
रांची। राज्य में मानवाधिकार से संबंधित मामलों की जांच में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले लंबित क्यों हैं, इसका कारण समझकर उसे निष्पादित करें। राज्य सरकार ने इसे प्राथमिकता के आधार पर रखा है। इसकी नियमित मॉनीट¨रग होगी और त्वरित कार्रवाई भी। यह निर्णय मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया है, जिससे सभी जिलों के एसपी-डीसी को अवगत करा दिया गया है।
मुख्य सचिव ने इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि जिलों से 24 अगस्त तक मानवाधिकार के लंबित मामलों पर रिपोर्ट देने को कहा गया था, लेकिन अधिकतर जिलों ने रिपोर्ट नहीं दी है। गौरतलब है कि मानवाधिकार के मामलों पर गृह विभाग ने सभी जिलों के डीसी-एसपी को रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें अपडेट जानकारी मांगी गई थी। विभागीय सूचना के अनुसार राज्य में मानवाधिकार से संबंधित ऐसे 61 मामले हैं, जो किसी न किसी कारण से अब तक निष्पादित नहीं किए जा सके हैं।
इन मामलों को समीक्षा बैठक में रखा गया सामने
– चाईबासा में पुलिस की गोली से हुई मृत्यु के बाद की अद्यतन रिपोर्ट व मुआवजा राशि के भुगतान की स्थिति।
– कोडरमा में पुलिस की गोली से हुई मनोज शर्मा की मृत्यु के बाद की अपडेट रिपोर्ट।
– हजारीबाग में पुलिस की गोलीबारी में हुई केशर महतो की मृत्यु।
– चाईबासा में मध्याह्न भोजन में छिपकली गिरने के कारण विषाक्त भोजन से बीमार 14 लड़कियों के मुआवजा का मामला।
– कोडरमा में मध्याह्न भोजन बनाने के क्रम में बच्चों के झुलसने का मामला।
– सरायकेला में चार लड़कियों को मजदूरी दिलाने के नाम पर बाहर ले जाने का मामला।
– लातेहार में पुलिस की गोली से मूक-बधिर की मौत का मामला।
– मेसा पहाड़िया नामक व्यक्ति की भूख से मौत का मामला।
– सिविल सर्जन रामगढ़ के माध्यम से विकलांगता प्रमाण पत्र निर्गत नहीं करने का मामला।
– लातेहार में नाबालिग बच्ची से पूछताछ के नाम पर मानसिक रूप से प्रताड़ना का मामला।
– गुमला के बाल रिमांड होम में 10 वर्षीय बंदी की हत्या के संबंध में।
– देवघर में पुलिस अधिकारी के हाथों प्रताड़ित करने का मामला।