नक्सलगढ़ में पंच परमेश्वर है धनेलिया गुरुजी, गांव के बच्चों का करते हैं नामकरण

अबूझमाड़ के लाल गलियारे के बीच बसे गांव सोनपुर में 35 वर्षों से अनवरत शिक्षा की अलख जगा रहे शिक्षक रणजीत सिंह धनेलिया को ग्रामीण अपना पंच-परमेश्वर मानते हैं। रणजीत सिंह के चलते गांव के विवाद थाने तक नहीं पहुंचते।अबूझमाड़ के लाल गलियारे के बीच बसे गांव सोनपुर में 35 वर्षों से अनवरत शिक्षा की अलख जगा रहे शिक्षक रणजीत सिंह धनेलिया को ग्रामीण अपना पंच-परमेश्वर मानते हैं। रणजीत सिंह के चलते गांव के विवाद थाने तक नहीं पहुंचते।  ADVERTISING  inRead invented by Teads उनकी फैलाई जागरूकता का ही परिणाम है कि आज गांव में एक भी बच्चा ऐसा नहीं, जो स्कूल न जाता हो। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गांव के ज्यादातर नौनिहालों का नामकरण उन्होंने ही किया है। पिता की नि:स्वार्थ सेवा से प्रभावित होकर उनके बेटे ने भी शिक्षकीय पेशा ही चुना है।   मां बम्लेश्वरी के दर्शन करने पहुंचे अमित शाह, अटल विकास यात्रा में होंगे शामिल यह भी पढ़ें  अंतागढ़ ब्लाक के भैंसगांव निवासी रणजीत सिंह धनेलिया सोनपुर माध्यमिक पाठशाला में शिक्षक हैं। बेटा डमरूराम भी इसी स्कूल में दस वर्ष से पढ़ा रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि धनेलिया गुरुजी विवादों के मामले में दोनों पक्षों की बातों को शांति से सुनने के बाद ही फैसला सुनाते हैं। गलती करने वाले पक्ष को वे इस बात का संजीदगी से अहसास करा देते हैं कि उसने गलती की है।  गांव में नहीं एक भी अप्रवेशी   CG : फिर फटा सरकारी मोबाइल, CMO ने कहा, बदल देंगे यह भी पढ़ें  यह वो इलाका है जिसे नक्सलियों का स्वर्ग माना जाता है। नक्सली जिन दो बातों का प्रबल व हिंसात्मक विरोध करते हैं, वो हैं विकास व शिक्षा। इसके बिल्कुल उलट यहां स्कूल सत्र प्रारंभ होने से पहले ही रणजीत सिंह गांव स्थित हर घर में पहुंचकर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों को प्रेरित करते हैं। इसके चलते बीते कई सालों से गांव में एक भी बच्चा अप्रवेशी नहीं। पढ़ाई में कमजोर बच्चों पर वे ज्यादा ध्यान देते हैं।  कभी नहीं किया नागा   नक्सलगढ़ में पंच परमेश्वर है धनेलिया गुरुजी, गांव के बच्चों का करते हैं नामकरण यह भी पढ़ें  रणजीत सिंह नियमित रूप से स्कूल पहुंचते हैं। न विपरीत मौसम में वे घर पर रुकते हैं और न ही बीमारी की हालत में। इतना ही नहीं, किसी काम से यदि जिला मुख्यालय जाना हो तो 26 किलोमीटर साइकिल चलाकर जाते हैं और देर रात तक लौट भी आते हैं ताकि अगले दिन स्कूल पहुंच सकें।  गजब की लोकप्रियता   पद्मश्री कवि सुरेंद्र दुबे आज BJP में हो सकते हैं शामिल यह भी पढ़ें  सोनपुर में गुरुजी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि किसी भी बच्चे के नामकरण में उन्हें खासतौर पर आमंत्रित कर उनके सुझाए नाम को ही रखा जाता है। बीते कुछ वर्षों में इलाके के सैकड़ों बच्चों का नामकरण उन्होंने ही किया है। उनके मार्गदर्शन में गांव में हर सप्ताह रामायण का पाठ होता है, ताकि संस्कृति व मानव मूल्यों की रक्षा होती रहे।  राष्ट्रगान का हल्बी में किया अनुवाद    CG : वनवासियों को सौगात, खत्म होंगे वन अपराध के प्रकरण यह भी पढ़ें  धनेलिया गुरुजी ने हल्बी भाषी गांवों के बच्चों को राष्ट्रगान का भाव समझाने के लिए उसका हल्बी में अनुवाद किया है। बच्चों को रोजाना हल्बी में राष्ट्रगान का अभ्यास कराते हैं। हिंदी के अलावा अन्य कई भाषाओं के गीतों व कहानियों का उन्होंने हल्बी में अनुवाद किया है।  खेल से बनाया सकारात्मक माहौल   धुर नक्सल प्रभावित सोनपुर में खेल के जरिए गुरुजी ने सकारात्मक माहौल बना दिया है। गांव में साल में दो से तीन बार क्रिकेट और फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। इसमें अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों के बच्चे व ग्रामीण हिस्सा लेते हैं। इससे समाज की मुख्यधारा से वे विमुख होने की कभी नहीं सोचते।

