर्ग जिला मुख्यालय में धरना देकर आंदोलन का आगाज किया जाएगा। इसके बाद हर जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन होगा। जिला मुख्यालयों के बाद आंदोलन को तहसील और विकासखंडों तक भी पहुंचाया जाएगा।
सवर्णों की बैठक में यह भी तय हुआ है कि हर धरना-प्रदर्शन के बाद स्थानीय जिला प्रशासन को एसटी-एससी एक्ट में संशोधन को वापस लेने और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बहाल करने के लिए ज्ञापन सौंपा जाएगा। कुर्मी समाज के नेता राकेश सिंह बैस का कहना है कि ज्ञापन की एक प्रति प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय को भी भेजी जाएगी।
सांसद सहमति नहीं देंगे, तो करेंगे विरोध
बैठक में यह भी तय हुआ कि प्रदेश के सांसदों को पत्र लिखेंगे और उनसे आगामी लोकसभा सत्र में संशोधन विधेयक को निरस्त करने के लिए प्रस्ताव लाने का अनुरोध किया जाएगा। अगर, सांसद सत्र में प्रस्ताव नहीं लाएंगे तो उनका विरोध किया जाएगा। इसके अलावा विधानसभा चुनाव के सभी प्रत्याशियों से भी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर लिया जाएगा। जिस प्रत्याशी से सहमति नहीं मिलेगी, उसे सवर्ण समाज के लोग वोट नहीं देंगे। छत्तीसगढ़ बंद पर भी विचार हो रहा है।