कालेधन और नोटबंदी पर लिखी नज्म

कालेधन को सफेद करने के लिए नोटबंदी की गई थी। 99% से ज्यादा नोट बैंकों में वापस आ गये। रिजर्व बैंक की इस रिपोर्ट के बाद आरोप लगने लगे कि कालेधन को सफेद करने के लिए नोटबंदी की गई थी। नोटबंदी के दौरान ही मैंने अपनी इस नज़्म के माध्यम से यही बात बहुत पहले कह दी थी। एक बार फिर पेश है कालेधन और नोटबंदी पर लिखी नज्म :-

आधा हमारा-आधा तुम्हारा –

है कालेधन का नियम पुराना
आधा तुम्हारा-आधा हमारा

ये कल्लू जन्मा है जिस गुनाह से
आधा तुम्हारा-आधा हमारा

चले है मिलकर गुनाह छिपाने
इसे सियासी कफन पहनाने
सफेद करके, कलंक छिपाके
कबर बना के , दफन कराके
गुनाहो को दे खिराजेअकीदत
निभा रहे हैं वो दोस्ताना
वो चुपके-चुपके तय कर चुके हैं
सियासी रहबर ये कह चुके हैं
तुम्हारी दौलत-हमारा रुतबा
आधा तुम्हारा- आधा हमारा।

गरीब जनता को बलग़ला दो
फिर ख्वाब उसको नया दिखा दो,
उसे थका दो, उसे डरा दो,
उसे नचा दो, उसे छका दो,
जो ख़त्म न हो वहाँ लगा दो,
उसे क़तारों मे ही फंसा दो,
तुम अपने कल्लू की कालिखों के
कलंक गरीबों पर ही लगा दो।

सियासतदाओँ- भ्रष्ट अमीरी,
बिके कलमकारो और वजीरों,
तुम्हारे नाटक की औडियन्स है
ये आम जनता तो कमअक़ल है,
हो तुम अदाकारी का खजाना,
इसे ही उल्लू सदा बनाना।
तुम्हारे हर झूठ में फंस गये हैं
मजहबी जज़्बात उलझ गये हैं
हमारे सच को ही मार डाला
फरेब का हो तुम कारखाना
ये जो तबाही का सिलसिला है
तुम्हारा ही सब किया-धरा है
ख़तावार तुम नहीं अकेले,
तुम्हारी भक्ति का ये गुनाह है
आधा हमारा-आधा हमारा

तुम्हारे सपनों से थक चुके हैं,
तुम्हारी चालो मे फँस चुके हैं,
तुम्हारी बातों मे आ गये थे,
तुम्हारे झाँसो को सच समझकर,
मेरे भरोसे का ये गुनाह है
आधा हमारा-आधा तुम्हारा ।।

– नवेद शिकोह 9918223245