उनकी फैलाई जागरूकता का ही परिणाम है कि आज गांव में एक भी बच्चा ऐसा नहीं, जो स्कूल न जाता हो। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गांव के ज्यादातर नौनिहालों का नामकरण उन्होंने ही किया है। पिता की नि:स्वार्थ सेवा से प्रभावित होकर उनके बेटे ने भी शिक्षकीय पेशा ही चुना है।

अंतागढ़ ब्लाक के भैंसगांव निवासी रणजीत सिंह धनेलिया सोनपुर माध्यमिक पाठशाला में शिक्षक हैं। बेटा डमरूराम भी इसी स्कूल में दस वर्ष से पढ़ा रहा है। ग्रामीण बताते हैं कि धनेलिया गुरुजी विवादों के मामले में दोनों पक्षों की बातों को शांति से सुनने के बाद ही फैसला सुनाते हैं। गलती करने वाले पक्ष को वे इस बात का संजीदगी से अहसास करा देते हैं कि उसने गलती की है।

गांव में नहीं एक भी अप्रवेशी

यह वो इलाका है जिसे नक्सलियों का स्वर्ग माना जाता है। नक्सली जिन दो बातों का प्रबल व हिंसात्मक विरोध करते हैं, वो हैं विकास व शिक्षा। इसके बिल्कुल उलट यहां स्कूल सत्र प्रारंभ होने से पहले ही रणजीत सिंह गांव स्थित हर घर में पहुंचकर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों को प्रेरित करते हैं। इसके चलते बीते कई सालों से गांव में एक भी बच्चा अप्रवेशी नहीं। पढ़ाई में कमजोर बच्चों पर वे ज्यादा ध्यान देते हैं।

कभी नहीं किया नागा

रणजीत सिंह नियमित रूप से स्कूल पहुंचते हैं। न विपरीत मौसम में वे घर पर रुकते हैं और न ही बीमारी की हालत में। इतना ही नहीं, किसी काम से यदि जिला मुख्यालय जाना हो तो 26 किलोमीटर साइकिल चलाकर जाते हैं और देर रात तक लौट भी आते हैं ताकि अगले दिन स्कूल पहुंच सकें।

गजब की लोकप्रियता

सोनपुर में गुरुजी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि किसी भी बच्चे के नामकरण में उन्हें खासतौर पर आमंत्रित कर उनके सुझाए नाम को ही रखा जाता है। बीते कुछ वर्षों में इलाके के सैकड़ों बच्चों का नामकरण उन्होंने ही किया है। उनके मार्गदर्शन में गांव में हर सप्ताह रामायण का पाठ होता है, ताकि संस्कृति व मानव मूल्यों की रक्षा होती रहे।

राष्ट्रगान का हल्बी में किया अनुवाद 

धनेलिया गुरुजी ने हल्बी भाषी गांवों के बच्चों को राष्ट्रगान का भाव समझाने के लिए उसका हल्बी में अनुवाद किया है। बच्चों को रोजाना हल्बी में राष्ट्रगान का अभ्यास कराते हैं। हिंदी के अलावा अन्य कई भाषाओं के गीतों व कहानियों का उन्होंने हल्बी में अनुवाद किया है।

खेल से बनाया सकारात्मक माहौल

धुर नक्सल प्रभावित सोनपुर में खेल के जरिए गुरुजी ने सकारात्मक माहौल बना दिया है। गांव में साल में दो से तीन बार क्रिकेट और फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। इसमें अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों के बच्चे व ग्रामीण हिस्सा लेते हैं। इससे समाज की मुख्यधारा से वे विमुख होने की कभी नहीं सोचते।