दरगाह अहमद बुखारी का 432वां सालाना उर्स 27, 28 फरवरी व एक मार्च को मनाया जाएगा, जानिए पूरा इतिहास

आगरा: ताजमहल के पूर्वी गेट के पास स्थित दरगाह हजरत अहमद बुखारी रह. अलैह के 432वें सालाना उर्स का आगाज हो गया हैं। तीन दिवसीय उर्स का आयोजन 27, 28 फरवरी व एक मार्च को किया जाना हैं। उर्स को लेकर दरगाह कमेटी की लगभग पूरी तैयारी हो चुकी हैं। दरगाह के गद्दीनशीन निजामुद्दीन शाह ने बताया कि रिवायत के अनुसार एवं कोविड 19 के नियमों का पालन करते हुए 27 फरवरी को मीलाद शरीफ की रस्म, 28 फरवरी को संदल व महफ़िल व एक मार्च को कुल शरीफ व चादरपोशी की रस्म अदा की जाएगी। उर्स के दौरान मुल्क में अमन चैन एकता व भाईचारे और कोरोना महामारी से आजादी की दुआ की जाएगी।

ये हैं इतिहास

दरगाह कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुईन बाबूजी के मुताबिक ताजमहल के निर्माण के समय जब मुगल बादशाह शाहजहां इमारत की नींव रखवा रहे थे तब उस जगह भूत-जिन्न रात में नींव को ध्वस्त कर देते थे। शाहजहां ने इमामो के मशवरे के बाद अरब स्थित बुखारा शहर के पीर हजरत अहमद बुखारी को बुलाने का सुझाव माना। बादशाह के बुलावे पर पीर अपने साथ भाई सैय्यद जलाल बुखारी शाह, सैय्यद अमजद बुखारी शाह और सैय्यद लाल बुखारी शाह और सैकड़ों सहायकों के साथ आगरा आये। चारो पीर बंधुओ ने ताजमहल की नींव परिसर पर पहुँचकर कुरान और कलमों का पाठ किया। इसके बाद बादशाह शाहजहां ने इमारत की नींव रखवाकर ताजमहल का निर्माण कार्य शुरू करवाया। इसके बाद 22 साल बाद ताजमहल बनकर तैयार हुआ।

यहां स्थित हैं दरगाहे

हजरत अहमद बुखारी की दरगाह पूर्वी गेट के पास बनी हैं। जलाल बुखारी की पश्चिमी, लाल बुखारी की थाना ताजगंज व लाल शाह बुखारी की बिल्लोचपुरा में मजार बनाई गई हैं।