
चंडीगढ़। पंजाब सरकार सीबीआइ को सौंपे गए बेअदबी के तीन मामलों की जांच वापस लेकर पंजाब की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआइटी) से करवाएगी। इनमें बहिबलकलां गोलीकांड, बरगाड़ी व बुर्ज जवाहर सिंह वाला में हुईं बेअदबी की घटनाएं शामिल हैं। पूर्व अकाली-भाजपा सरकार ने इन्हें सीबीआइ को सौंपा था। कैप्टन सरकार इन तीन मामलों सहित अन्य सभी घटनाओं की जांच भी सीबीआइ को न सौंप कर एसआइटी से करवाएगी।
सात घंटे चली बहस में बादल व सुखबीर की गिरफ्तारी की मांग
विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को यह प्रस्ताव पास किया गया। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सदन की मांग पर सहमति जताई। आम आदमी पार्टी ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया। सत्र के अंतिम दिन आयोग की जांच रिपोर्ट पर सात घंटे चली चली बहस से पहले ही शिरोमणि अकाली दल व भाजपा ने वॉकआउट कर दिया। सदन में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल की गिरफ्तारी की मांग भी उठी।
बादलों को बख्शा नहीं जाएगा: कैप्टन
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले ही वादा किया था कि बेअदबी की घटनाओं की जांच कर दोषियों को सजा दी जाएगी। कैप्टन ने कहा कि पंजाब की बर्बादी व दुर्दशा के लिए प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर बादल, हरसिमरत कौर व बिक्रम सिंह मजीठिया जिम्मेदार हैं। उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार सहित तमाम पुराने मामलों को ताजा करवाते हुए कहा कि बादल ने हमेशा सियासी हितों के लिए समाज को बांटा है। वे झूठे हैं। बादलों को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी रिटायर होने वाले दिन आयोग को बयान भी दे गए हैं कि उन्होंने घटना से पहले पूर्व मुख्यमंत्री को जानकारी दे दी थी कि बरगाड़ी का धरना जबरन न उठवाया जाए। बादल ने अभी तक इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। यह संभव नहीं है कि सूबे के हालात इतने नाजुक हों और मुख्यमंत्री सो रहा हो। एसआइटी तय समय सीमा में जांच करेगी और दोषियों पर तत्काल कारवाई की जाएगी।
बादल परिवार व 32 अधिकारी कठघरे में
पूर्व सरकार ने तीन घटनाओं की जांच सीबीआइ को सौंपी थी। इनमें इसमें प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल, पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, पूर्व मुख्य सचिव सर्वेश कौशल सहित 32 पुलिस अधिकारी व मुलाजिम कठघरे में हैं।