
मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डीबी भोसले व जस्टिस यशवंत वर्मा की खण्डपीठ ने याचिका खारिज कर दी। इस जमीन पर मायावती का विशाल भवन बना हुआ है। जो कि पहले मायावती व उनके पिता प्रभुदयाल के नाम पर था और बाद में दान रजिस्ट्री कर इसे मायावती के भाई आनंद कुमार व अन्य लोगों के नाम किया गया था।
हालाांकि, इसी मामले में हाईकोर्ट ने 2017 में मायावती, उनके पिता प्रभुदयाल व भाई आनंद कुमार को नोटिस जारी किया था। तीनों पर ही बादलपुर की खेती की जमीन को आबादी की जमीन घोषित करवाकर करोड़ों के घोटाले का आरोप है। याचिका में इसी की सीबीआई जांच की मांग की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि बसपा सुप्रीमो ने सत्ता का दुरुपयोग कर जमीन का आवंटन करवाया और 2002 से 2005 के बीच छह किसानों से जमीन खरीदी फिर जमीन पर बिना किसी निर्माण के धारा-143 (आबादी) घोषित करवा दिया।