
कांकेर। बारिश के मौसम में जल जनित बीमारियां तेजी के साथ फैल रही हैं। नक्सल प्रभावित बस्तर के कांकेर जिले के सुदूर गांवों में भी मलेरिया, टाइफाइड, उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों का प्रकोप है। कई पहुंच विहीन गांवों में लोग बीमारियों से जूझ रहे हैं। बरसात में कई सड़कें पूरी तरह बंद हैं।
जिले के कोयलीबेड़ा क्षेत्र में मेढ़की नदी उफान पर है। इसके पार बसे गांवों में बीमारी फैलने की खबर कुछ दिनों पहले नईदुनिया ने प्रकाशित की थी। इसके बाद स्वास्थ्य अमला अब पूरी तरह जिले में सतर्क हो गया है। यहां से एक स्पेशल मेडिकल टीम सुदूर गांवों तक पहुंचने के लिए रवाना की गई।
टीम में डाक्टरों के साथ नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ ने प्रभावित गांवों तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत की। कीचड़ भरे रास्तों पर पैदल चलने के साथ ही टीम ने उफान मारती मेढ़की नदी को नाव के सहारे पार किया और दूसरे किनारे से लगे गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की। उन्हें दवाएं मुहैया कराई गई और बीमारी से बचाव के उपाय बताए गए।
ट्रैक्टर से पहुंचाई दवा की खेप
कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के पानीडोबीर, चिलपरस, आलपरस, पटेल पारा, केसेकोडी आदि नक्सल प्रभावित गांवों में चिकित्सा शिविर लगाकर 230 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। यहां पहुंची मेडिकल टीम के डॉक्टरों ने कहा ग्रामीण बीमारी से उबरने के लिए दवा की जगह झाड़फूंक करा रहे थे।
उन्हें समझाइश दी गई है कि इन अंधविश्वास की बातों पर भरोसा न करें और बीमारी की हालत में तुरंत स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से संपर्क करें। बीएमओ डॉ एनआर नवरतन ने खुद इस चिकित्सा शिविर का मोर्चा संभाला है। उन्होंने बताया कि फिलहाल खतरे के हालात नहीं हैं। क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है।