पाकिस्तानी परेड में हिन्दुस्तानी गाना गाने पर ट्रोल हुए आतिफ असलम, कहा…

कराची: पाकिस्तानी गायक आतिफ असलम ने वैसे तो बहुत से बॉलीवुड गानों को अपनी आवाज दी है, पर लगता है कि इस बार हिन्दुस्तानी गाने को गाना उन्हें महंगा पड़ गया. दरअसल आतिफ इस महीने की शुरुआत में न्यूयॉर्क में आयोजित पाकिस्तानी स्वतन्त्रता दिवस के जश्न में परफॉर्म कर रहे थे और उन्होंने बॉलीवुड फिल्म अजब प्रेम की गजब कहानी का ‘तेरा होने लगा हूं’ गा दिया. फिर क्या था पाकिस्तान के आजादी के जश्न में हिन्दुस्तानी गीत गाना कई लोगों को नागवार गुजरा.

कुछ इस तरह हुए ट्रोल

हिन्दुस्तानी गीत गाने के लिए सोशल मीडिया पर आतिफ जम कर ट्रोल हुए. बहुत से पाकिस्तानियों ने तो उनकी देशभक्ति पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिए. उन्हें देश के खिलाफ गीत गाने वाला कहकर ट्रोल किया जाने लगा. सारे ट्रोल के बीच @आसिफअफरोज1 हैंडल यूजर ने लिखा कि न्यूयॉर्क में गाना गाने के बाद आतिफ असलम ने आजादी की परेड के दौरान अपने हाथ में पाकिस्तानी झंडा लेने से इनकार कर दिया. इस पर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उन्हें देश छोड़ने और कभी गाना न गाने की सलाह तक दे डाली, तो कुछ उनका बायकाट करने की बात कहने लगे.

आतिफ ने दी सोशल मीडिया पर सफाई

आतिफ असलम ने भी आखिरकार पूरे मामले पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी राय रखी. उन्होंने अपने फेसबुक और इन्स्टाग्राम पेज पर एक लम्बे सन्देश में कहा कि, ‘सब्ज झन्डा मेरी पहचान है और मेरे प्रशंसक जानते हैं कि मैं इसका एहतराम करना अच्छी तरह जानता हूं. मुझे बहुत खुशी और फक्र है कि मेरे प्रशंसक फेक प्रोपोगेंडा का जवाब देना अच्छी तरह जानते हैं…मुझे उम्मीद है कि नए पाकिस्तान में उन सब लोगों को इज्जत देना जान जाएगें जिन्होंने पाकिस्तान का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है.

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कई कलाकार उतरे समर्थन में

पूरे विवाद के बीच कई कलाकारों ने आतिफ का साथ दिया. गायक शफकत अमानत अली, जिन्होंने कई हिन्दुस्तानी गानों को अपनी आवाज दी है, आतिफ का पक्ष लेते हुए कहा कि, ‘मैं परेड में अपना गाया हुआ गाना गाने के लिए आतिफ का साथ देता हूं. संगीत भारतीय या पाकिस्तानी नहीं होता. बस संगीत होता है. गायकों को उनके गानों से जाना जाता है, जिन्हें हर मुल्क के लोग बराबर पसन्द करते हैं.’

फिल्म समीक्षक ओमैर अल्वी ने भी आतिफ का साथ देते हुए कहा कि, लोगों को ये याद रखने की जरूरत है कि बॉलीवुड फ़िल्में और शो पाकिस्तानी सिनेमाघरों में दिखाए जाते हैं. फिल्म, कला और संगीत की कोई सीमा नहीं होती. उन्होंने आगे सवाल किया कि ‘क्या पाकिस्तानी भारतीय फ़िल्में देखने नहीं जाते हैं? क्या भारतीय शो पाकिस्तानी चैनलों पर नहीं दिखाए जाते हैं?’