
जमशेदपुर, कोरोना के टीकाकरण में एक नई तरह की परेशानी सामने आ रही है। खासकर, युवाओं (18 से 44 वर्ष) के टीकाकरण में यह भी मांगा जा रहा है कि आप झारखंड में रह रहे हैं, इसका कोई प्रमाण होना चाहिए। इसमें यहां की किसी कंपनी या संस्थान का आईकार्ड मांगा जाता है। यह सबके पास नहीं होता।

जमशेदपुर पूर्वी के विधायक व झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री सरयू राय शनिवार को टेल्को स्थित टीकाकरण केंद्र का निरीक्षण करने गए थे। उन्हें वहां पता चला कि कई युवा इसलिए टीका नहीं ले पा रहे हैं, क्योंकि उनके पास इसका प्रमाण नहीं है कि वे झारखंड में रहते हैं। इनके टीकाकरण में स्थानीय हाेने का प्रमाण बाधक बन रहा था, लेकिन वह समस्या अब दूर हो गई है। विधायक सरयू राय ने मुख्य सचिव व स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव से ट्विटर पर आग्रह किया कि जमशेदपुर में युवाओं के टीकाकरण में एक समस्या आ रही है।
ये विकल्प सुझाए
सरयू ने कहा कि औद्योगिक शहर होने के कारण देश के सभी राज्यों के लोग यहां हैं। ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी उद्योगों में आना-जाना लगा रहता है। उद्योगों में कार्यरत व्यक्ति का तो यहां का होने का प्रमाण होता है, पर उनकी पत्नी, बेटा-बेटी को कठिनाई हो रही है। स्लॉट मिल जाने के बाद भी झारखंड में रहने का प्रमाण नहीं रहने के कारण इनका टीका नहीं हो पा रहा है। यदि ऐसे लोगों को विधायक, सांसद, ज़िला प्रशासन के अधिकृत अधिकारी द्वारा इनके जमशेदपुर में रहने को अभिप्रमाणित करने की स्वीकृति हो जाए तो समस्या का हल निकल सकता है। सरयू ने बताया कि मुख्य सचिव ने बताया कि अब परिवार के किसी भी सदस्य के पास झारखंड में रहने का प्रमाण होगा, तो बेटा-बेटी या पत्नी के लिए भी मान्य होगा। मुख्य सचिव ने सरयू राय को बताया कि इस आशय का निर्देश पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त सूरज कुमार को दे दिया गया है, अब परिवार के किसी एक सदस्य का पहचान पत्र पूरे परिवार के लिए मान्य होगा।
बंगाल-ओडिशा के युवा आकर ले रहे थे टीका
यह समस्या इसलिए पैदा हुई कि शुरू में बंगाल व ओडिशा के युवक यहां आकर टीका ले रहे थे। सीमा से सटे होने के कारण उन्हें यहां सुविधा हो रही थी। स्लॉट बुकिंग में बहरागोड़ा, घाटशिला, पटमदा, बोड़ाम आदि के युवक टीका लेकर चले जा रहे थे। इस मामले की शिकायत जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने उपायुक्त से की थी। इसके बाद उपायुक्त सूरज कुमार ने सभी बीडीओ व स्वास्थ्यकर्मियों को आदेश दिया कि जो भी युवा टीका लेने आएं, उनका आधार कार्ड अवश्य देखें। यदि वे बंगाल या ओडिशा के रहने वाले हैं तो उन्हें टीका नहीं दें। इस नियम के लागू होते ही निजी कंपनियों में काम करने वालों के बेटा-बेटी या पत्नी को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है।