
रांची, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने केंद्र सरकार पर कोरोना वायरस से लड़ाई में जीवन रक्षक दवा उपलब्ध कराने व टीकाकरण में भेदभाव का आरोप लगाया है। कहा है कि एक देश, एक विधान और एक संविधान का नारा तो बुलंद किया जाता है लेकिन जीवन रक्षक दवा उपलब्ध कराने या टीकाकरण में भेदभाव किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने बजट की घोषणा में 35 हजार करोड़ रुपये टीकाकरण पर खर्च करने की घोषणा की थी। इतनी राशि में देश के सभी लोगों का टीकाकरण हो जाता। लेकिन केंद्र सरकार टीके को तीन श्रेणियों में बांटकर राजनीतिक प्रपंच कर रही है।

आपदा में भी राजनीति का अवसर खोजा जा रहा है। मंत्री ने आरोप लगाया कि एक तो धनराशि खर्च करने पर भी टीका उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, वहीं हम केंद्र के कोटे से मिली वैक्सीन से ही 18 से 44 वर्ष के नागरिकों का टीकाकरण करना चाहते हैं तो इसकी भी स्वीकृति नहीं दी जा रही है। राज्य सरकार ने भारत बायोटेक तथा सीरम इंस्टीट्यूट दोनों को 25-25 लाख डोज का ऑर्डर दिया है, लेकिन कंपनियां 15 मई के बाद ही टीका उपलब्ध कराने की बात कह रही है।
उन्होंने कहा कि यदि केंद्र हमें पूर्व में उपलब्ध कराए गए टीके के इस्तेमाल की मंजूरी देती है तो राज्य सरकार भी एक मई से टीकाकरण शुरू कर देगी। कहा, राज्य सरकार भाजपा शासित राज्यों को भी मदद कर रही है। उत्तर प्रदेश को 90 टन तथा हरियाणा को 80 टन ऑक्सीजन राज्य से जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी हमारे साथ भेदभाव हो रहा है। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कोविड की दूसरी लहर में राज्य सरकार को महज 8.40 करोड़ रुपये मिले हैं। रेमडेसिविर उपलब्ध कराने में भी भेदभाव किया जा रहा है।