महाकवि गोपालदास नीरज जीवन के अंतिम पल की कुछ खास बातें

एंकर–महाकवि गोपालदास नीरज जीवन के अंतिम समय में शरीर के दर्द को सहन नहीं कर सके।  इस योग्य नहीं थए कि वह कुछ कर सके, इसलिए शरीर को उन्होंने बोझ मान लिया और उससे मुक्त होना चाहते थे। यह खुलासा गोपालदास नीरज जी द्वारा जिलाधिकारी चंद्रभूषण को लिखे गए पत्र में हुआ है। जिलाधिकारी ने इस पत्र को सार्वजनिक किया है। 

मौत से एक दिन पहले जिलाधिकारी को यह पत्र मिला था   पत्र का विषय था।  हॉलीडेथ इंजेक्शन के संबंध में गोपालदास नीरज ने मांग की थी , वे स्वेच्छा पूर्वक मृत्यु का वरण करने के लिए हेली डेथ इंजेक्शन उपलब्ध करने की मांग की  थी। इस पत्र से कहा जा सकता है कि नीरज जी का अंतिम पड़ाव दर्द से भरा हुआ था, उनकी दीर्घायु अखरने लगी थी, हालांकि यह पत्र एक सप्ताह पहले जिलाधिकारी को लिखा गया था और इस पत्र के बारे में परिवार को कोई सूचना नहीं थी।

 जिलाधिकारी ने पत्र दिखाते हुए कहा की बुढ़ापे में शरीर का दर्द बढ़ गया था, उनके नजदीकी रहे लोगों का कहना है कि उन्हें पूर्वाभास हो गया था, जिसके बाद उन्होंने सभी लोगों से मिलना शुरू कर दिया था, लोगों से कुशलता पूछना शुरु कर दिया था और उनकी देखभाल में लगे लोगों से कहते थे कि उन्हें दवा की ज्यादा डोज दी जाएं, जब उनसे यह कहा जाता था कि यह ठीक नहीं है और अगर कोई तकलीफ है तो डॉक्टर को बताएं, सब ठीक हो जाएगा।  लेकिन वह कहते थे कि मुसाफिर भी लंबे समय के बाद थक जाता है उसे नींद आ जाती है और यह नींद उसे आराम पहुंचाती है।  उन्होंने कहा कि मेरी यात्रा भी बहुत लंबी हो गई है। 

बाइट – चद्र भूषण सिंह, जिलाधिकारी, अलीगढ़