
बलरामपुर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 1957 में अटल गोंडा से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन से बलरामपुर आ रहे थे। ट्रेन रास्ते में कौवापुर स्टेशन पर रुक गई। वह सो रहे थे। भोर के समय कांव-कांव की आवाज सुन उनकी नींद टूट गई। उन्होंने साथ बैठे मुसाफिरों से पूछा कौन सा स्टेशन है। जवाब मिला कौवापुर। यह सुन अटल जी मुस्करा कर बोले कि तभी कौवे कांव-कांव कर रहे हैं। इसके बाद वह अपने भाषण में कभी कौवापुर का जिक्र करना नहीं भूलते थे। उन्होंने कौवापुर स्टेशन पर कौवों के कांव-कांव की बात संसद में भी सुनाई थी।
दरअसल, रात के समय बलरामपुर पहुंचे। ट्रेन कौवापुर स्टेशन पर खड़ी हुई। वह सो चुके थे। भोर में कौवों की कांव-कांव के बाद उनकी नींद टूटी। स्टेशन पर जनसंघ के कार्यकर्ता उन्हें लाने के लिए पहुंचे। कार्यकर्ताओं से मिलते ही वह हंसने लगे। कहा कि यहां कौवों की वजह से उनकी नींद खुल गई। अन्यथा वह गोरखपुर पहुंच जाते इससे पूर्व वह बलरामपुर कभी नहीं आए थे। चुनाव के दौरान उनके सहयोगी रहे मदन मोहन शर्मा के पुत्र संजय शर्मा का कहना है कि उनके पिता आए दिन अटल बिहारी बाजपेयी के चुनाव व उनके साथ बिताये अनुभवों को परिवार में साझा करते थे।
धक्का देकर आगे बढ़ाते थे चुनावी प्रचार जीप
बलरामपुर के बरदौलिया बाजार से हरैया में 1957 में अटल जी को चुनावी सभा करनी थी। अटल जी अपने सहयोगियों के साथ जीप से जा रहे थे। रास्ते में किसान की बैलगाड़ी फंसी देखी। किसान प्रयास के बाद भी बैलगाड़ी कीचड़ से नहीं निकाल पाया। तभी अटल जी अपने सहयोगियों के साथ पहुंच गए। अटल जी ने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस की बैलगाड़ी फंसी हुई है, अब जनसंघ को इसे धक्का लगाकर किनारे लगाना होगा।
वह स्वयं साथियों के संग नीचे उतरे। बैलगाड़ी को बाहर निकलवाया। चुनाव प्रचार के लिए पार्टी से उन्हें एक जीप मिली थी। जीप भी ऐसी थी की जो दो किलो मीटर पर ही बंद हो जाती थी। इसी जीप से अटल जी अपने साथी मदनमोहन शर्मा व अन्य के साथ बलरामपुर विधान सभा के 71 क्षेत्र में गए। रास्ता खेतों से होकर था। रास्ते में जीप फंस गई। अटल जी जीप से नीचे उतरे और धक्का लगाया।
याद ताजा करने के लिए संजोए रखा है ‘घर’
अटल बिहारी बाजपेयी ने ठिकाना सदर विकास खंड के खगईजोत में बनाया था। वह अपने सहयोगी लाटबक्श सिंह के आवास में रहते थे। वहां वह नित्य भोर में उठने के बाद टहलने के लिए निकलते थे। उनके सहयोगी लाटबक्श सिंह साथ होते थे। गांव वालों से उनकी समस्याएं सुनते थे। जनसंघ का कार्यालय सराय फाटक में बना था। जो सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं माना जाता था। उन्होंने खगईजोत में उनके आवास को ठिकाना बनाया था। उसी के एक कमरे को उन्होंने कार्यालय भी बना रखा था। दूसरे में वह रात्रि विश्राम करते थे।
भवन के पीछे हैंडपंप से पानी पीते थे, जो आज भी उनकी यादों को ताजा कर रहा है। जिस कमरे में रहते थे, उसे पूरी तरह से संरक्षित कर रखा गया है। जहां नहाते थे वह नल आज भी वैसे ही लगा है। उनके सहयोगी लाटबक्श सिंह के अनुसार गैंसड़ी क्षेत्र के पडरौना गांव में उनका फार्म हाउस है। वहां भी वह रात्रि विश्राम करते थे। जहां मुगदर व मूसल से व्यायाम कर दिन की शुरुआत करते थे। अटल जी को काला नमक चावल अत्यधिक प्रिय था। वह कहते थे कि इससे अच्छी नींद आती है। चुनाव प्रचार के दौरान गैंसड़ी के ङ्क्षसहमोहानी गांव में रामसमुझ के यहां दोपहर में खाने के लिए व्यवस्था की गई थी। खाने में काला नमक चावल भी था जिसे बड़े चाव से खाया। इसके बाद उन्हें नींद आ गई। जब उनसे मिलने लोग दिल्ली जाते थे तो काला नमक चावल ले जाना नहीं भूलते थे।