किसान आंदोलन के समर्थन में RLP, आज हजारों वाहनों के साथ दिल्‍ली की तरफ करेगी कूच

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बाद NDA की दूसरी सहयोगी पार्टी राजस्‍थान की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) कृषि कानूनों के खिलाफ खड़ी हो गई है। आरएलपी ने कहा कि आंदोलन में शामिल होने के लिए वह हजारों वाहन के साथ शाहजहांपुर बॉर्डर पर पहुंचेंगे।

इससे पहले, आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने धमकी दी थी कि अगर तीन कृषि कानूनों को निरस्त नहीं किया गया तो वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) छोड़ देंगे। उन्‍होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पत्र भी लिखा था।

पत्र में बेनीवाल ने हिंदी में कहा, “तीन बिलों के खिलाफ किसान के विरोध पर आपका ध्यान आकर्षित करके, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि इन बिलों को वापस लेने के लिए तुरंत कार्रवाई करें। देश को खिलाने वाले लोग इन सर्दियों और कोविड-19 महामारी के बीच आंदोलन कर रहे हैं, जो सरकार की छवि के लिए अच्‍छा नहीं है।”

बेनीवाल ने यह भी मांग की कि नरेंद्र मोदी सरकार स्वामीनाथन आयोग की सभी सिफारिशों को लागू करे। पत्र में बेनीवाल ने कहा, “आंदोलनकारी किसानों के साथ बातचीत के लिए उनकी इच्छा के अनुसार दिल्ली में एक उचित स्थान प्रदान किया जाना चाहिए। यदि इस मुद्दे पर तत्काल प्रभाव से कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो आरएलपी, जो एनडीए का एक घटक दल है, उसको गठबंधन में बने रहने के निर्णय पर पुनर्विचार करना होगा। RLP की ताकत किसानों और जवानों से है।”

पिछले हफ्ते, बेनीवाल ने आंदोलन का समर्थन करने के लिए तीन संसदीय समितियों से अपना इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

बेनीवाल ने कहा, “मैंने संसद में भाग लेने वाली समितियों के साथ विभिन्न जन-केंद्रित मुद्दों को उठाया था। यह कहा जाता है कि मुद्दों पर कार्रवाई नहीं की गई है। अगर कार्यवाही नहीं हुई तो संसदीय प्रणाली में समितियों का कोई औचित्य नहीं है।” बेनीवाल ने पदों से इस्तीफा देने के बाद कहा कि चूंकि मुद्दे अनसुने रहे और किसानों के आंदोलन के कारण मैं समितियों से अपना इस्तीफा दे रहा हूं।