छत्तीसगढ़: जांजगीर में हर दूसरे दिन सड़क दुर्घटना में औसतन एक व्यक्ति कि हो रही मौत

जिले की सड़कें हर दूसरे दिन लोगों की खून से लाल हो रही है। यातायात पुलिस के तमाम प्रयासों के बाद भी सड़क दुर्घटना पर रोक नहीं लग पा रही है। इसके चलते पिछले 11 माह में 191 लोगों की जान सड़क दुर्घटना में चली गई। नाबालिग व नशे में वाहन चलाने वालों पर नकेल नहीं कसा जा रहा है। सर्वाधिक दुर्घटना भारी वाहनों के फ़र्राटे भरने से हो रही है।

जिले में कृषि के साथ-साथ औद्योगिक विकास भी हो रहा है। औद्योगिकरण के चलते यहां भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने लगी है। साथ ही परिवहन साधनों में इजाफा होने से सड़कों में वाहनों में दबाब भी बढ़ने लगा है। इसमें दो पहिया, ट्रैक्टर, बस, ट्रक व ट्रेलर वाहनों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। सड़कों में वाहनों के दबाव के साथ ही सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ने लगी है। इसके चलते जिले में सड़क हादसों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।

हालांकि बढ़ते सड़क हादसे में कमी लाने के लिए यातायात विभाग व विधिक साक्षरता प्राधिकरण द्वारा नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में कैम्प आयोजित कर वाहन चालकों को जागरूक किया जा रहा है, बावजूद इसके स्थिति जस की तस बनी है। जिले में दिनोंदिन छोटे वाहनों सहित भारी वाहनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके लिए यातायात विभाग द्वारा शहरों के बाहर वाहन चेकिंग की जा रही है। यातायात विभाग द्वारा केवल छोटे वाहन चालकों के दस्तावेजों की जांच कर खानापूर्ति कर दी जाती है, जबकि जिले की सड़कों में भारी वाहन चालक बेखौफ फर्राटे भरते हैं। लेकिन यातायात विभाग द्वारा ऐसे वाहन चालकों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

जबकि अधिकांश सड़क दुर्घटना लोगों में जागरूकता का अभाव होने के साथ ही साथ लापरवाही पूर्वक वाहन चलाने से होती है। लेकिन जिले में यातायात विभाग द्वारा भारी वाहन चालकों पर कार्रवाई नहीं की जाती है। विभागीय उदासीनता के चलते जिले में लोग बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। जिले की सड़कें हर दूसरे दिन लोगों की खून से लाल हो रही है। यातायात पुलिस के तमाम प्रयासों के बाद भी सड़क दुर्घटना पर रोक नहीं लग पा रही है। इसके चलते पिछले 11 माह में 191 लोगों की जान सड़क दुर्घटना में गई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में जनवरी से नवम्बर तक सड़क दुर्घटना में 191 लोगों की मौत हुई जबकि 6 सौ से अधिक लोग सड़क दुर्घटना के चलते घायल हुए हैं।

इनमें जांजगीर थाना क्षेत्र में 20, अकलतरा थाना क्षेत्र में 16, पामगढ़ थाना क्षेत्र के 12, शिवरीनारायण थाना क्षेत्र में 16, नवागढ़ थाना क्षेत्र में 8, बलौदा थाना में 18, चांपा थाना क्षेत्र में 12, बाराद्वार थाना क्षेत्र में 11, सक्ती थाना क्षेत्र में 19, डभरा थाना क्षेत्र में 14 व अन्य थाना व चौकी क्षेत्रों में सड़क दुर्घटना में मौत हुई। बावजूद इसके यातायात विभाग द्वारा छोटे वाहन चालकों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति कर दी जा रही है, लेकिन विभाग द्वारा नाबालिग व नशे में वाहन चलाने वालों पर नकेल नहीं कसा जा रहा है। सर्वाधिक दुर्घटना भारी वाहनों के चलते हो रही है।

नशे में चलाते हैं वाहन

वाहन चालक शराब पीकर वाहन चलाते हैं, इससे आए दिन दुर्घटना होती है। ऐसे में वाहनों को रोककर चालकों की जांच किया जाना भी आवश्यक है, मगर वाहन चालकों की नियमित जांच नहीं की जाती। इसके लिए वाहन मालिकों पर भी कार्रवाई का प्रावधान होना आवश्यक है। ताकि वे भारी वाहन नशे के आदी ड्राइवरों के हवाले न करें और किसी की जान दुर्घटना में न जाए, मगर इस तरह की कार्रवाई नहीं होती।

ओव्हर लोड पर नही हो रही कार्रवाई

केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा ओव्हर लोड वाहन चालकों के खिलाफ़ अपराधिक प्रकरण दर्ज करने का निर्देश 4 साल पहले दिया गया था, मगर ओव्हर लोड में भी जुर्माना लेकर चालकों को छोड़ दिया जाता है। इससे उनके हौसले बुलंद हैं और ओव्हर लोड वाहनों से आए दिन दुर्घटना होती है।