
सनातन धर्म में दान को कल्याणकारी कहा गया है। हिन्दू धर्म में चारों युगों में भिन्न-भिन्न कर्मों की खासियत बताते हुए कहा गया है कि- सतयुग में तप, त्रेता में ज्ञान, द्वापर में यज्ञ एवं कलयुग में एकमात्र दान ही है जो शख्स का कल्याण कर सकता है। इसलिए प्रत्येक शख्स को जीवन में दान अवश्य करते रहना चाहिए। किन्तु दान करने के भी कुछ नियम होते हैं। दान हमेशा श्रद्धापूर्वक एवं विनम्रता के साथ करना चाहिए। साथ-साथ जितना संभव हो, दान को उतना गुप्त रखें। गुप्त दान को उत्तम दान कहा जाता है। दान के पश्चात् मनुष्य को किसी प्रकार की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। इसके अतिरिक्त कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनका दान करने मनुष्य को बचना चाहिए।
इन 6 चीजों का न करें दान:-
इन 6 चीजों का न करें दान:-
- ज्योतिषाचार्य की मानें तो हमें स्टील के बर्तनों का दान नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से जो बर्तन आपके घर में रखे हुए हैं, उनके दान से बचना चाहिए। इससे परिवार की सुख समृद्धि पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
- भोजन, जल को महादान की श्रेणी में रखा जाता है। इसलिए जरूरतमंद तथा निर्धनों को भोजन कराएं तथा अनाज का दान करें। मगर हमेशा ताजा भोजन ही कराना चाहिए। बासा खाना किसी को दान स्वरूप न दें। इसे अशुभ कहा जाता है। जबकि जरूरतमंद को अन्न दान करने तथा ताजा भोजन खिलाने से आपका भाग्य चमकता है।