
देहरादून: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सरकार के बीच आयोजित समन्वय बैठक में एक स्वर में उत्तराखंड सीमा पर चीन द्वारा बार-बार किए जा रहे अतिक्रमण की चुनौती का मिलकर जवाब देन का आह्वान किया गया। निर्णय लिया गया कि प्रदेश में जनजागरूकता अभियान चलाकर राष्ट्र विरोधियों को मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मिलकर प्रदेश को नशा मुक्त बनाने का आह्वान किया। इस दौरान संघ से जुड़े 29 संगठनों ने वर्ष भर चलाई गई गतिविधियों का ब्योरा भी प्रस्तुत किया। चार चरणों में चली इस बैठक में देर शाम तक विभिन्न विषयों पर मंथन किया गया। बैठक में केरल में आई आपदा के लिए तन, मन व धन से सहयोग का भी आह्वान किया गया।
गुरुवार को राजपुर रोड स्थित एक आश्रम में आयोजित प्रांतीय समन्वय बैठक में क्षेत्र प्रचारक (पश्चिम उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड) आलोक ने कहा कि आपसी समन्वय व संवाद के साथ ही विचार को मजबूत कर भारत को हर प्रकार से सक्षम बनाया जा सकता है। बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने युवाओं में तेजी से बढ़ते नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए प्रदेश को नशा मुक्त बनाने का सहयोग करने का आह्वान किया।
बैठक में सक्षम संगठन द्वारा वर्ष 2018-19 के लिए 1000 नेत्रदान का संकल्प लिया गया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बताया कि प्राइमरी शिक्षा से लेकर महाविद्यालयों तक इकाई स्थापित की जाएगी और इन इकाइयों में गुरुवंदन कार्यक्रम करवाए जाएंगे। बताया गया कि उत्तरांचल उत्थान परिषद प्रदेश में अपने केंद्र स्थापित करेगी। प्रवासी पंचायत ने उत्तराखंड से बाहर रहने वाले प्रदेशवासियों से एक बार अपने गांव लौटने और हिमालय दिवस मनाने का भी आग्रह किया।
उत्तरांचल दैवीय आपदा पीड़ित सहायता समिति ने प्रदेश में बनाए गए छात्रावास, शिशु मंदिर, विद्या मंदिर व विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों के संबंध में जानकारी दी। वनवासी कल्याण आश्रम, संस्कृत भारती, भारतीय किसान संघ, क्रीड़ा भारती, देवभूमि विचार मंच, विश्व आयुर्वेद परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, विश्व हिंदू परिषद व बजरंग दल ने भी संस्था द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी दी। इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन क्षेत्र संघचालक सूर्यप्रकाश टांक, प्रांत संघचालक सरदार गजेंद्र सिंह व क्षेत्र प्रचारक आलोक ने किया। कार्यक्रम में सरकार के सभी मंत्रियों के साथ ही प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल के अलावा सभी संगठनों के पदाधिकारी मौजूद थे।
बेहतर कार्य करेंगे, तभी लंबा चल पाएंगे
यदि लंबा चलना है तो सरकार और संगठन को बेहतर बेहतर कार्य करके दिखाना होगा। उत्तराखंड की जनता की जो अपेक्षाएं हैं, उन पर खरा उतरने के लिए सरकार को गंभीरता से कदम उठाने होंगे। यह याद रखना होगा कि सत्ता मिली है तो जनता की बदौलत। बेहतर कार्य होंगे तो वह सिर आंखों पर बिठाए रखेगी और यदि उसकी अनदेखी हुई तो जमीन दिखाने में भी नहीं चूकेगी। भाजपा संगठन, सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की समन्वय बैठक में यह सुझाव सरकार व संगठन को दिया गया।
गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ भाजपा संगठन और सरकार की समन्वय बैठक में सरकार के कामकाज की समीक्षा के साथ ही तमाम सम सामयिक विषयों पर गहन मंथन हुआ। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट के अलावा डॉ. हरक सिंह रावत को छोड़कर सभी मंत्री मौजूद रहे। डॉ. रावत हैदराबाद में उत्तराखंड इन्वेस्टर समिट में शिरकत के लिए हैदराबाद में हैं।
सूत्रों के मुताबिक सरकार के कामकाज की समीक्षा के दौरान कहा गया कि भाजपा सरकार को अभी डेढ़ साल का ही वक्त हुआ है। लिहाजा, सरकार व संगठन को आमजन को केंद्र में रखकर ऐसी नीतियां अख्तियार करनी होंगी, जिससे लोगों की दिक्कतों का तुरंत समाधान हो। साथ ही योजनाओं और खासकर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दीर्घकाल तक जनता को मिल सके। विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकें लगाने के सरकार के फैसले को उचित ठहराया गया, लेकिन कई जगह पुस्तकें न मिलने की शिकायतों पर नाराजगी जताई गई। कहा गया कि पुस्तकों को लेकर कोई कठिनाई न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। यह बात भी उठी कि कुछ विद्यालयों को न्यून छात्र संख्या के मद्देनजर एनजीओ अथवा दूसरी संस्थाओं को देने की बात आ रही है। इस पर सरकार से कहा गया कि वह इन मामलों में व्यापक छात्रहित में फैसला ले।
सूत्रों ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के संबंध में भी बैठक में बात आई। सुझाव आया कि महिला एवं बाल विकास में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका है। लिहाजा, उनका मानदेय बढ़ना चाहिए। इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं पर भी ध्यान देने का सरकार को सुझाव दिया गया। हाल में सरकार के कुछेक मंत्रियों के मध्य तनातनी और विधायकों के असंयमित व्यवहार का मसला भी बैठक में उठा। सूत्रों के अनुसार इस सिलसिले में सभी मंत्री, विधायकों के साथ ही दायित्वधारियों और पार्टी पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं से कहा गया कि वे अपने व्यवहार को संयमित रखें। अपनी वाणी को मधुर रखें। धैर्यपूर्वक जनता की समस्याओं को सुनें और इनका निराकरण भी कराएं।
समन्वय बैठक में प्रदेश में बीते दिनों आई आपदा और इसके बाद किए गए राहत कार्यों के साथ ही सड़क दुर्घटनाओं व राज्य में घटित आपराधिक घटनाओं, विशेषकर महिलाओं के साथ अपराधों का मसला भी उठा। कहा गया कि आपदा व सड़क दुर्घटनाओं पर सरकार ने पीडि़तों को राहत देने के साथ ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया है। इस कार्य के बाद अब सब भुला दिया गया है। सरकार को व्यवस्थाओं का फिर से जायजा लेने की जरूरत है। बैठक में बाहरी लोगों की प्रदेश में तेजी से बढ़ती आमद और इससे आंतरिक सुरक्षा को मिल रही चुनौती पर भी चिंता जताई गई। बैठक में सरकार की ओर से सभी मंत्रियों ने जनहित को चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी साझा की और सभी से इन्हें जन-जन तक पहुंचाने का अनुरोध किया गया।