
अज़ादारी के जुलूसों को खुलवाने में अटल बिहारी वाजपेयी का कोई किरदार नही डॉ. कल्बे सिबतैन नूरी
अटल जी इस मुल्क के प्रधान मंत्री रहे हैं इस लिए हम सब उनकी इज़्ज़त करते हैं लेकिन कुछ भाजपा के शिया वर्कर (चमचे) यह कह रहे हैं कि अज़ादारी
खुलवाने में अटल बिहारी बाजपेयी का हाथ था यह बात बिल्कुल ग़लत है।
ऐसे लोग सिर्फ अपने नम्बर बढ़ाने और बी जे पी के नेताओं की नज़र में ख़ुद की नेतागीरी चमकाने के लिए कहानियां गढ़ रहे हैं
कल्बे सिबतैन नूरी ने एक वाक़ये का ज़िक्र करते हुए कहा की लखनऊ के
शिया उलमा ने यह तय किया कि अज़ादारी के जुलूस जो सालों से बंद हैं इनकी बहाली के लिए अटल जी से बात की जाए चुनांचे शिया उलमा का एक डेलिगेशन जिसमें हकीमे उम्मत मौलाना सय्यद कल्बे सादिक़ साहब और मरहूम मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अतहर साहब के साथ कई और उलमा भी शामिल थे वक़्त लेकर अटल जी के घर दिल्ली गए। जब अटल जी इन शिया उलमा से मिलने कमरे में आये तो उनका रवैय्या बहुत ख़राब था और आते ही उन्होंने कहा कि आपके धार्मिक जुलूस उसी समय खुल सकते हैं जब सुन्नी समुदाय का धार्मिक जुलूस भी निकले। अगर आप चाहते हैं कि सिर्फ़ आपके धार्मिक जुलूसों पर से प्रतिबंध हट जाए और सुन्नी समुदाय का जुलूस बंद रहे तो यह नहीं होगा। हम आप लोगों के लिए दूसरे समुदाय को नाराज़ नहीं करेंगे। इतना कह कर अटल जी चले गए।
शिया डेलिगेशन से बैठने तक को नहीं कहा खड़े खड़े बात की और चले गए। यह थे हमारे अटल जी।
अटल जी के इस रवैय्ये से शिया उलमा के डेलिगेशन को बहुत तकलीफ़ हुई और डा.कल्बे सादिक़ साहब जिनको ग़ुस्सा बहुत कम आता है, उनकी नाराज़गी देखने वाली थी। इसके कुछ महीनों बाद अटल जी का एक दूत कल्बे सादिक़ साहब के पास आया कि अटल जी आपसे कुछ मुद्दों पर बात करना चाहते हैं। अगर आप राज़ी हों तो मीटिंग तय हो जाए। डा.साहब ने उनके दूत से साफ़ कह दिया की पहले अटल जी उस रवैय्ये के लिए हम लोगों से माफ़ी मांगें जो उन्होंने हम लोगों के साथ किया था उसके बाद ही आगे बात होगी। वह दूत नाराज़ हो कर चले गए और एक प्रेस कांफ्रेंस करके उसमें कल्बे सादिक़ साहब को बुरा भला कहा।
काफ़ी साल तक यही हालात रहे फिर लखनऊ में ईद मिलन समारोह में लखनऊ के एक बुज़ुर्ग बी जे पी के नेता जो अटल जी के काफ़ी करीब थे मौलाना कल्बे सादिक़ साहब को न्योता देने आये तो कल्बे सादिक़ साहब ने उस ईद मिलन समारोह में शिरकत करने से इन्कार कर दिया फिर उन बुज़ुर्ग नेता ने फ़ोन पर डा. कल्बे सादिक़ साहब से अटल जी की बात कराई और उन्होंने खेद व्यक्त किया तब जा कर कल्बे सादिक़ साहब ईद मिलन समारोह में शरीक हुए। कल्बे सिबतैन ने बताया इन सब बातों को मैंने बहुत क़रीब से देखा और सुना है इस लिए मै अवाम के सामने यह सच्चाई लाना चाहता हूँ कि कुछ लोग जो यह अफ़वाह उड़ा रहे हैं कि अटल जी ने अज़ादारी के जुलूसों पर से पाबन्दी हटवाई वो बिल्कुल गलत है।
डॉ.नूरी ने कहा कि हर नेता चाहे वह किसी भी पार्टी से हो सिर्फ़ नेता होता है और उसकी नज़र सिर्फ़ वोटों पर होती है। न वह किसी का मुख़लिस होता है न हमदर्द। नेता सिर्फ़ नेता होता है।
लाल बहादुर शास्त्री की तरह ईमानदार नेता कभी कभी ही पैदा होते हैं।