
एंकर –सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जिस समाजवादी पेंशन योजना का अब भी गुणगान करते नहीं थकते, उसमें घोटाला ही घोटाला है। योगी सरकार की जांच में करीब सात हजार ऐसे अपात्र मिले हैं जिनके पास कार, बाइक व भट्ठे तक हैं। इन पर हर महीने करीब 35 लाख रुपये लुटाए जा रहे थे। समाज कल्याण विभाग ने जांच रिपोर्ट के साथ अपात्रों की सूची शासन को भेजी है। इनसे रिकवरी भी हो सकती है।

वीओ –अखिलेश यादव ने सत्ता संभालते ही गरीबों के लिए समाजवादी पेंशन शुरू की थी। हर महीने 500 रुपये तय थे। हर साल 50 रुपये की बढ़ोत्तरी अलग। पर, मुफ्त का माल लूटने के लिए पात्रता की शर्ते हवा में उड़ा दी गईं। इसे लेकर पात्रों ने शिकायतें कीं, लेकिन सत्ता की हनक में इनकी कौन सुनता। जिले में 56 हजार की पेंशन बंध गई। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुर्सी संभालते ही पेंशन रोकी और फर्जीवाड़े पर जांच बैठा दी। डीएम के नेतृत्व में समाज कल्याण विभाग ने सत्यापन शुरू हुआ तो गजब की सच्चाई सामने आई। करीब सात हजार अपात्रों को लेखपाल, ग्राम पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी आदि ने लाभ उठाने वालों का घर-घर जाकर सत्यापन किया। करीब सवा साल लगे। पता लगा कि भट्ठा मालिक, पक्का मकान, बाइक व कार रखने वाले भी पेंशन उड़ा रहे थे। इन सात हजार अपात्रों को प्रतिमाह 35 लाख मिल रहे थे। यानी सालाना साढ़े चार करोड़। डीएम के अनुमोदन के बाद समाज कल्याण विभाग ने सभी अपात्रों की रिपोर्ट शासन को भेज दी है। जिसमें अपात्रों से रिकवरी भी की जा सकती है। पहले कई मामलों में इसके आदेश हो चुके हैं।
बाइट –नगेंद्र पाल सिंह (जिला समाज कल्याण अधिकारी, अलीगढ़)