दिल्ली में ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करने की मांग पंहुची हाई कोर्ट, सुनवाई दूसरी पीठ के समक्ष होगी कल

नई दिल्ली, ब्लैक-फंगस को महामारी घोषित करने के संबंध में केंद्र सरकार व अन्य को निर्देश देने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में  मुजीब उर रहमान की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में इसके साथ ही केंद्र व अन्य अधिकारियों को इसके इलाज के लिए दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश देने की भी मांग की। अब मामले में सुनवाई दूसरी पीठ के समक्ष बुधवार को सुनवाई होगी।

वहीं, इससे पहले सोमवार को ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंफोटेरिसिन-बी की किल्लत संबंधी याचिका सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि आपूर्ति के लिए बड़े कदम उठाने की जरूरत है। न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा कि यह मामला ऑक्सीजन संकट से अलग है और अगर आपूर्ति बहुत सीमित है, तो सभी को कटौती करनी होगी। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता कीर्तिमान सिंह और अमित महाजन ने बताया कि मई में आपूर्ति 1.36 लाख शीशियों की थी और जून में 2.55 लाख शीशियों की होगी। इसके अलावा 7.05 लाख शीशियों का आयात किया जा रहा है। इसके अलावा रीयल टाइम डेटा के लिए एक पोर्टल भी स्थापित किया है, जहां राज्यों को ब्लैक फंगस की संख्या को अपडेट करना है।

इस पर पीठ ने केंद्र सरकार को सभी प्रासंगिक विवरणों के साथ एक और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 27 मई तक के लिए स्थगित कर दी। पीठ ने केंद्र से यह पता लगाने को कहा कि मौजूदा पांच फर्मो के अलावा भी कोई लाइसेंसधारी फर्म दवा बना सकती है क्या? इस दौरान दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने पीठ को बताया कि दिल्ली में 21 मई को ब्लैक फंगस के करीब 200 मामले थे, जो सोमवार को बढ़िकर 475 हो गई। मेहरा ने कहा कि समाज में इस बात को लेकर आक्रोश है कि मरीजों को दवा नहीं मिल रही है। दिल्ली को एक लाख डोज की जरूरत है।

इसके जवाब में केंद्र की तरफ से कहा गया कि दिल्ली सरकार की मांग की बहुत अधिक है। इस पर पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार ने एक लाख मांगे होंगे, लेकिन सवाल यह है कि केंद्र सरकार दिल्ली और पूरे भारत की मांग को कैसे पूरा करने की योजना बना रही है। अदालत मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता राज शेखर राव ने कहा कि यह एक बड़ी समस्या है और अगले महीनों में ब्लैक-फंगस के मामले चालीस से पचास हजार होने की आशंका है।