अहलेबैत की मोहब्बत से मिलेगी दुनियां और आखेरत दोनो में कामयाबी: मौलाना हिलाल अब्बास

  • इन्सान को दुनियां की दौलत व शोहरत की लालच में पड़ कर गुमरही का शिकार नही होना चाहिये , कामयाबी चाहिए तो मारेफत हासिल करो।

बाराबंकी। बुग्ज़, हसद, कीना से खुदको बचाओ। अहलेबैत की मोहब्बत को अपनाओ । हसद नेकियों को ऐसे खा जाती है जैसे आग लकड़ी को खा जाती है । दुनियां की दौलत व शोहरत की लालच में पड़ कर गुमरही का शिकार न हो। कामयाबी चाहिए तो मारेफत हासिल करो। आले मोहम्मद के इश्क में जो मार जाता है वो शहीद होता है । शहीद ज़िन्दा होता है वो अपने परवर दिगार से रिज़्क़ पाया करता है । यह बात मजलिस ए देसा बराये ईसाले सवाब क़ाज़िम हुसैन इब्ने नाज़िम हुसैन को खिताब करते हुये आली जनाब मौलाना हिलाल अब्बास ने मौलाना गुलाम अस्करी हाल में कही। मौलाना ने आगे कहा जिसे तौफीक़े इलाही मिल जाती है उसे सब कुछ मिल जाता है।

अहलेबैत की मोहब्बत अपनाओ , दुनियां और आखेरत दोनो में कामयाबी पाओ। आखिर में मौलाना ने कर्बला वालों के मसायब बयान किये जिसे सुनकर सभी रोने लगे ।मजलिस से पहले मुज़फ्फ़र इमाम ने बेहतरीन कलाम पढ़ा- पूरी यज़ीदियत को मिटाने के वास्ते, कर्बोबला का परदे में एक विरसादार है। हाजी सरवर अली कर्बलाई ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा- मुस्कुरा कर कह रही है हमसे असग़र की हंसी, हश्र तक होता रहेगा तज़केरा बेशीर का। अली गंगोलवी ने नज़रानये अक़ीदत पेश करते हुए पढ़ा- दोज़क में जले तू आतिश से दुनियां मे जले तू मातम से, ऐ मुन्किरे मातम तेरे लिये शमशान बदलते रहते हैं।

आरिज़, मसीहा, कियान अब्बास व अरबाब ने भी नज़रानए अक़ीदत पेश किया। तिलावते कलामे इलाही से मजलिस का आगाज़ हुआ । बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया ।