
डायनासोर के जीवाश्मों पर अध्ययन कर वैज्ञानिक नई-नई जानकारियां देते रहते हैं। वैज्ञनिकों को जैसे-जैसे नए जीवाश्म मिल रहे हैं, वैसे ही उनकी नई प्रजातियों और विशेषताओं के बारे में पता चलता जा रहा है। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि दो छोटे डायनासोर में चमगादड़ जैसे पंख थे। लेकिन पंख होने के बावजूद भी ये डायनासोर उड़ान नहीं भर सके थे।
यी और एम्बोप्टेरिक्स दो दो छोटे डायनासोर के चमगादड़ जैसे पंख थे। लेकिन ये डायनासोर आम पक्षियों की तरह उड़ान नहीं भर सकते थे। ये डायनासोर किसी तरह से पेड़ों के बीच ग्लाइड ही कर सकते थे। आईसाइंस जर्नल में प्रकाशित हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि ये डायनासोर पेड़ों पर रहने वाले अन्य डायनासोर और शुरुआती पक्षियों से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं थे। कुछ लाख सालों के बाद डायनासोर की ये प्रजाति विलुप्त हो गई।
माउंड मार्टी यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर और इस शोध अध्ययन के प्रथम लेखक थॉमस डिसेकी ने बताया कि ये दो प्राजतियां हवा में उड़ने के लिए इतनी ज्यादा कमजोर थीं कि एक बार हवा में आने के बाद ही गिर जाते थे। खराब प्रदर्शन के बाद भी डायनासोर की ये प्रजाति कुछ लाख सालों तक तक बची रही, लेकिन उनके सामने ऊपर से नीचे तक शिकारियों की मौजूदगी थी। ऐसे में इनका गायब हो जाना तय था।
बता दें कि यी और एम्बोप्टेरिक्स उत्तर चीन के छोटे जानवर थे, जो करीब 16 करोड़ साल पहले पाए जाते थे। इस प्रजाति के डायनासोर का वजन केवल दो ही पाउंड के बराबर था। ये प्रजाति थेरोपॉड डायनासोर के अनुठे उदाहरण हैं। थेरोपॉड डायनासोर, वह समूह है जिससे पक्षियों का उदय हुआ था। वैसे अधिकांश थेरोपॉड्स जमीन पर रहना पसंद करते थे और मांसाहारी हुआ करते थे, लेकिन यी और एम्बोप्टेरिक्स पेड़ों पर रहना पसंद करते थे और कीड़े, बीज और अन्य पौधे खाते थे।
इन डायनासोर के उड़ने के बारे में पता लगाने के लिए डिसेकी और उनके साथियों ने जीवाश्मों का लेसर सिम्यूलेटेड फ्लोरेसेंस के इस्तेमाल से स्कैन किया। यह तकनीक लेजर प्रकाश का उपयोग नर्म ऊतकों की विस्तृत जानकारी हासिल करने के लिए किया। इसके बाद शोधकर्ताओं ने गणितीय मॉडल का उपयोग कर यह अनुमान लगाया कि ये कैसे उड़ सकते थे?
शोधकर्ताओं ने बताया कि एक बार दबाव में आने पर ये डायनासोर गिर जाते थे। इनके हालात ऐसे थे कि ये ना तो जमीन पर और न ही हवा में अपना वर्चस्व कायम रख पाते थे। शोधकर्ता अब इन डायनासोर की मांसपेशियों का अध्ययन कर इनकी सटीक तस्वीर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।