रणजीत आयोग की रिपोर्ट में पूर्व सीएम, पूर्व डीजीपी निशाने पर, 24 पुलिसकर्मी दोषी करार

चंडीगढ़। राज्य के विभिन्न हिस्सों में हुई धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी की 222 घटनाओं व बहिबलकलां गोलीकांड की जांच के गठित जस्टिस रणजीत सिंह की आयोग की रिपोर्ट में पूर्व मुख्‍यमंत्रर प्रकाश सिंह बादल अौर पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी पर खास निशाना साधा गया है। इस साेमवार को पंजाब विधानसभा में पेश किया गया। वर्ष 2015-16 में हुई इन घटनाओं की जांच के लिए कैप्टन सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह के नेतृत्व में आयोग का गठन किया था। रिपोर्ट पर विधानसभा में आज चर्चा होगी। रणजीत आयोग की रिपोर्ट में पूर्व सीएम, पूर्व डीजीपी निशाने पर, 24 पुलिसकर्मी दोषी करार

आयोग ने गोलकांड की घटना के लिए पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, मुख्यमंत्री कार्यालय और 32 पुलिस अधिकारियों को जिम्मेवार ठहराया है। आयोग ने पूर्व मुख्य सचिव सर्वेश कौशल की भी लापरवाही उजागर की है। आयोग ने बेअदबी की 222 घटनाओं में से 162 की जांच मौके पर जाकर करने के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी है।

फाइनल रिपोर्ट के साथ पेश की गई सप्लीमेंटरी रिपोर्ट में आयोग ने बहिबलकलां में बेअदबी के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग को लेकर कहा है कि पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी व पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और मुख्यमंत्री कार्यालय को मामले की सारी जानकारी थी। डीजीपी, कोटकपूरा के विधायक रहे मनतार सिंह बराड़, मुख्यमंत्री के विशेष प्रमुख सचिव गगनदीप सिंह बराड़ लगातार संपर्क में थे।

रिपोर्ट में मुख्यमंत्री आवास से किए गए फोन की भी जानकारी दी गई है। देर रात तक यह सभी एक दूसरे के साथ संपर्क में रहकर लगातार घटना के बारे में जानकारी दे रहे थे। डीजीपी सैनी के फोन पर 22 बार बातचीत की गई। आयोग ने बेअदबी की घटनाओं को लेकर पुलिस की लापरवाही व रूटीन में की गई कार्रवाई बताया है। कहा है कि पुलिस ने ज्यादातर मामलों की जांच रूटीन में की है।

इन पुलिस अफसरों को बताया जिम्मेदार

आयोग ने पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, पूर्व एसएसपी मोगा चरणजीत सिंह शर्मा, पूर्व डीआइजी फिरोजपुर अमर सिंह चाहल, पूर्व एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर रोहित चौधरी, पूर्व एसएसपी मानसा रघुबीर सिंह, पूर्व एसएसपी फिरोजपुर हरदयाल सिंह मान, पूर्व एसएसपी एसएस मान, एमएस छीना, एसआइटी प्रमुख इकबाल प्रीत सिंह सहोता, पूर्व आइजी बठिंडा जेके जैन, पूर्व पुलिस कमिश्नर परमराज सिंह उमरानंगल, पूर्व डीएसपी कोटकपूरा बलजीत सिंह सिद्धू, पूर्व डीएसपी जगदीश बिश्नोई, पूर्व एसपी बिक्रमजीत सिंह व इंपेक्टर प्रदीप सिंह को कठघरे में खड़ा किया है।

इनके अलावा कांस्टेबल शमशेर सिंह, कांस्टेबल हरप्रीत सिंह, कांस्टेबल गुरप्रीत सिंह, परमिंदर सिंह, इंस्पेक्टर हरपाल सिंह, एसआइ अमरजीत सिंह, एएसआइ जसवीर सिंह, एएसआइ दलजीत सिंह, एएसआइ परविंदर सिंह, इंस्पेक्टर मनजीत सिंह, एसआइ गुरपाल सिंह, एसएचओ गुरपिंदर सिंह, इंस्पेक्टर जीएस भुल्लर, एएसआइ परविंदर सिंह की भूमिका की जांच और गहराई से करने की सिफारिश की है। इन सभी को कारण बताओ बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। इसके अलावा चरणजीत सिंह शर्मा, बिक्रमजीत सिंह व प्रदीप सिंह और अमरजीत सिंह के नाम बतौर आरोपी पुलिस ने बहिबलकलां पुलिस फायरिंग कांड की एफआइआर में दर्ज करवा दिए हैं।

सुखबीर व डीजीपी ने जबरन धरना उठाने का फैसला किया

रिपोर्ट में गवाहों के बयानों व साक्ष्यों के आधार पर कहा गया है कि बहिबलकलां में चल रहा धरना पूर्व डीजीपी सैनी व पूर्व डिप्टी सीएम एवं गृह मंत्री सुखबीर सिंह बादल के इशारे पर जबरन उठाया गया। मौके पर सिख प्रचारक भाई पंथ प्रीत सिंह को जबरन धरने से घसीटने के बाद हुई फायरिंग की जानकारी सुखबीर बादल को भी थी। डीजीपी पूर्व एसएसपी एसएस मान को निर्देश दिए थे।