
जदयू नेता और बिहार जनता खान मजदूर संघ के महासचिव छोटन सिंह का निधन हो गया है। उन्होंने रविवार की रात कोलकाता स्थित स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में अंतिम सांस ली। किडनी रोड से ग्रसित होने के कारण इलाज के लिए उन्हें भर्ती कराया गया था। कोलकाता से उनका शव कुमारधुबी रेलवे स्टेशन स्थित आवास पर लाया गया। इसके बाद स्वजन शव को लेकर बिहार के भोजपुर स्थित उनके पैतृक गांव निकल गए। वहां पर अंतिम संस्कार होगा।

जनता मजदूर संघ से अलग होकर बनाई पहचान
छोटन सिंह धनबाद के बहुचर्चित नेताओं में थे। भले ही वह सांसद-विधायक नहीं बने लेकिन अपने राजनीतिक अंदाज के लिए मशहूर थे। उन्होंने जनता मजदूर संघ के संस्थापक झरिया के पूर्व विधायक सूरजदेव सिंह के सानिध्य में राजनीति शुरू की। लेकिन 1990 के विधानसभा चुनाव में जनता दल ने जब छोटन सिंह को निरसा विधानसभा क्षेत्र से टिकट नहीं दिया तो सूरजदेव सिंह से अलग हो गए। जनता दल उम्मीदवार डीएन सिंह के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़े हो गए। तब सिंह का कहना था कि चुनाव में अगर जनता दल उम्मीदवार से एक वोट भी उन्हें ज्यादा मिलता है तो वह अपनी जीत मानेंगे। चुनाव में ऐसा ही हुआ। डीएन सिंह से छोटन सिंह ने ज्यादा वोट हासिल किया। चुनाव में डीएन सिंह और छोटन सिंह दोनों की हार हुई थी।
कुमारधुबी रेलवे स्टेशन पर किया ऐतिहासिक आंदोलन
छोटन सिंह कुमारधुबी इलाके में रेल आंदोलन के लिए याद किए जाएंगे। कुमारधुबी रेलवे स्टेशन पर पहले इक्का-दुक्का एक्सप्रेस ट्रेनें ठहरती थीं। उन्हीं के प्रयास का नतीजा है कि अब कई ट्रेनें रूकती हैं। डोमिसाइल आंदोलन के समय उन्होंने धनबाद और बोकारो जिले को झारखंड से अलग कर पश्चिमहा राज्य बनाने के लिए भी आंदोलन चलाया था। धनबाद को राजधानी और निरसा को उपराजधानी बनाने की मांग की थी।
कुमारधुबी कोलियरी से हुए थे सेवानिवृत्त
सिद्धनाथ सिंह उर्फ छोटन सिंह ईसीएल मुगमा क्षेत्र की कुमारधुबी कोलियरी में लोडिंग बाबू थे। करीब 7 सात साल पहले सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद से किडनी रोग से ग्रसित हो गए थे। उनके निधन पर कुमारधुबी क्षेत्र में शोक की लहर है। जदयू के जिलाध्यक्ष पिंटू सिंह ने शोक प्रकट करते हुए कहा है कि पार्टी को गहरा धक्का लगा है। वह धनबाद जिले में जदयू के एक स्तंभ थे। बिहार जनता खान मजदूर संघ के महासचिव एलडी झा ने कहा है कि वह कोयला मजदूरों की समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा चिंतित रहते थे।