
पटना। रेलवे भी अब कारपोरेट लुक में काम करने लगी है। जिस तरह शिप में सारे मामलों में एक ही अधिकारी को जवाबदेह बनाया जाता है, उसी तर्ज पर रेलवे में भी सारे कार्यों के लिए एक ही अधिकारी को जवाबदेह बनाने की कोशिश की गई है।
पहले रनिंग ट्रेनों में ट्रेन अधीक्षक को केवल टिकट और बर्थ की ही जवाबदेही उठानी पड़ती थी। परंतु अब ट्रेन अधीक्षक को रनिंग ट्रेन की पूरी जबावदेही दे दी गई है। इसके लिए ट्रेन अधीक्षक के पद को अपग्रेड करते हुए अब ट्रेन कैप्टन की उपाधि दी गई है। अब ट्रेन अधीक्षक को कैप्टन कहा जाएगा। पूर्व मध्य रेल में भी इस तरह की व्यवस्था शुरू कर दी गई है।
दानापुर मंडल के राजेन्द्र नगर टर्मिनल से खुलने वाली 12309 राजधानी एक्सप्रेस, 12393 संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, 12351 राजेन्द्र हावड़ा एक्सप्रेस में, पटना जंक्शन से मुंबई के लिए चलने वाली सुविधा एक्सप्रेस, हावड़ा जनशताब्दी एक्सप्रेस, रांची जनशताब्दी एक्सप्रेस के ट्रेन अधीक्षकों को अब कैप्टन कहा जाएगा। कैप्टन को ट्रेन की पूरी जवाबदेही सौंप दी गई है। ट्रेन के सारे कर्मचारियों का प्रभारी भी कैप्टन ही होगा।
क्या-क्या करना होगा कैप्टन को
अबतक ट्रेन अधीक्षक को केवल आरक्षित बर्थ के साथ ही अवैध रूप से ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों की टिकट निरीक्षकों के माध्यम से जांच कराने के लिए जवाबदेह बनाया गया था। अब उन्हें यह काम को तो करना ही होगा यात्रियों की किसी भी समस्या का समाधान भी करना होगा। ट्रेन में अगर सफाई से कोई भी शिकायत हो तो कोई भी यात्री कैप्टन से इसकी शिकायत कर सकते हैं।
एसी कोच का अगर एसी फेल हो जाए अथवा कोच का बिजली कनेक्शन फेल हो जाए तो कोई भी यात्री ट्रेन के कैप्टन से इसकी शिकायत कर सकते हैं। इतना ही नहीं पैंट्रीकार कर्मियों द्वारा ओवर बिलिंग किया गया हो अथवा घटिया भोजन परोसा गया है तो आप इसकी शिकायत सीधे कैप्टन से कर सकते हैं।
ट्रेन में तैनात सभी कर्मचारी होंगे कैप्टन के अधीन
कैप्टन मौके पर ही यात्रियों की समस्याओं का समाधान करेंगे। इतना ही नहीं कोई भी यात्री यात्रा के दौरान बीमार पड़ गया हो अथवा किसी आकस्मिक परेशानियों से घिर गया हो तो वे ट्रेन के कैप्टन से मदद मांग सकते हैं।
कैप्टन नियमानुकूल निर्णय ले सकते हैं। इसके लिए ट्रेन में साथ चल रहे इलेक्ट्रिकल शाखा के कर्मचारी, मेकेनिकल शाखा के कर्मचारी, पैंट्रीकार कर्मी, आपरेटिंग स्टाफ, एसी स्टाफ, ट्रेन के ड्राइवर व गार्ड के साथ ही ट्रेन के तमाम अधिकारियों को ट्रेन के कैप्टन के अधीन रखा गया है। ट्रेन के गार्ड व लोको पायलट को भी ट्रेन के कैप्टन के अधीन कर दिया गया है। किसी तरह की लापरवाही बरतने पर कैप्टन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।