पंजाब: प्राइवेट बस कंपनियों पर मंडराया तालाबंदी का खतरा, 400 km यात्रा करने के बाद भी खर्च निकालना हुआ कठिन

पिछले लगभग चार महीनों से बंद पड़ी टोल कलेक्शन अगर दोबारा शुरू हुई तो निजी बस कंपनियां तालाबंदी की तरफ चली जाएगी। डीजल की बढ़ी कीमतों, महंगी अड्डा फीस और उसके बाद अब सरकारी बसों में महिला यात्रियों को निशुल्क यात्रा सुविधा देने से आर्थिक संकट से घिरे निजी बस आपरेटर्स का तर्क है कि मौजूदा समय में ही खर्च निकलना मुश्किल हो गया है। अगर टोल कलेक्शन दोबारा शुरू होते ही निजी बस कंपनियों की तालाबंदी शुरू हो जाएगी।

निजी बस कंपनी गगनदीप बस सर्विस के संचालक संदीप शर्मा ने कहा कि इस समय हालात यह हैं कि बस का स्टाफ 400 किलोमीटर बस चलाने के बाद शाम को यह बता रहा है कि डीजल के लिए पैसे कम पड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात तब हैं, जब टोल कलेक्शन बंद है। जब टोल कलेक्शन शुरू हो जाएंगे तो फिर कोई भी बस आपरेटर बसों का संचालन कर पाने में सक्षम नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी बसों में महिलाओं की निशुल्क यात्रा सुविधा शुरू होने के 24 घंटे के भीतर ही निजी बस आपरेटर्स को इसके खतरनाक नतीजे झेलने पड़ रहे हैं। यात्रियों की संख्या में 50 फीसद की गिरावट आ गई है।

मिनी बस बचाओ संघर्ष कमेटी के कन्वीनर जरनैल सिंह गढ़दीवाला ने कहा कि अगर सरकार वाकई में निजी बस आपरेटर्स को बचाना चाहती है तो फिर निजी बस आपरेटर्स से रोड टैक्स की वसूली बंद कर दें और डीजल 20 रुपए प्रति लीटर की दर पर सस्ता उपलब्ध करवाया जाएस,अन्यथा निजी बसों का बंद होना तय हो चुका है। उन्होंने कहा कि समस्या तो यह भी है कि अगर बसें खड़ी हो जाएंगी और निजी बस आपरेटर उन्हें बेचना चाहेंगे तो कोई खरीदार भी नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को फ्री यात्रा सुविधा देने की बजाय सरकार सभी यात्रियों के किराए में 50 फीसद की कटौती कर दे और निजी बस आपरेटर्स को टैक्स माफी के साथ सस्ता डीजल उपलब्ध करवा दें तो फिर काम चल सकता है।